अमरकंटक के मृत्यंजय आश्रम में शिवभक्तों की सेवा का सिलसिला जारी, 36 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने ग्रहण की प्रसादी

कवर्धा,,,14 अगस्त 2026। श्रावण मास में अमरकंटक से निकलने वाली कांवड़ यात्राओं के बीच मृत्यंजय आश्रम श्रद्धालुओं की सेवा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मां नर्मदा का जल लेकर विभिन्न शिवालयों की ओर रवाना हो रहे कांवड़ियों के साथ-साथ पर्यटकों और साधु-संतों के लिए भी आश्रम में निरंतर निःशुल्क भोजन एवं विश्राम की व्यवस्था की जा रही है। अब तक 150 बोल बम समिति के 36 हजार से अधिक श्रद्धालु, पर्यटक एवं साधु-संत यहां भोजन प्रसादी ग्रहण कर चुके हैं।

शिवभक्तों की कठिन पदयात्रा को सुगम बनाने के उद्देश्य से उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक श्री विजय शर्मा की पहल पर मृत्यंजय आश्रम में सेवा व्यवस्था को विशेष रूप से विस्तार दिया गया है। श्रावण मास के प्रारंभ से ही आश्रम में बड़ी संख्या में कांवड़ यात्री पहुंच रहे हैं, जिनका आत्मीयता के साथ स्वागत कर उन्हें भोजन, ठहरने, पेयजल सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

बोल बम समितियों से जुड़े लगभग कांवड़ यात्रियों सहित अन्य श्रद्धालुओं के लिए भी आश्रम में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। प्रतिदिन सुबह और शाम निःशुल्क भोजन प्रसादी परोसी जा रही है। लंबी दूरी की पदयात्रा से थके श्रद्धालुओं के लिए विश्राम की सुविधा के साथ आवश्यकतानुसार अन्य सहयोग भी उपलब्ध कराया जा रहा है।

अमरकंटक से मां नर्मदा का जल लेकर भोरमदेव, डोंगरिया, पंचमुखी बूढ़ा महादेव सहित विभिन्न शिवालयों की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह सेवा व्यवस्था काफी उपयोगी साबित हो रही है। कठिन यात्रा के दौरान भोजन और विश्राम की सुविधा मिलने से कांवड़ियों को राहत मिल रही है और वे नई ऊर्जा के साथ अपनी यात्रा आगे बढ़ा रहे हैं।

श्रद्धालुओं ने कहा कि अमरकंटक में मिल रही सेवा भावना ने उनकी यात्रा को और अधिक सहज बना दिया है। भोजन एवं विश्राम की व्यवस्था के साथ रास्ते में आवश्यक सुविधाओं का ध्यान रखे जाने से दूर-दराज से आने वाले शिवभक्तों को काफी सुविधा मिल रही है। श्रद्धालुओं ने इस सेवा कार्य के लिए उप मुख्यमंत्री और कवर्धा विधायक विजय शर्मा के प्रति आभार व्यक्त किया।

श्रावण मास के दौरान शिवभक्तों की बढ़ती संख्या को देखते हुए मृत्यंजय आश्रम में सेवा कार्य लगातार जारी है। आस्था के साथ सेवा, समर्पण के साथ सहयोग और श्रद्धालुओं के प्रति सम्मान की भावना से संचालित यह व्यवस्था अमरकंटक आने वाले कांवड़ यात्रियों के लिए सहारा बन रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *