नक्सलवाद के खात्मे के बाद बदल चुके बस्तर का शानदार नजारा



अर्जुन झा-
जगदलपुर। नक्सल समस्या के खात्मे के बाद बस्तर में आए बदलाव का शानदार नजारा देखने को मिल रहा है। जहां कभी नक्सलियों के खौफ के चलते निरीह आदिवासियों के रोजगार का बड़ा जरिया छिन गया था, वहां अब उम्मीदों की फसल लहलहा रही है। जिंदगी फिर से पटरी पर दौड़ने लगी है।श्रमिकों और नाविकों की जिंदगी में खुशियों की बहार आ गई है।
बस्तर संभाग के अति नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले से जो तस्वीर आई है, वह बस्तर में आए बदलाव की कहानी बयां कर रही है। बीजापुर जिले में इंद्रावती नदी के उस पार स्थित अबूझमाड़ क्षेत्र में पहली बार तेंदूपत्ता का संग्रहण कार्य चल रहा है। बीजापुर वन मंडल द्वारा यहां मई के प्रथम सप्ताह से तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य शुरू किया गया है। प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के फड़ों में संग्रहित तेंदूपत्ता का उपचारण के बाद बोरा भर्ती कार्य कर फड़ों से अस्थायी एवं स्थायी गोदामों तक परिवहन का कार्य करवाया भी किया जा रहा है। जिला यूनियन बीजापुर के उप मंडलाधिकारी के अनुसार 346 फड़ों से सीधे फड़ से बीजापुर एवं मद्देड़ स्थित स्थायी गोदामों एवं 236 फड़ों का फड़ से समिति हेतु निर्धारित अस्थायी गोदामों तक तेंदूपत्ता के बोरों का परिवहन करवाया जा रहा है। फड़ों से तेंदूपत्ता का परिवहन संबंधित फड़ ग्राम के स्थानीय स्तर पर उपलब्ध ट्रैक्टरों के माध्यम से करवाया जा रहा है। वर्तमान में कृषि कार्य बंद होने पर ग्रामों में ट्रैक्टरों का उपयोग नहीं के बराबर होता है। ऐसी स्थिति में स्थानीय ट्रैक्टर मालिक किसानों को आर्थिक नुकसान होता है, मगर अब तेंदूपत्ता बोरों का परिवहन करने से उन्हें अतिरिक्त आय हो रही है। नक्सलमुक्त होने के बाद तेंदूपत्ता तोड़ाई और विक्रय से यहां के श्रमिकों को भी आमदनी का बड़ा जरिया मिल गया है। तेंदूपत्ता संग्रहण में ग्रामीण और परिवहन में ट्रैक्टर मालिक किसान बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं। प्राथमिक वनोपज सहकारी समिति गुदमा के लॉट क्रमांक 23 अ गुदमा के 11 फड़ों पर संग्रहित 3163 मानक बोरा एवं 23 ब गुदमा के 10 फड़ों पर संग्रहित 4165 मानक बोरा तेंदूपत्ता का परिवहन 42 ट्रैक्टरों से मात्र एक सप्ताह के अंदर कर ट्रैक्टर मालिकों ने 11.35 लाख की आय अर्जित की है। यह राशि उनके बैंक खातों में विभाग द्वारा डाली जाएगी।

नाविकों की भी बल्ले- बल्ले
इंद्रावती नदी के उस पार स्थित अबूझमाड़ क्षेत्र के 7 तेंदूपत्ता फड़ों से तेंदूपत्ता बोरों का परिवहन स्थानीय लकड़ी की नावों के माध्यम से किया जा रहा है। दो-दो नावों को जोड़कर तेंदूपत्ता बोरों को परिवहन किया जा रहा हैं जिससे स्थानीय ग्रामीण नाविकों को भी अतिरिक्त आमदनी का जरिया प्राप्त हो रहा है। इन फड़ों पर संग्रहित लगभग 1712 बोरा तेंदूपत्ता का परिवहन कराने पर स्थानीय नाविकों को 1.16 लाख रुपए की अतिरिक्त आमदनी होगी। इसके साथ ही तेंदूपत्ता संग्रहण में लगे आदिवासी श्रमिक भी अब अच्छी कमाई कर रहे हैं। बदल चुके बस्तर में ट्रैक्टर मालिक किसान, नाविक और तेंदूपत्ता श्रमिक सभी खुश हैं।

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