नक्सलमुक्त बस्तर के जंगलों में भी दिखने लगा है सुशासन, सुनाई देने लगी हैं दहाड़ें



-अर्जुन झा-
जगदलपुर। सुशासन सरकार में वन मंत्री केदार कश्यप की शानदार पहल के चलते अब नक्सल मुक्त बस्तर जंगलों में वन्यप्राणियों के बीच भी सुशासन का असर दिखाई देने लगा है। यहां जंगली जानवरों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। शेर, बाघ, तेंदुओं और भालुओं की आमद अब जंगल से होकर नदी किनारे बसे ग्रामीण क्षेत्रों में हो रही है। वन अधिकारियों को वन्य प्राणियों के साथ ही ग्रामीणों की भी सुरक्षा के ठोस उपाय करने होंगे।
बस्तर जिले के बकावंड के जंगलों में वन्यजीवों की आहट से दहशत का माहौल है।उलनार-पाईकपाल में बड़े जानवर के ताजा पदचिह्न मिले हैं। खराहा डोंगरी के पास धान के खेत की मेड़ पर वन्यजीव दिखने की चर्चा भी है।वन विभाग की टीम जांच में जुट गई है।वन विभाग के बकावंड रेंज अंतर्गत ग्राम पंचायत उलनार और पाईकपाल के जंगलों में इन दिनों वन्यजीव की मौजूदगी को लेकर ग्रामीणों के बीच चिंता का माहौल है। ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, बशनिवार सुबह कुछ ग्रामीणों और राहगीरों ने एक बड़े वन्यजीव को देखने की बात कही है। रविवार सुबह खराहा डोंगरी के समीप धान के खेत की मेड़ पर ग्रामीणों को बड़े आकार के पदचिह्न दिखाई देने की जानकारी भी सामने आई है। ग्रामीण उसे शेर के पंजों का निशान बता रहे हैं।हालांकि वन्यजीव की वास्तविक पहचान की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों से वन्यजीव दिखाई देने की सूचना मिलने के बाद बकावंड वन विभाग रेंज की टीम मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। वन विभाग द्वारा पदचिह्नों तथा घटनास्थल से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है। फिलहाल संबंधित वन्यजीव की मौजूदगी और उसकी प्रजाति को लेकर कोई ठोस आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में जांच पूरी होने और विभागीय पुष्टि होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। उलनार, पाईकपाल, जूनावनी, टिवंसगुड़ा और आसपास का क्षेत्र घने जंगलों और वनक्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। जंगल से लगे खेतों और ग्रामीण रास्तों पर लोगों की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में किसी बड़े वन्यजीव की मौजूदगी की सूचना से ग्रामीणों में स्वाभाविक रूप से चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग क्षेत्र में निगरानी बढ़ाए, पदचिह्नों की वैज्ञानिक तरीके से जांच करे और लोगों को वन्यजीवों से सुरक्षित रहने के संबंध में आवश्यक जानकारी दे।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर सवाल
उलनार स्थित प्रसिद्ध भद्रकाली माता मंदिर क्षेत्र के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। नवरात्रि के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं। मंदिर तक आने-जाने वाले मार्गों के आसपास जंगल होने के कारण मौजूदा सूचना ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर भी सतर्कता की आवश्यकता बढ़ा दी है।ऐसे में वन विभाग को मंदिर तक आने-जाने वाले रास्तों और आसपास के वनक्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने, जरूरत के अनुसार गश्त की व्यवस्था करने तथा ग्राम पंचायत और मंदिर समिति के साथ समन्वय बनाने की आवश्यकता है। यदि वन्यजीव की मौजूदगी की पुष्टि होती है, तो विभाग को परिस्थितियों के अनुरूप सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए। वन्यजीव की पहचान स्पष्ट होने तक ग्रामीणों को अफवाहों से बचने और बिना पुष्टि के किसी संदेश या तस्वीर को साझा नहीं करने की जरूरत है। लोगों को अकेले जंगल की ओर जाने, वन्यजीव के करीब पहुंचने या पदचिह्नों का पीछा करने से बचना चाहिए। किसी वन्यजीव के दिखाई देने पर सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए तत्काल वन विभाग को सूचना देना उचित होगा। खराहा डोंगरी के पास मिले पदचिह्न मिलने और वन्यजीव देखे जाने की सूचना की पुष्टि होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि क्षेत्र में किस वन्यजीव की मौजूदगी है। फिलहाल ग्रामीणों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वन विभाग की सतर्क निगरानी और समय पर आधिकारिक जानकारी जारी करना महत्वपूर्ण है।

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