भाजपा राज में न्यायालयीन आदेशों की अवहेलना चरम पर हाईकोर्ट में अवमानना मामलों का विस्फोट सरकार की नाकामी का प्रमाण — मोहम्मद अकबर
कवर्धा,,,पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहम्मद अकबर ने कहा है कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में लगातार बढ़ रही अवमानना याचिकाएं भाजपा सरकार की प्रशासनिक अराजकता, संवैधानिक संस्थाओं के प्रति असम्मान और अधिकारियों पर नियंत्रण खो चुकी सरकार का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं।
पूर्व मंत्री मो. अकबर भाई ने कहा कि जब न्यायालय के आदेशों का पालन कराने के लिए नागरिकों को बार-बार अदालत की शरण लेनी पड़े, तब यह केवल कानूनी विषय नहीं रह जाता, बल्कि सरकार की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह बन जाता है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में जहां 1,010 अवमानना याचिकाएं दायर हुई थीं, वहीं भाजपा सरकार के दौरान यह संख्या बढ़कर वर्ष 2025 में 1,884 तक पहुंच गई। चार वर्षों में लगभग 87 प्रतिशत की वृद्धि यह साबित करती है कि प्रदेश में शासन-प्रशासन न्यायालयीन आदेशों के पालन को लेकर गंभीर नहीं है।
मो.अकबर भाई ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में अधिकारी जवाबदेही से मुक्त होकर काम कर रहे हैं। आम जनता को अपने संवैधानिक अधिकार प्राप्त करने के लिए पहले सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं और फिर न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ता है। इसके बाद भी यदि न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं होता, तो नागरिकों को अवमानना याचिका दायर करनी पड़ती है। यह स्थिति प्रशासनिक विफलता की पराकाष्ठा है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार “सुशासन” का दावा करती है लेकिन वास्तविकता यह है कि न्यायालयों में बढ़ती अवमानना याचिकाएं सरकार के दावों की पोल खोल रही हैं। यदि शासन संवेदनशील और जवाबदेह होता तो न्यायालयीन आदेशों की अवहेलना के इतने मामले सामने नहीं आते।
मोहम्मद अकबर ने कहा कि वर्ष 2024 में 1,504 और वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 1,884 अवमानना याचिकाएं दर्ज होना बताता है कि प्रदेश में कानून के शासन की स्थिति कमजोर हुई है। यह केवल आंकड़ा नहीं बल्कि हजारों नागरिकों की पीड़ा और प्रशासन की उदासीनता का दस्तावेज है।
उन्होंने राज्यपाल से आग्रह किया है कि वे इस गंभीर विषय पर राज्य सरकार से जवाब मांगें तथा न्यायालयीन आदेशों के पालन की नियमित समीक्षा, दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और संवैधानिक मर्यादाओं की रक्षा हेतु आवश्यक निर्देश जारी करें।
अकबर ने कहा कि कांग्रेस पार्टी न्यायपालिका की गरिमा और संविधान की सर्वोच्चता में विश्वास रखती है। लोकतंत्र में सरकारें अदालतों के आदेशों से ऊपर नहीं होतीं। भाजपा सरकार को बताना चाहिए कि उसके शासनकाल में न्यायालय की अवमानना से जुड़े मामलों में इतनी चिंताजनक वृद्धि क्यों हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
