‘न खाऊंगा, न खाने दूंगा’ के फार्मूले पर चले राजस्व सभापति विशाल मोटवानी
-अर्जुन झा-
दल्ली राजहरा। नगरीय प्रशासन विभाग में आम तौर पर सुनने में आता है कि राजस्व से संबंधित मामलों में बिना लेनदेन के कोई काम नहीं होता। वहीं अब दल्ली राजहरा नगर पालिका परिषद में पहली बार लेनदेन के रुपए वापस कराए गए हैं। पूरे प्रदेश के किसी भी विभाग में एक पार्षद द्वारा एक कर्मचारी और सीएमओ से मिलीभगत कर किए लेन देन को रोकने बढ़िया प्रयास किया गया है।भाजपा नेताओं को भी इससे सीख लेकर सुशासन सरकार की इस परंपरा को बरकरार रखने की जरूरत है।

दल्ली राजहरा नगर पालिका के एक कथित बुद्धिमान कर्मचारी द्वारा इस वर्ष अब तक 300 से ज्यादा लोगों से राजस्व संबंधित प्रकरण निपटाने के एवज में लेनदेन किए जाने की खबर है वह भी सीएमओ के प्रश्रय से, लेकिन अब सुशासन सरकार के निर्वाचित जनप्रतिनिधि विशाल मोटवानी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “न खाऊंगा न खाने दूंगा” के सिद्धांत और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन पर चलते हुए जनहित में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का शानदार प्रयास किया है। श्री मोटवानी की इस नीति पर आगे पालिका परिषद किस प्रकार अमल करती है यह देखने वाली बात है।लोग पूछ रहे हैं कि क्या बाकी और लोगों से ली गई रकम भी उक्त बुद्धिमान कर्मचारी और सीएमओ से वापस दिलाई जाएगी, या किसी दबाव में मामले को ठंडे बस्ते में डाला दिया जाएगा? दरअसल मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन पर धब्बा और नगर पालिका की साख को चूना लगाने वाले तथाकथित बुद्धिमान कर्मचारी की हेकड़ी नगर पालिका के राजस्व प्रभारी विशाल मोटवानी के कड़े तेवर के आगे निकल गई। यह कर्मचारी अब लोगों को उनसे ली गई रिश्वत की रकम लौटाने लगा है।लगातार मिल ही शिकायत से परेशान पार्षद और राजस्व विभाग के प्रभारी विशाल मोटवानी ने इसे गंभीरता से लिया,और लोगों से अपील की कि जिन लोगों ने भी जमीन मामले में इस बुद्धिमान कर्मचारी को रकम दी है, वे नगर पालिका के राजस्व विभाग में लिखित शिकायत मेरे माध्यम से कर अपनी रकम वापस ले सकते हैं। राजस्व प्रभारी के इस फरमान से कुछ लोगों ने अपनी व्यथा खुल कर रखी।
उल्टा चोर कोतवाल को डांटे
इस दौरान जब राजस्व विभाग के कथित बुद्धिमान कर्मचारी से इस मामले से पूछताछ की गई तो वे अपने ही विभाग के चुने हुए जनप्रतिनिधि से दुर्व्यवहार करते हुए धमकी देने लगे कि मेरे कार्यों में जरा भी हस्तक्षेप नहीं करें। कर्मचारी के चोरी और सीना जोरी वाले व्यवहार से हतप्रभ जनप्रतिनिधि विशाल मोटवानी ने नगर पालिका द्वारा के सीएमओ और पालिका अध्यक्ष को इस मामले की जानकारी दी।राजस्व प्रभारी और अन्य जनप्रतिनिधियों के बढ़ते दवाब से बचने उक्त बुद्धिमान कर्मचारी ने एक पीड़ित को उसकी रकम सबके सामने वापस कर दी, लेकिन अभी कई पीड़ित उक्त कर्मचारी को दी गई रकम को वापस कराने की मांग राजस्व प्रभारी विशाल मोटवानी के माध्यम से कर रहे हैं। राजस्व विभाग प्रभारी श्री मोटवानी ने कहा है कि सरकार अपने जीरो टॉलरेंस के वादे को पूरा और ऐसे भ्रष्ट कर्मचारी अधिकारी पर लगाम लगाने प्रभावी कार्रवाई करेगी।
सरकारी जमीन की हेराफेरी
उल्लेखनीय है कि नगर पालिका का यह बुद्धिमान कर्मचारी जमीन माफिया की तरह काम करता आ रहा है। सरकारी और नजूल जमीन पर कब्जे करवा कर कब्जे करने वालों से रकम ऐंठना इस कर्मचारी की फितरत बन गई है। ऐसे ही दो बड़े मामलों की शिकायत उच्च स्तर पर भी हो चुकी है। इन मामलों में राजस्व न्यायालय ने स्टे ऑर्डर जारी किया था। न्यायालय के आदेश को भी ठेंगा दिखाने की जुर्रत इस कर्मचारी ने कर डाली है। कर्मचारी की इस हरकत को देखते हुए नगर पालिका के राजस्व प्रभारी विशाल मोटवानी ने अब कड़े तेवर अपना लिए हैं। उनका कहना है कि ऐसा खेल अब वे हरगिज नहीं चलने देंगे।
