कवर्धा में ‘अब दो नहीं चार’ अभियान से स्वच्छता का संदेश

कवर्धा,,,नगर पालिका परिषद कवर्धा द्वारा सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत नगर के विभिन्न वार्डों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के तहत चार श्रेणियों में कचरा पृथक्करण को लेकर जनजागरूकता अभियान चलाया गया। ‘अब दो नहीं चार’ के संदेश के साथ नागरिकों को घरों एवं प्रतिष्ठानों से निकलने वाले कचरे को चार अलग-अलग रंगों के डस्टबिन में रखने के लिए प्रेरित किया गया। अभियान का उद्देश्य कचरे के उचित संग्रहण, प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण और सुरक्षित निपटान को बढ़ावा देना है।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026, चार श्रेणियों में कचरा पृथक्करण पर जोर
सेवा संकल्प अभियान के दौरान कवर्धा शहर के विभिन्न वार्ड में जाकर नागरिकों को जानकारी दी गई कि पहले दो डिब्बा गीला एवं सूखा कचरा के अतिरिक्त अब सैनिटरी अपशिष्ट और विशेष देखभाल वाले अपशिष्ट को भी अलग-अलग रखना महत्वपूर्ण है। स्वच्छ भारत मिशन नियम 2026 के नियम 4 के अंतर्गत चार श्रेणियों में कचरा पृथक्कीकरण की व्यवस्था को विस्तार से बताया गया। इसके तहत प्रत्येक घर में चार रंगों के डस्टबिन के उपयोग और कचरे को उसके प्रकार के अनुसार अलग रखने के लिए जागरूक किया जा रहा है।

चार रंगों के डस्टबिन से समझाया कचरे की पहचान
हरा डस्टबीन
नगर पालिका के स्वच्छ भारत मिशन समन्वयक होमेश मानिकपुरी एवं स्वच्छता दीदीयों द्वारा नागरिकों को चार रंगों के डस्टबिन और उनमें डाले जाने वाले कचरे की जानकारी दी गई। हरा डस्टबिन गीला कचरा जैसे रसोई का कचरा, सब्जी एवं फल के छिलके, बचा हुआ भोजन, फूल-पत्ते और चायपत्ती के लिए उपयोग किया जाना है। इस कचरे का उपयोग कम्पोस्टिंग एवं बायो-मेथनेशन के लिए किया जा सकता है।
नीला डस्टबिन सूखा कचरा कागज, गत्ता, प्लास्टिक, बोतलें, कांच, धातु, रबर तथा कपड़े जैसी सूखी सामग्री के लिए उपयोग किया जाना है। । इसका पृथक्कीकरण कर सामाग्री अलग करने वाले मशीन तक पहुंचाने में सुविधा होती है।
लाल डस्टबिन, सैनिटरी अपशिष्ट उपयोग किए गए सैनिटरी नैपकिन, डायपर, पट्टी एवं बैंडेज जैसे अपशिष्ट के लिए उपयोग किया जाना है। इन्हें अन्य कचरे से अलग रखते हुए सुरक्षित तरीके से संग्रहित एवं निस्तारित करना आवश्यक है।
बैंगनी डस्टबिन विशेष देखभाल वाला अपशिष्ट दवाइयां, इंजेक्शन, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक सामान, बल्ब, पेंट के डिब्बे तथा कीटनाशक या रसायनों के डिब्बे जैसे अपशिष्ट के लिए उपयोग किया जाना है। इन्हें सामान्य कचरे में मिलाने के बजाय निर्धारित सुरक्षित संग्रहण एवं निपटान व्यवस्था के अनुसार देना चाहिए।

मिश्रित कचरा देने से बचें, पर्यावरण संरक्षण में निभाएं भागीदारी
सेवा संकल्प अभियान के दौरान लोगों को बताया गया कि अलग-अलग प्रकार के कचरे को आपस में मिलाने से पुर्नचक्रण की प्रक्रिया प्रभावित होती है और पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ जाती है। कचरे का स्रोत पर ही पृथक्कीकरण करने से गीले कचरे से खाद बनाने, सूखे कचरे का पुर्नचक्रण करने तथा सैनिटरी एवं विशेष देखभाल वाले अपशिष्ट का सुरक्षित निपटान करने में मदद मिलती है। प्राप्त जानकारी अनुसार ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के बीच कचरा पृथक्करण, डिजिटल अनुपालन, बल्क वेस्ट जनरेटर के उपयोग तथा पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति जैसे विषयों में बदलाव किया गया है। इसके अंतर्गत मिश्रित कचरा देने पर नियमों की अवहेलना पर कार्यवाही भी प्रस्तावित की जा सकती है।

जनभागीदारी से बनेगा स्वच्छ एवं सुंदर कवर्धा
मुख्य नगर पालिका अधिकारी नारायण साहू ने आम नागरिकों से अपील है कि वे अपने घरों, दुकानों एवं प्रतिष्ठानों से निकलने वाले कचरे को चारों श्रेणियों में अलग-अलग करके ही दें। स्वच्छता केवल सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। नागरिकों की सक्रिय सहभागिता से ही कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन सुनिश्चित करने, पर्यावरण को सुरक्षित रखने और कवर्धा शहर की स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने में सहायता मिलेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *