निर्दोष किसानों को एनएमडीसी ने दे दी “काला पानी” की सजा!
-अर्जुन झा-
जगदलपुर। दशकों तक नक्सल आतंक की त्रासदी भोगते रहे बस्तर के आदिवासी ग्रामीणों और किसानों को माओवाद के खात्मे के बाद भी राहत नहीं मिल पाई है।. अब इन बेकसूर ग्रामीणों और किसानों को “काला पानी” की सजा भुगतनी पड़ रही है। काला पानी की यह सजा किसानों और ग्रामीणों को उनकी ही जमीन पर एनएमडीसी द्वारा स्थापित नगरनार स्टील प्लांट प्रबंधन ने दी है। प्लांट से निकलने वाले केमिकलयुक्त काले और जहरीले पानी ने दर्जनों किसानों के पचासों एकड़ खेतों को तबाह करके रख दिया है। इतना ही नहीं प्लांट के इस जहर से गांवों के तालाब और दीगर जल स्त्रोत भी जहरीले होते जा रहे हैं। इतना सब कुछ हो जाने के बाद भी प्लांट प्रबंधन और एनएमडीसी मैनेजमेंट हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। प्लांट प्रबंधन का कहना है कि जिला प्रशासन जो भी आदेश देगा, उसका पालन किया जाएगा। इसका अर्थ यह हुआ कि प्लांट प्रबंधन अपने स्तर पर कोई कदम नहीं उठाएगा।
सड़कें और फैक्ट्रियां विकास और रोजगार की राह खोलती हैं। इसी उम्मीद के साथ नगरनार और आसपास के करीब दर्जनभर गांवों के ग्रामीणों ने अपनी बेशकीमती उपजाऊ जमीन स्टील प्लांट की स्थापना
के लिए दे दी थी। तब वादा किया गया था कि जिन ग्रामीणों और किसानों की जमीन ली गई है उनके परिवारों के सदस्यों को नौकरी दी जाएगी, ग्रामीणों के ईलाज के लिए बड़ा अस्पताल खोला जाएगा और ग्रामीणों के बच्चों की उत्कृष्ट शिक्षा के लिए स्कूल खोले जाएंगे। ये वादे आज तक पूरी तरह पूरे नहीं हो पाए हैं। उल्टे अब ग्रामीणों को काला पानी की सजा दी जा रही है। नगरनार स्टील प्लांट से निकलने वाले अपशिष्ट जल और केमिकल के प्रबंधन के लिए कोई इंतजाम नहीं किया है। प्लांट के सारे अपशिष्ट जल और केमिकल को प्लांट से बाहर खुले में बहाया जा रहा है। नगरनार प्लांट प्रबंधन की लापरवाही के चलते वहां के 5 दर्जन से भी ज्यादा किसानों के करीब 150 एकड़ खेत जहरीले पानी से बर्बाद हो चुके हैं। स्टील प्लांट के गेट नं 3 से लेकर उपनपाल मार्ग तक काला पानी भरे रहने से सड़क लगभग बंद हो गई है और आसपास के इलाकों में तीक्ष्ण दुर्गंध फैली हुई है। इससे लोगों में जानलेवा बीमारी फैलने का खतरा बना बढ़ गया है। उपनगाल मार्ग पर लगभग ढाई फीट काला पानी भरा हुआ है। यह काला पानी सड़क पर बहते हुए आसपास के खेतों और तालाबों में पहुंच रहा है। इससे खेती की जमीन लगातार बंजर होती चली जा रही है और तालाब तथा अन्य जलस्त्रोत भी दूषित होते जा रहे हैं। बस्तर जिले के नगरनार में स्टील प्लांट की स्थापना होने से इलाके के लोगों को बड़ी उम्मीद थी लेकिन ग्रामीणों एवं किसानों की उम्मीदों पर काला पानी फिर गया है। स्थानीय ग्रामीणों को बड़ी उम्मीद बड़ी थी कि प्लांट प्रबंधन सीएसआर के तहत गांवों का चहुमुखी विकास होगा और स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा, लेकिन सारी उम्मीदें धरी रह गईं। जो जमीन पहले धान के रूप में सोना उगलती थी, वह अब बंजर हो चली है। किसानों की आमदनी का जरिया से छिन गया है, उनकी आर्थिक स्थिति डांवाडोल हो गई है। नगरनार स्टील प्लांट से निकलने वाला जहरीला धुंआ और काला पानी आसपास के गांवों के ग्रामीणों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन गए हैं।ग्रामीण और पीड़ित किसान कई बार इस मसले को प्लांट प्रबंधन और प्रशासन के समक्ष उठा चुके हैं, मगर उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। नगरनार प्लांट से निकलने वाले अपशिष्ट पानी में खतरनाक केमिकल और जहरीले तत्व मौजूद रहते हैं। इस पानी को बिना उपचारित किए नदी, नालों, तालाबों और खेतों में छोड़ने से जल प्रदूषण, भूमि प्रदूषण और स्वास्थ्यगत गंभीर समस्याएं पैदा होती हैं। जमीन की उर्वरा क्षमता घट जाती है। काला पानी. के जल स्त्रोतों में मिलने से कैंसर, पीलिया, टाईफाईड, त्वचा रोग जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बना रहता है। नगरनार इस्पात संयंत्र में वार्षिक उत्पादन लगभग 30 लाख टन होता है। संयंत्र हर माह 25 लाख टन स्टील उत्पादन करता है। सूत्रों के अनुसार इस उत्पादन से प्रबंधन को तिमाही मुनाफा 30 करोड़ से अधिक है। एनएमडीसी प्रबंधन स्टील उत्पादन कर करोड़ों का मुनाफा कमा रहा है लेकिन ग्रामीणों की सुविधा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है।
करेंगे प्रशासन के निर्देश का पालन
वेस्टेज पानी के मामले में प्रबंधन एवं कलेक्टर बस्तर के बीच मीटिंग हो चुकी है। कलेक्टर जो आदेश देंगे, उसका पालन किया जाएगा।
-रफीक अहमद,
प्रमुख, जनसंपर्क विभाग नगरनार स्टील प्लांट
भेजा है मुआवजे का प्रस्ताव
जिनकी जमीन काले पानी से बंजर हुई है उन सभी किसानों को मुआवजा देने के लिए प्रस्ताव तैयार कर कलेक्टर को भेजा जा चुका है। वेस्टेज पानी के स्थाई समाधान के लिए अंडर ग्राऊंड पाईप लाईन के माध्यम से पानी निकासी और पॉन्ड बनाने की व्यवस्था कराई जाएगी। इसके लिए जमीन तलाशी जा रही है।
-श्री तिवारी,
एसडीएम, जगदलपुर
स्थाई समाधान निकाले प्रबंधन
बस्तर सांसद महेश कश्यप नगरनार स्टील प्रबंधन और सीएमडी को कह चुका हूं कि किसानों एवं ग्रामीणों की समस्या पर गंभीरता से ध्यान दिया जाए। समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। एनएमडीसी के गेट नं 3 से निकल रहे काले पानी से ग्रामीणों और किसानों को बड़ी परेशानी हो रही है।जुझना नहीं पड़ता लेकिन प्रबंधन की लापरवाही इनके लिए आफत बन गया है। यह एक दिन की समस्या नहीं है, इसलिए इसका ठोस समाधान जरूरी है।
-महेश कश्यप,
सांसद, बस्तर
सिर्फ मुआवजा हल नहीं: बघेल
इस मामले में नगरनार के पूर्व सरपंच एवं बस्तर जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष लेखन बघेल का सीधा आरोप है कि एनएमडीसी प्रबंधन को किसानों और ग्रामीणों की समस्या से कोई लेना देना नहीं है। प्लांट से निकलने वाले दूषित पानी की व्यवस्थित निकासी के उपाय नहीं किए गए हैं। उन्होंने बताया कि जमीन तो बंजर हो ही रहा है आसपास के ग्रामीण गंभीर बीमारी के चपेट में भी आने लगे हैं। मुआवजा के नाम पर किसानों को 30 से 40 फीसदी ही मुआवजा दिया जाता है। उन्होंने कहा कि मुआवजा समस्या का समाधान नहीं है, प्रबंधन एवं प्रशासन को इसकी स्थाई व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया जाएगा तो प्लांट के घेराव के साथ-साथ आंदोलन किया जाएगा।उन्होंने कहा स्थाई समाधान के लिए 40 से 50 करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार हुआ है, जिस पर काम बारिश के बाद शुरू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिन किसानों की फसल खराब हुई है उन्हें 3100 रूपए प्की दर से मुआवजा देने का निर्देश प्रबंधन को दिया जाए। श्री बघेल ने कहा कि बीमारी फैलाने की आशंका को देखते हुए क्षेत्र में विशेष शिविर लगाकर जिला प्रशासन ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण भी करवाए।
पीड़ितों को मिले इंसाफ: जैन
जगदलपुर के पूर्व विधायक रेखचद जैन ने कहा है कि एनएमडीसी ने नगरनार में प्लांट स्थापना के पूर्व बड़ी-बड़ी बातें कही थीं। किसानों, ग्रामीणों और गांवों के विकास का दम भरा गया था। लेकिन सारी बातें हवा हवाई साबित हुई हैं। जिन किसानों ने प्लांट लगाने के लिए जमीन दी है, उन्हीं किसानों की बची खुची जमीन काले पानी के जहर से बंजर हो गई है। इस मामले में प्रबंधन एवं प्रशासन स्थाई व्यवस्था नहीं कर पाए हैं। इलाके में बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है। प्रशासन को समय रहते क्षेत्र में विशेष शिविर लगाकर ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण कराना चाहिए। प्रबंधन एवं प्रशासन समय जागे तो कांग्रेस पार्टी पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए आंदोलन करेगी।
