एक ठेकेदार पर नगर पंचायत इस कदर है मेहरबान!
-अर्जुन झा-
जगदलपुर। बस्तर संभाग के बीजापुर जिले की भोपालपट्टनम नगर पंचायत में निर्माण कार्यों के ठेके के पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक खास ठेकेदार पर नगर पंचायत प्रशासन इस कदर मेहरबान है कि उस ठेकेदार को थोक में 11 कार्यों का ठेका दे दिया गया है। यह विवादास्पद मामला अब एसडीएम न्यायालय तक पहुंच गया है। एसडीएम ने नगर पंचायत अधिकारी को दस्तावेजों के साथ पेश होने का आदेश जारी किया है।
नगर पंचायत भोपालपट्टनम में विकास कार्यों के लिए जारी किए गए टेंडरों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। पहले जारी किए गए टेंडर को निरस्त करने के बाद दोबारा री-टेंडर जारी किया गया, लेकिन नई प्रक्रिया भी विवादों में घिर गई है। अब मामला एसडीएम न्यायालय तक पहुंच चुका है, जहां संबंधित दस्तावेजों के साथ नगर पंचायत के अधिकारी को पेश होने के लिए नोटिस जारी किया गया है।जानकारी के अनुसार, नगर पंचायत ने 16 अप्रैल 2026 को पहली बार टेंडर जारी किया था। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, कुछ पार्षदों और नागरिकों ने इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए कलेक्टर को शिकायत पत्र सौंपा था। शिकायत के बाद प्रथम टेंडर प्रक्रिया निरस्त कर दी गई और 2 जून 2026 को 22 विकास कार्यों के लिए पुनः री-टेंडर जारी किया गया। री-टेंडर प्रक्रिया में कुल 9 ठेकेदारों ने भाग लिया और 79 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से विभाग ने 37 आवेदनों को पात्र घोषित किया, जबकि 42 आवेदनों को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि संबंधित लिफाफों पर कार्य का नाम अंकित नहीं था, इसलिए उन्हें खोला नहीं गया। इस निर्णय के बाद भी विवाद थमता नजर नहीं आया। सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि पात्र घोषित आवेदनों में से एक ही ठेकेदार को 21 प्रतिशत बिलो दर पर 11 विकास कार्य आवंटित कर दिए गए हैं। अन्य ठेकेदारों ने इस पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि जब कुल नौ ठेकेदार प्रक्रिया में शामिल थे, तब एक ही व्यक्ति को इतनी बड़ी संख्या में कार्य आवंटित करना निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। साथ ही यह भी सवाल उठाया गया है कि 21 प्रतिशत कम दर पर कार्यों की गुणवत्ता और समय पर पूर्णता कैसे सुनिश्चित होगी?इन्हीं बिंदुओं को लेकर संबंधित ठेकेदारों ने एसडीएम कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए एसडीएम ने नगर पंचायत भोपालपट्टनम को नोटिस जारी कर सभी संबंधित अभिलेखों सहित उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। वर्तमान में मामले की सुनवाई एसडीएम न्यायालय में विचाराधीन है।
नपं की पारदर्शिता पर गर्द
लगातार टेंडरों का निरस्त होना, फिर री-टेंडर की प्रक्रिया अपनाना और उसके बाद भी विवाद सामने आना नगर पंचायत की निविदा प्रणाली पर कई सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पूरी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के अनुरूप होती, तो बार-बार विवाद और शिकायतों की नौबत नहीं आती। उनका मानना है कि प्रशासन को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि पहली निविदा क्यों निरस्त हुई, बड़ी संख्या में आवेदन किन नियमों के तहत अस्वीकार किए गए और एक ही ठेकेदार को 11 कार्य आवंटित करने का आधार क्या था। अब सभी की निगाहें एसडीएम न्यायालय की कार्यवाही पर टिकी हैं। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार पक्षों पर कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं यदि पूरी प्रक्रिया नियमानुसार पाई जाती है तो इससे नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों का भी जवाब मिल सकेगा।
