सरपंच आंदोलन को अधिकारियों का संरक्षण?


अर्जुन झा-
जगदलपुर। बस्तर संभाग के कांकेर जिला अंतर्गत अंतागढ़ क्षेत्र में कांग्रेस के समर्थन में चल रहे सरपंच आंदोलन को पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का खुला संरक्षण मिल रहा है। प्रदर्शनकारी और अधिकारी इस भीषण गर्मी में यात्रियों की परेशानी की जरा भी परवाह नहीं कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी और कांग्रेसी बीच सड़क पर तंबू गाड़ कर बैठे हैं, जहां जंबो कूलर और नॉर्मल कूलर चल रहे हैं। वहीं सुरक्षा और शांति व्यवस्था के नाम पर मौजूद थानेदार एक दुकान पर बैठ कर कूलर की ठंडी हवा खाते दिख रहे हैं।
अंतागढ़ में आज सुबह से ही सरपंचों के एक समूह द्वारा पूर्व कांग्रेस के विधायक के साथ नारायणपुर जाने वाले मार्ग के बीचों बीच तंबू लगाकर धरना प्रदर्शन किया जा रहा था। चंद सरपंच और कुछ कांग्रेसी कार्यकर्ता ही उस आंदोलन का हिस्सा बने नजर आए। बीच सड़क पर तंबू गाड़ने से सैकड़ों सवारी वाहन, यात्री बसें और माल वाहक गाड़ियों के चालक, यात्री और हमाल तपती धूप में झुलसते रहे, वहीं नगर के पुलिस अधिकारी जायसवाल एक सिपाही के साथ आंदोलनकारियों के तंबू के सामने एक दुकान में ठंडी हवा खाते रहे। कुछ अखबारों के जिला ब्यूरो हेड जो रायपुर से नारायणपुर की ओर जा रहे थे, वे भी इस अनापेक्षित आंदोलन का शिकार हुए। ये पत्रकार टीआई जायसवाल से सहयोग की उम्मीद कर बाहर निकलने का रास्ता पूछने पहुंचे, किंतु ठंडी हवा के बुलबुले के बीच से नहीं निकलते उन्होंने पत्रकारों को वापस भानुप्रतापपुर जाने को कह दिया। उन्होंने मानवीय संवेदना को दरकिनार करते हुए लगभग डांटने के अंदाज में सहयोग करने से साफ इंकार कर दिया। वहीं एसडीएम श्री रजक ने भी स्थानीय लोगों की मदद लेकर निकलने सलाह दे डाली। जब पीड़ित पत्रकारों ने उन्हें दोबारा फोन लगाया तो उन्होंने फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझा। लगता है भाजपा सरकार के सुशासन तिहार के बीच नक्सलमुक्त बस्तर में पुलिस और प्रशासन के अधिकारी कांग्रेस के लिए सुशासन लाने की पूरी तैयारी कर बैठे हैं।की यह गंदी तस्वीर सामने ही नजर आई जब पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने ऐसी स्थिति उत्पन्न कर नक्सल मुक्त बस्तर को विकास के रास्ते ले जाने हेतु दृढ़संकल्पित साय सरकार की मंशा पर पानी फेरने का काम कर रहे हैं।

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