आत्मनिर्भर दलहन मिशन के तहत उन्नत उड़द बीज वितरण एवं कृषक संगोष्ठी कार्यक्रम का हुआ आयोजन

कवर्धा,,,07 जुलाई 2026। कृषि विज्ञान केन्द्र, कवर्धा द्वारा आत्मनिर्भर दलहन मिशन के अंतर्गत विकासखंड लोहारा में 02 जुलाई 2026 को उन्नत उड़द किस्म आईपीयू-13-1 की वैज्ञानिक खेती विषय पर कृषक संगोष्ठी एवं आदान सामग्री वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में लालाराम साहू उपस्थित रहे। कार्यक्रम में लोहारा विकासखंड के विभिन्न ग्रामों से आए लगभग 70 किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में चयनित किसानों को उड़द की उन्नत किस्म आईपीयू-13-1 के प्रमाणित बीज, फॉस्फेट घुलनशील जीवाणु (पीएसबी) तथा राइजोबियम कल्चर का वितरण किया गया। लालाराम साहू ने किसानों से वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि गुणवत्तायुक्त बीजों एवं जैव उर्वरकों के उपयोग से उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मृदा स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। उन्होंने किसानों से बीजोपचार एवं जैव उर्वरकों का नियमित उपयोग करने की अपील की।


कृषि विज्ञान केन्द्र, कवर्धा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. बी.पी. त्रिपाठी ने बताया कि आत्मनिर्भर दलहन मिशन का उद्देश्य देश में दलहनी फसलों के उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि कर भारत को दलहन उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। इसके तहत गुणवत्तायुक्त बीज उपलब्ध कराने, उन्नत एवं जलवायु-अनुकूल किस्मों के प्रसार, वैज्ञानिक उत्पादन तकनीकों, जैव उर्वरकों एवं संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कबीरधाम जिले में समूह अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन, उन्नत बीज वितरण, कृषक प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से उड़द उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं।
संगोष्ठी में विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. एन.सी. बंजारा ने किसानों को उन्नत बीज चयन, बीजोपचार, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, सूक्ष्म पोषक तत्वों के उपयोग, खरपतवार नियंत्रण, समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन, जल संरक्षण आधारित खेती तथा वैज्ञानिक फसल प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी। विषय वस्तु विशेषज्ञ (सस्य विज्ञान) डॉ. बी.एस. परिहार ने बताया कि आईपीयू-13-1 भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर द्वारा विकसित उच्च उत्पादक एवं 70-75 दिनों में पकने वाली उन्नत उड़द किस्म है। इसकी संभावित उपज 10 से 12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है तथा इसमें लगभग 26 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है। यह किस्म पीला मोजेक, सर्कोस्पोरा पत्ती धब्बा, उड़द लीफ क्रिंकल वायरस, स्टेम नेक्रोसिस, वेब ब्लाइट, बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट, एन्थ्रेक्नोज एवं पाउडरी मिल्ड्यू जैसे प्रमुख रोगों के प्रति प्रतिरोधी है।
कार्यक्रम में प्रभारी समूह प्रदर्शन इंजी. टी.एस. सोनवानी ने किसानों को बीज उपचार, सीड ड्रिल के माध्यम से बुआई, बीज एवं उर्वरकों की अनुशंसित मात्रा तथा वैज्ञानिक खेती की तकनीकी जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ते हुए जिले में उड़द उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि करना तथा दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रभावी कदम उठाना है।

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