किसी यातना गृह से कम नहीं है यह छात्रावास



-अर्जुन झा-
जगदलपुर। छात्रावास वह जगह है, जहां छात्र छात्राएं आराम और सुख सुविधाओं के बीच रहकर पढ़ाई कर सकें, अपना भविष्य संवार सकें। वहीं बस्तर में कुछ छात्रावास तो यातना गृह में तब्दील हो चुके हैं। इन यातना गृहों में न पीने के लिए स्वच्छ पानी है, न कूलर, पंखे हैं। आलम तो यह कि दूषित पानी पीने से बीमार पड़ने पर छात्राओं को एक्सपायर्ड दवाएं दी जाती हैं। यानि एक तो करेला, ऊपर से नीम चढ़ा। ऐसा ही एक यातना गृह जगदलपुर में भी है।
बेटियों को उच्च तकनीकी शिक्षा दिलाने के लिए शासन द्वारा जगदलपुर में महिला पॉलिटेक्निक कॉलेज खोला गया है। यहां अध्ययनरत छात्राओं के लिए छात्रावास की भी व्यवस्था की गई है। शासन छात्राओं को तकनीकी शिक्षा दिलाने हेतु संकल्पित भी है। इसके लिए अच्छे हॉस्टल भी बनाए गए हैं।जगदलपुर के धरमपुरा स्थित महिला पॉलीटेक्नीक छात्रावास में पचासों छात्राएं रह कर अध्ययन करती हैं। इस हॉस्टल में अधीक्षिका की लापरवाही के कारण भीषण गर्मी के इस दौर में पीने, नहाने और कपड़े धोने के पानी के लिए छात्राओं को बुरी तरह परेशान होना पड़ रहा है। मिली जानकारी के अनुसार छात्राएं पीने के पानी से लेकर अपने नित्यकर्म के पानी के लिए घंटों टैंकर का इंतजार करती रहती हैं। छात्राएं बताती हैं कि छात्रावास की पानी टंकी की सफाई कई माह से नहीं की गई है, नतीजतन टंकी से गंदा और बेहद बदबूदार पानी आता है। इस पानी का उपयोग करने से छात्राएं रोगग्रस्त हो रही हैं। कभी कभी हॉस्टल अधीक्षिका जो दवाई देती है वह भी एक्सपायरी होती हैं। भोजन की व्यवस्था भी राम भरोसे है। क्योंकि अधीक्षिका द्वारा प्रतिमाह रसोई खर्च करीब 2 हजार हजार रुपए प्रति छात्रा लिए जाते हैं। बदले में मिलता है स्तरहीन और बेस्वाद भोजन। जल संकट और अन्य दिक्कतों के चलते गर्मी प्रारंभ होते ही दर्जनों छात्राओं ने हॉस्टल छोड़ दिया है, क्योंकि गर्मी से राहत के लिए हॉस्टल में कूलर तो दूर की बात, पंखे तक नहीं हैं और पानी की तंगी अलग से परेशान किए हुए है। सुशासन सरकार में शिक्षा के साथ उच्च तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने वाली छात्राओं पर विभागीय अत्याचार इतना बढ़ गया है कि वे छात्रावास को यातना गृह समझने लगी हैं।

दूर कर रहे हैं कमियां
कुछ दिन पूर्व ही छात्रावास की अव्यवस्थाओं की जानकारी मुझे मिली है। स्वच्छ पानी की व्यवस्था हेतु टंकी की सफाई कराई गई है। वाटर प्यूरीफायर मशीन को ठीक कराया गया है। कॉलेज आदिम जाति कल्याण विभाग से संबंधित नहीं है अतः छात्राओं को मेस चार्ज वहन करना पड़ता है, एक्सपायरी दवाई की जानकारी मुझे अभी मिली है मै दो दिन के भीतर ही अधीक्षिका के साथ बैठक कर व्यवस्था दुरुस्त करवा दूंगा।
संजय त्रिवेदी, प्रभारी प्राचार्य महिला पॉलiटेक्नीक कॉलेज, जगदलपुर,

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *