अब तक 12, वो किस्मत वाला तेरहवां आखिर होगा कौन…?


विष्णुदेव साय मंत्रिमंडल में कुल जमा तेरह मंत्री ही रहेंगे


जगदलपुर (अर्जुन झा ):-तेरहवीं तो शोक और दुख की निशानी है, मगर छत्तीसगढ़ में तेरहवां खुशी का सबब बनेगा। पूरे राज्य में, खासकर भाजपा के लोगों में इस ‘तेरहवें’ को लेकर खासी चर्चा और संशय की स्थिति है। लोग एक -दूसरे से पूछ रहे हैं कि आखिर तकदीर वाला वो तेरहवां शख्स कौन होगा? विधायक आस भरी नजरों से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, प्रदेश भाजपा के प्रभारी ओम माथुर और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण देव सिंह की ओर देख रहे हैं।
छत्तीसगढ़ की जनता ने कांग्रेस को बेदखल कर भाजपा को राज्य की सत्ता सौंप दी है। विष्णुदेव साय के रूप में छत्तीसगढ़ को पहला विशुद्ध आदिवासी मुख्यमंत्री मिला है। राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री स्व. अजीत जोगी भी खुद को आदिवासी बताते रहे हैं, लेकिन उनकी जाति को लेकर विवाद अंत तक बना रहा। विष्णुदेव साय ने अपना मंत्रिमंडल भी गठित कर लिया है। पहले राउंड में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और दो उप मुख्यमंत्रियों अरुण साव तथा विजय शर्मा पहले ही शपथ ले चुके थे। मंत्रिमंडल के गठन में हो रहे विलंब को लेकर कांग्रेस भी भाजपा को ताने मारने लगी थी। काफी जद्दोजहद के बाद मुख्यमंत्री श्री साय ने अपनी केबिनेट की घोषणा की। दूसरे राउंड में नौ विधायकों को मंत्री बनाया गया, मगर उन्हें विभाग आवंटित नहीं किए गए। विभाग बंटवारे में काफी समय लगता देख कांग्रेस फिर से छींटाकशी पर उतर आई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने यह भी कह दिया कि मलाईदार विभाग की लालसा में मंत्रियों के बीच द्वन्द छिड़ा हुआ है। भाजपा में खींचतान चल रही है। अंततोगत्वा विभाग भी आवंटित कर दिए गए। अब रिक्त रह गए एक मंत्री पद के लिए फिर से जिज्ञासा भरा वातावरण दिखाई देने लगा है। भाजपा की ओर से शुरू से कहा जा रहा है कि विष्णुदेव साय मंत्रिमंडल का आकार काफी छोटा रहेगा। मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री और दोनों उप मुख्यमंत्रियों समेत कुल जमा तेरह सदस्य रहेंगे। अब तक बारह सदस्य ही मंत्रिमंडल में हैं और तेरहवें सदस्य को लेकर कयासों, चर्चाओं का बाजार गर्म है। भाजपा के प्रदेश स्तर के नेताओं के साथ ही मैदानी स्तर के नेता और कार्यकर्ता भी आपस में इसी बात को लेकर चर्चा में मशगूल दिखाई दे रहे हैं। लोग एक दूसरे से पूछ रहे हैं कि आखिर वह तेरहवां खुश किस्मत विधायक कौन होगा भाई, जिसे मंत्री पद मिलेगा?

वरिष्ठ विधायकों की हसरत
भाजपा के वरिष्ठ विधायकों की हसरत भी हिलोरें मारने लगी है। इन विधायकों को भरोसा है कि वरिष्ठता क्रम को ध्यान में रखते हुए भाजपा मंत्री पद एलॉट करेगी। वरिष्ठ विधायकों में बस्तर संभाग से विक्रम उसेंडी और लता उसेंडी भी शुमार हैं। ये दोनों आदिवासी समुदाय के हैं और पहले भी मंत्री रह चुके हैं। इन दोनों को विभागीय मंत्रालय चलाने और प्रशासनिक अमले पर नकेल कसे रखने का अच्छा तजुर्बा भी है। साय मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री को मिलाकर चार सदस्य हैं। इससे प्रतीत होता है कि अब तेरहवां सदस्य गैर आदिवासी होगा। अगर ऐसा कदम भाजपा उठाती है, तो विक्रम उसेंडी, लता उसेंडी और अन्य आदिवासी विधायकों की हसरत धरी रह जाएगी। अजा वर्ग से दयाल दास बघेल इकलौते मंत्री हैं, लिहाजा इस वर्ग से मंत्री बनाए जाने की ज्यादा संभावना है। इसी तरह ओबीसी वर्ग से सर्वाधिक पांच मंत्री हैं। इसलिए अब इस वर्ग का दावा स्वतः खारिज हो जाता है। वहीं सामान्य वर्ग से उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा एवं बृजमोहन अग्रवाल ही मंत्री हैं। इसलिए जनरल केटेगरी के विधायकों में से भी कोई तेरहवां मंत्री बन सकता है।

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