तुएगोंदी के ग्रामीणों ने सामुदायिक वन अधिकार प्रमाण पत्र को किया नामंजूर



दल्ली राजहरा। ग्राम
तुएगोंदी के ग्रामीणों का आरोप की शासन उनके दावे के विपरित महज एक कंपार्टमेंट पर अधिकार प्रदान कर रही है।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की घोपणा के अनुसार जिला प्रशासन के अधिकारी, आदिवासी समाज के प्रमुखों व पूर्व सांसद, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष की उपस्थिति में बालोद जिले के डौंडीलोहारा ब्लाक के तुएगोंदी गांव में वहां के ग्रामीणों की वर्षों से बहुप्रतीक्षित मांग सामुदायिक वन अधिकार प्रमाण पत्र प्रदान करने गांव के शासकीय प्राथमिक शाला में बड़ी बैठक का आयोजन किया गया।
आरंभ में उपस्थित प्रशासनिक अधिकारियों, समाज प्रमुखों व पूर्व जनप्रतिनिधियों द्वारा ग्रामीणों को शासन द्वारा प्रदान किए जा रहे सामुदायिक वन अधिकार प्रमाण पत्र को दिखाया गया। प्रमाण पत्र को पढ़ते ही ग्रामीणों ने इसे अपने दावे के अनुरूप नहीं होने का आरोप लगाते हुए स्वीकार करने से इंकार कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है की उन्होंने राज्य शासन के समक्ष अपने ग्राम की पारंपरिक सीमा रेखा के भीतर आने वाले संपूर्ण वन भूमि पर अपना दावा प्रस्तुत किया था और इसके लिए सामुदायिक वन अधिकार कानून के प्रावधानों व कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा किया है। साथ ही साथ उन्होंने कहा की पूर्व में राज्य सरकार भी हमारे द्वारा प्रस्तुत दावे पर अपनी सहमति जताते आ रही थी किन्तु आज जो सामुदायिक वन अधिकार प्रमाण पत्र प्रदान किया जा रहा है, उसमें सामुदायिक वन अधिकार कानून के तहत प्रस्तुत हमारे दावे के विपरीत महज एक कंपार्टमेंट पर सामुदायिक वन अधिकार प्रदान किया जा रहा है जो की हमें किसी भी हाल में स्वीकार नहीं है। जिला प्रशासन के साथ प्रमाण पत्र प्रदान करने आए पूर्व सांसद मोहन मंडावी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष एवं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता व राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के उपाध्यक्ष व उपस्थित प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों को सामुदायिक वन अधिकार प्रमाण पत्र स्वीकार करने अंत तक समझाने का भरसक प्रयास करते रहे, मगर ग्रामीणों ने किसी की एक नहीं सुनी। सामुदायिक वन अधिकार प्रमाण पत्र के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे तुएगोंदी के ग्रामीण स्वयं को फिर से उसी जगह पाते हैं जहां से उन्होंने अपने दावे के लिए संघर्ष आरंभ किया था। शासन-प्रशासन को भी आज लगा था कि लंबे समय से चला आ रहा विवाद व संघर्ष की स्थिति पर आज पूर्ण विराम लग जाएगा, लेकिन ग्रामीणों द्वारा प्रमाण पत्र लेने से इंकार कर देने से प्रशासनिक अधिकारी भी मायूस नजर आए। खोया भूमकाल क्रांति सेना के जिला संरक्षक व सीएफआर विशेषज्ञ खोरबाहरा मंडावी ने कहा की तुएगोंदी के ग्रामीणों के साथ बैठ कर इस पर विस्तार से चर्चा व मंथन करेंगे और संवैधानिक उपाय तलाशेंगे, उसी के अनुरूप संवैधानिक रास्ता अख्तियार करेंगे। कार्यक्रम में विशेष रुप से कांकेर लोकसभा क्षेत्र के पूर्व सांसद मोहन मंडावी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष व प्रदेश प्रवक्ता भारतीय जनता पार्टी देवलाल ठाकुर, राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के उपाध्यक्ष एमडी ठाकुर, सहायक संचालक आदिम जाति कल्याण विभाग विजय सिंह कंवर, अपर कलेक्टर अनिता भूआर्य, एसडीएम लोकेश कुमार, तहसीलदार एचआर नायक, रेंजर प्रवेश कुमार सोनी उपस्थित थे। इस दौरान बड़ी संख्या में तुएगोंदी गांव के पुरुष व महिलाएं, खोया भूमकाल क्रांति सेना के जिला संरक्षक व पांचवीं अनुसूची, पेसा कानून, सामुदायिक वन अधिकार कानून के विशेषज्ञ खोरबाहरा मंडावी, विधायक प्रतिनिधि दल्ली राजहरा रतिराम कोसमा, ब्लाक कांग्रेस कमेटी उपाध्यक्ष व सर्किल कोसरिया राउत यादव) समाज दल्ली राजहरा के अध्यक्ष कृष्णा यादव, जन मुक्ति मोर्चा अध्यक्ष जीत गुहा नियोगी आदि भी विशेष रुप से ग्रामीणों के समर्थन में उपस्थित थे।ग्रामीणों को सामुदायिक वन अधिकार प्रमाण पत्र प्रदान करने के लिए शासन द्वारा आज आयोजित कार्यक्रम को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न करने व कानून व्यवस्था की स्थिति शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए प्रशासन भी पूर्ण रुप से सतर्क था। कानून व्यवस्था सम्हालने बालोद के अतिरिक्त पुलिस अधिक्षक चंद्रकांत गवर्ना भी पुलिस बल के साथ आयोजन के अंत तक उपस्थित रहे।

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