महतारी योजना ने बढ़ाई भाजपा की अंदरूनी बेचैनी: अशोक फड़नवीस
राजनांदगांव। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व पार्षद अशोक फड़नवीस ने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि प्रदेश की जनता आज आर्थिक संकट, अव्यवस्थित प्रशासन और ठप राजस्व व्यवस्था से जूझ रही है, लेकिन सरकार नए-नए नैरेटिव गढ़कर लोगों का ध्यान मूल समस्याओं से भटकाने में लगी है।
कांग्रेस नेता अशोक फड़णवीस ने आरोप लगाया कि भाजपा की आंतरिक खींचतान के कारण ही कार्यकर्ता दो वर्षों से सरकारी मनोनीत पदों से वंचित हैं और महतारी वंदन योजना जैसी प्रोजेक्ट उन्हीं पर भारी पड़ रही है। श्री फड़नवीस ने आरोप लगाया कि बिजली बिल, जमीन खरीदी-बिक्री, शराब और अन्य राजस्व स्रोतों में बढ़ती वसूली से जनता की जेब ढीली हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आर्थिक संकट गहराया हुआ है और किसान चारों ओर से परेशान हैं। किसानों से स्टॉल लगाकर उनकी फसल राशि देने का वादा कर सत्ता में आई भाजपा सरकार आज अपने ही वादों को भूल चुकी है। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग को प्रयोगशाला की तरह चलाया जा रहा है, जहां न कर्मचारियों को सुविधा है और न ही आम फरियादियों को राहत मिल पा रही है। शासन की नीतियों को उन्होंने असंवेदनशील बताते हुए कहा कि प्रशासन सत्ताधारियों के नियंत्रण से बाहर होता जा रहा है। कानून व्यवस्था चरमराई हुई है और शासन के विरुद्ध आए दिन नए-नए मुद्दों को लेकर आंदोलन हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता को हर क्षेत्र में राहत की बजाय असुरक्षा का वातावरण महसूस हो रहा है। भाजपा के बड़े नेताओं की खींचतान के कारण ही कार्यकर्ता मंडल, आयोग और एल्डरमैन जैसे महत्वपूर्ण सरकारी मनोनीत पदों से वंचित हैं। दो वर्षों से नगर निकायों में एल्डरमैन की नियुक्ति लंबित है जिससे स्थानीय प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है। महतारी वंदन योजना भाजपा कार्यकर्ताओं पर भारी पड़ रही है क्योंकि उनके माध्यम से आवंटित निधियों से मूलभूत सुविधाएं जनता तक नहीं पहुंच पा रही हैं। अशोक फड़णवीस ने आरोप लगाया कि सरकार दो वर्षों से करोड़ों रुपये रोककर बैठी है और जनता व कार्यकर्ता दोनों को ठग रही है। अंत में उन्होंने कहा कि जनता की मूल समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए ही सरकार नए-नए नैरेटिव गढ़ रही है। सत्ता अपना दायित्व निभाने में विफल है और जनता समाधान की प्रतीक्षा में है। श्री फड़नवीस ने अपील की कि देशप्रेम और एकता के साथ जनता अपनी आवाज बुलंद करती रहे।
