मंडी बोर्ड के अधीक्षण यंत्री मेहरबान, तो गधे भी हो गए पहलवान



कांग्रेस शासनकाल में की गई नियमों की अनदेखी

जगदलपुर (अर्जुन झा ):- खुदा मेहरबान, तो गधा भी पहलवान। यह कहावत छत्तीसगढ़ राज्य मंडी बोर्ड में चरितार्थ हो रही है। बोर्ड में इस कहावत की पंक्तियां कुछ बदल जाती हैं। यहां अधीक्षण अभियंता (एसी) मेहरबान, तो गधे भी पहलवान बन जाते हैं। गधे मेहनती तो होते हैं, पर उनमें समझदारी घोड़ों से कम ही होती है। मंडी बोर्ड में जो काम घोड़ों जैसी काबिलियत रखने वाले ठेकेदारों से कराए जाने चाहिए, उन्हें पूरा करने की जिम्मेदारी अपात्र और अल्प ज्ञानी ठेकेदारों को दे दी गई। योग्य ठेकेदार मुंह ताकते रह गए। इंजीनियर का काम टाइम कीपर से कराएंगे, तो काम का बेड़ागर्क होना ही है। कुछ ऐसी ही भर्राशाही मंडी बोर्ड में भी खूब चली है। अपने कांग्रेसी आकाओं को खुश करने के लिए एसी ने अपात्र ठेकेदारों को निर्माण कार्यों के ठेके दे दिए। सरकार बदलते ही अब नियम विरुद्ध दिए गए ऐसे ठेके के खिलाफ आवाज उठने लगी है।
मंडी बोर्ड के अधिकारी कांग्रेसी मानसिकता वाले अपात्र ठेकेदारों को भी निर्माण कार्यों के ठेके देने के लिए नियमों को शिथिल करते रहे हैं। बोर्ड के अधीक्षण अभियंता के कामकाज पर उंगलियां उठ रही हैं। राज्य मंडी बोर्ड की तकनीकी शाखा पर कृषि उपज मंडियों में सड़क, प्लेटफार्म, शेड, भवन आदि बनवाने की जिम्मेदारी रहती है। कांग्रेस शासन के चला चली की बेला में तकनीकी शाखा के अधीक्षण अभियंता द्वारा कांग्रेस से जुड़े ठेकेदारों को निर्माण कार्यों के ठेके दे दिए गए। ये ठेकेदार संबंधित कार्य को कराने के लिए पात्र नहीं हों तब भी नियमों को शिथिल कर उन्हें ठेके देने का खेल चलता रहा। ऐसा करके अधिकारी ने शासन को जमकर चूना लगाया है। सूत्र बताते हैं कि तकनीकी शाखा के अधीक्षण यंत्री कांग्रेस शासनकाल में पूरे पांच साल तक ऐसे कृत्य को अंजाम देते रहे हैं। उनकी यह कारगुजारी सरकार बदलते ही सामने आने लगी है। पता चला है कि अधीक्षण यंत्री ने निविदा की शर्तों में बदलाव और नियमों को शिथिल कर अपात्र कांग्रेसी ठेकेदारों को पात्र घोषित कर करोड़ों के ठेके दे दिए गए। अब सरकार बदलने के बाद पीड़ित पात्र ठेकेदारों द्वारा इसकी मय सबूत लिखित शिकायत करने की गई है। मिली जानकारी के अनुसार रायपुर जिले के आरंग क्षेत्र में धनेली से धनसुली तक 3 किमी लंबी चार करोड़ रू. की लागत वाली सड़क के निर्माण के लिए निविदा आमंत्रित की गई थी। इस निविदा से पात्र ठेकेदारों को महज इसलिए बाहर कर दिया गया कि वे गैर कांग्रेसी हैं। ये ठेकेदार मंडी बोर्ड के सभी मापदंडों खरे उतरते हैं। निर्माण कार्यों का उनके पास खासा तजुर्बा भी है। ऐसे योग्य ठेकेदारों को बेतुके कारण बताकर निविदा से बाहर करके अपात्र ठेकेदार के नाम से आनन फानन में कार्य स्वीकृत कर दिया गया। कहा जा रहा है ऐसे ठेकेदार को कार्य देने में मंडी बोर्ड के सभी नियमों को शिथिल कर दिया गया है। इसके अलावा प्रदेश में मंडी बोर्ड से संबंधित अन्य निर्माण कार्यों में भी उक्त अधिकारी ने ऐसी ही भर्राशाही की है। विष्णुदेव साय सरकार अगर इन तमाम ठेकों की बारीकी से जांच कराती है, तो बड़ी गड़बड़ी और करोड़ों का घोटाला उजागर हो जाएगा।

सवाल में उलझ गए अधीक्षण यंत्री
अधीक्षण अभियंता एनके डिडवानी का कहना है कि ठेके देने में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। नियमानुसार ठेके दिए गए हैं। मगर श्री डिडवानी नियमों को शिथिल किए जाने और चुनाव से कुछ दिन पहले ही आनन फानन में ठेके दिए जाने, पात्र ठेकेदारों को निविदा से बाहर कर दिए जाने जैसे सवालों पर चुप रहे। बार बार कुरेदने पर भी उनकी खामोशी नहीं टूट पाई। इससे जाहिर होता है कि दाल में कुछ तो नहीं, बल्कि बहुत कुछ काला है।

गड़बड़ी हुई है, तो होगी जांच
मामले के बारे में आपको अधीक्षण यंत्री से ही बात करनी चाहिए। फिर भी अगर ठेके देने में गड़बड़ी की गई है, तो इसकी जांच कराई जाएगी।
-यशवंत कुमार
एमडी, छ्ग राज्य मंडी बोर्ड

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