बस्तर दशहरा रथ परिक्रमा के दौरान युवक की मौत और एक घायल
जगदलपुर। बस्तर दशहरा की रथ परिक्रमा के दौरान हुए हादसे में एक युवक की मौत और एक अन्य व्यक्ति के गंभीर रूप से घायल होने की खबर अत्यंत दुखद एवं चिंताजनक है। इस घटना ने रथ परिक्रमा में सुरक्षा व्यवस्था, जिम्मेदारी और प्रशासनिक निगरानी को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सर्व अनुसूचित जाति समाज के जिला अध्यक्ष विक्रम लहरे ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए शासन, प्रशासन, बस्तर दशहरा समिति एवं सुरक्षा समिति से सवाल किया है कि आखिर इस हादसे की जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या किसी परिवार के बेटे की जान चले जाने के बाद केवल शोक व्यक्त करना ही पर्याप्त है? एक युवक की जान चली गई। परिवार ने अपना सदस्य खो दिया। क्या कोई मुआवजा उस मां-बाप को उनका बेटा वापस लौटा सकता है? क्या किसी आर्थिक सहायता से उस परिवार के दुख की भरपाई संभव है? इसी तरह गंभीर रूप से घायल व्यक्ति और उसके परिवार की जिम्मेदारी कौन उठाएगा? विक्रम लहरे ने
सवाल उठाया है कि हादसे की जिम्मेदारी किसकी है? रथ परिक्रमा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी दशहरा समिति, सुरक्षा समिति, शासन या प्रशासन में से किसकी थी? इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था में चूक हुई या नहीं? हादसे से पहले सुरक्षा के क्या इंतजाम किए गए थे? भीड़ नियंत्रण, बैरिकेडिंग, पुलिस बल की तैनाती एवं आपातकालीन व्यवस्था की जांच सार्वजनिक की जाए। विक्रम लहरे ने यह भी जानना चाहा है कि मृतक के परिवार को कितना मुआवजा मिलेगा? शासन तत्काल पीड़ित परिवार को उचित आर्थिक सहायता प्रदान करे तथा नियमानुसार मिलने वाले मुआवजे की जानकारी सार्वजनिक करे। घायल व्यक्ति के इलाज की जिम्मेदारी कौन लेगा? घायल व्यक्ति को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। उसके इलाज और आगे की सहायता के संबंध में शासन-प्रशासन स्पष्ट जवाब दे। भविष्य में ऐसी घटना रोकने की क्या व्यवस्था होगी? बस्तर दशहरा जैसे ऐतिहासिक एवं जनआस्था से जुड़े आयोजन में श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
दोषियों पर हो कार्रवाई
विक्रम लहरे ने मांग की है कि इस हादसे की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच में किसी अधिकारी, आयोजन समिति या अन्य जिम्मेदार व्यक्ति की लापरवाही सामने आती है, तो नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही मृतक के परिवार को उचित मुआवजा और घायल व्यक्ति को समुचित उपचार एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा है कि बस्तर की संस्कृति, परंपरा और आस्था का सम्मान तभी सार्थक है, जब यहां आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु की सुरक्षा सुनिश्चित हो। आखिर कब तक हादसों के बाद जांच और मुआवजे की बातें होती रहेंगी? अब समय है कि जिम्मेदारी तय हो, जवाबदेही सुनिश्चित हो और पीड़ित परिवारों को न्याय मिले।
