निजी विक्रेताओं के लिए सुरक्षित यूरिया दूसरे जिलों में बेचा, 21 दिन के लिए लगा दुकान पर बैन
जगदलपुर। बस्तर जिले में उर्वरक वितरण में बड़ी गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। मेसर्स हिन्दुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड के यूरिया वितरण में नियमों की अनदेखी करने पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। स्थानीय अधिकृत फर्म भानु कृषि सेवा केंद्र पर गंभीर अनियमितताओं के चलते थोक व्यवसाय के लिए 21 दिनों का प्रतिबंध लगा दिया गया है।
पूरा मामला 22 अप्रैल को पहुंची यूरिया की रेक के वितरण से जुड़ा है। जब कृषि विभाग ने वितरण व्यवस्था की जांच की, तो सिस्टम पूरी तरह अव्यवस्थित मिला। जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि निजी विक्रेताओं के लिए सुरक्षित 100.80 मिट्रिक टन यूरिया को नियमों के खिलाफ जाकर दूसरे जिले में खपा दिया गया। इसके अलावा, फर्म ने बिना आईएफएमएस आईडी के ही रेक पॉइंट से सीधे खुदरा विक्रेताओं को यूरिया बेच दिया। उप संचालक कृषि राजीव श्रीवास्तव ने बताया कि उर्वरक वितरण की पूरी प्रक्रिया डिजिटल निगरानी में होनी चाहिए, ताकि हर बोरी का हिसाब पारदर्शी रहे। लेकिन इस मामले में न केवल डिजिटल सिस्टम को दरकिनार किया गया, बल्कि परिवहन नियमों का भी खुला उल्लंघन हुआ। इससे जिले के किसानों के लिए खाद की उपलब्धता संकट में पड़ सकती थी। फिलहाल सप्लाई चेन न टूटे, इसलिए फर्म को रेक हैंडलिंग और परिवहन की अनुमति दी गई है, लेकिन बिक्री पर पूरी तरह रोक है। उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985, 1973 की अनदेखी की गई और अवैध परिवहन कर जिले के हिस्से का 100.80 मिट्रिक टन यूरिया का कोटा दूसरे जिले में भेज दिया गया। बताया गया है कि भानु कृषि केंद्र अगले 21 दिनों तक यूरिया की बिक्री थोक के भाव पर नहीं कर पाएगा। कृषि विभाग के अधिकारियों ने साफ किया है कि उर्वरक वितरण में किसी भी तरह की लापरवाही या हेराफेरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सीजन के समय खाद की कृत्रिम कमी पैदा करने वाले बिचौलियों और फर्मों पर अब लगातार कार्रवाई जारी रहेगी। भानु कृषि सेवा केंद्र को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा गया है कि क्यों न उनका लाइसेंस स्थायी रूप से निरस्त कर दिया जाए। जिला प्रशासन अब खाद के हर स्टॉक की रैंडम चेकिंग करने की योजना बना रहा है। कृषि विभाग के उप संचालक ने बताया कि नियमित रूप से उर्वरक विक्रेताओं की जांच पड़ताल जारी रहेगी। किसी प्रकार की उर्वरक बिक्री पर अनियमिता पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जिसके लिए टीम लगातार जिले में लायसेंस धारक उर्वरक विक्रेताओं के जांच पड़ताल में जुटी है।
