एके-47 थामने वाले हाथों ने थामी डांडिया की छड़ियां



-अर्जुन झा-
जगदलपुर। जिन हाथों में एके-47 जैसे घातक हथियार गरजते दिखते हैं, उन कोमल हाथों में डांडिया की छड़ियां खनकती नजर आईं। न कोई छोटा, न कोई बड़ा, सब बराबर नजर आ रहे थे। पूरा वातावरण आत्मीयता से भरा नजर आ रहा है। आईएएस, आईपीएस अधिकारी भी मातहत कर्मियों के साथ गरबा डांडिया खेलते नजर आए। महिला कमांडो दुर्गा वाहिनी की सदस्याओं की थिरकन दिल जीतने वाली थी।
बेहद नक्सल प्रभावित एवं संवेदनशील क्षेत्र रहे सुकमा में कानून-व्यवस्था व आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर सदैव मुस्तैद रहने वाली पुलिस टीम के मनोबल और पारिवारिक सौहार्द को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 17 अक्टूबर को पुलिस लाइन सुकमा में पहली बार भव्य गरबा-डांडिया महोत्सव का सफल आयोजन किया गया। पुलिस अधीक्षक सुकमा मयंक गुर्जर (आईपीएस) की विशेष पहल पर आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कठिन व चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में दिन-रात कर्तव्य पर डटे रहने वाले जवानों, विशेषकर महिला कमांडोज और उनके परिवारों को मानसिक सुकून, सकारात्मक ऊर्जा और आपसी मेलजोल का साझा मंच प्रदान करना रहा। घने जंगलों और दुर्गम इलाकों में एके-47 थामकर नक्सल मोर्चों पर अदम्य साहस का परिचय देने वाली सुकमा पुलिस की विशेष इकाई ‘दुर्गा फाइटर्स’ की महिला कमांडोज ने आयोजन के दौरान डांडिया की छड़ियों के साथ कदम से कदम मिलाए। अदम्य साहस और अनुशासन के साथ-साथ जांबाज महिला जवानों का पारंपरिक नृत्य एवं संस्कृति के प्रति यह उत्साह पूरे कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा।



शहीद परिवारों की सहभागिता
आयोजन में पुलिस परिवारों के साथ-साथ जिले के वीर शहीद जवानों के परिवारों की माताओं, बहनों व बच्चों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। शहीद परिवारों की सहभागिता ने आयोजन को आत्मीय और भावुक स्वरूप दिया। इस दौरान विभिन्न आयु वर्ग की महिलाओं और बच्चों ने पारंपरिक गरबा वेशभूषा में मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन भी किया गया। महोत्सव के दौरान सुकमा कलेक्टर अमित कुमार (आईएएस), सीआरपीएफ के डीआईजी आनंद सिंह तथा पुलिस अधीक्षक मयंक गुर्जर (आईपीएस) सपरिवार उपस्थित रहे। वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने परिजनों के साथ गरबा-डांडिया के उत्साह में हिस्सा लेकर प्रतिभागियों की प्रतिभा और ऊर्जा की भूरि-भूरि प्रशंसा की। अधिकारियों व उनके परिवारों की आत्मीय मौजूदगी ने जवानों और उनके परिजनों में नए उल्लास का संचार किया।
पुलिस अधीक्षक मयंक गुर्जर ने इस अवसर पर कहा कि पुलिस बल की ड्यूटी स्वभावतः बहुत ज्यादा तनावपूर्ण और जोखिम भरी होती है। ऐसे सांस्कृतिक आयोजन जवानों के जीवन में नई ऊर्जा और संतुलन लाते हैं। यह आयोजन इस बात का सशक्त प्रमाण है कि वर्दी के कड़े अनुशासन के भीतर भी भारतीय संस्कृति, उमंग और मानवीय संवेदनाएं पूरी तरह जीवंत हैं।

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