बस्तर के जंगलों में दिखे स्फिरोथिका मस्की फ्रॉग



-अर्जुन झा-
जगदलपुर बस्तर के जंगलों में अब दुर्लभ प्रजाति के स्फिरोथिका मस्की या मस्की बरोइंग फ्रॉग (मेंढक) भी नजर आने लगे हैं।रेतीली मिट्टी में धंसे रहने वाला यह मेंढक पानी गिरने पर बाहर निकलने लगे हैं।


बस्तर के माचकोट फॉरेस्ट रेंज में बाघ के पंजों के निशान देखने जाने के बाद अध्ययन दौरे पर रात 8 बजे क्षेत्र में निकले जूलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रत्यूष महापात्र को यह मेंढक सड़क पार करते हुए मिला। श्री महापात्र नेब ताया कि रात में यह विशेष मेंढक फुदक फुदक कर रास्ता पार करते हुए दिखा। उन्होंने बतया कि यह एक मध्यम आकार का लगभग 40 सेंटीमीटर लंबाई का मेंढक होता है। इसके सर लंबाई की तुलना में चौड़ा ज्यादा होता है और इसका थूथन थोड़ा लंबा होता है मगर मुंह से आगे बढ़ा हुआ नहीं होता है। इसके नासा छिद्र आंख की तुलना में थूथन की तरफ होते हैं पिछली टांगों में उंगलियों के साथ एक छोटे फावड़े के समान आकार वाली संरचना रहती है, जिससे वह गीली मिट्टी को आसानी से खोद लेता है। पीले कत्थई रंग की भुजा के पीछे पीले धब्बे होते हैं पीठ पर अंग्रेजी के उल्टे वी के समान निशान होता है। वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रत्यूष महापात्र ने बताया कि बारिश के मौसम में लगातार जंगलों में रात में भ्रमण करने पर और भी अनेक विशेष प्रजातियां पाई जा सकती हैं। एक समान रंग रूप आकार में दिखने वाले मेंढक जिसे सामान्य जन एक ही प्रजाति मान सकते हैं अक्सर डीएनए बार कोडिंग करने से प्रजातियां भिन्न भी हो जाती हैं।
यह अस्थाई जल जमाव के गड्ढों में प्रजनन करते हैं
भारत के बाहर यह पाकिस्तान नेपाल में भी पाए जाते हैं। बहुत ही शीघ्र पूरे छत्तीसगढ़ में पाए जाने वाले मेंढकों की विस्तृत जानकारी पुस्तक के रूप में प्रकाशित होने वाली है।

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