जप्पेमरका गांव के दो निरीह ग्रामीणों को सरेआम फांसी पर लटका दिया नक्सलियों ने

अर्जुन झा-
जगदलपुर। नक्सली जिसे चाहते हैं, दोषी ठहरा देते हैं और सजा भी तुरंत दे देते हैं। सामने वाले को अपने बचाव में पैरवी का मौका भी नहीं दिया जाता। ऐसे ही तालिबानी अंदाज में दो निरीह ग्रामीणों को नक्सलियों ने सरेआम फांसी पर लटका दिया। नक्सलियों ने इन ग्रामीणों को पुलिस की मुखबिरी करने का आरोप लगाते हुए ऎसी क्रूर सजा दी है।
मामला बस्तर संभाग के बीजापुर जिले के सुदूर एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्र की ग्राम पंचायत मरदापाल के आश्रित गांव जप्पेमरका का है। जप्पेमरका के जंगल में मंगलवार और बुधवार को दो दिनों तक नक्सलियों की भैरमगढ़ एरिया कमेटी ने जन अदालत लगाकर दो ग्रामीणों को मौत की सजा सुनाई और उन्हें फांसी पर लटका दिया। दोनों ग्रामीण जप्पेमरका के रहने वाले थे। उन पर नक्सलियों ने पुलिस मुखबिरी का आरोप लगाया है।जानकारी के अनुसार इसी गांव के 13 वर्षीय छात्र पोडियम हिड़मा जो मिरतुर छात्रावास में रहकर 7 वीं कक्षा में पढ़ता है, उसे पालक के माध्यम से छात्रावास से गांव बुलाया गया। छात्र को गांव से जन अदालत वाली जगह पर ले गए। जन अदालत में नक्सालियों ने छात्र से घंटों बंधक बनाए रखा और उससे लंबी पूछताछ करने के बाद उसे छोड़ने का फरमान जारी हुआ। सूत्रों ने बताया कि जप्पेमरका में जिन दो ग्रामीणों को नक्सलियों ने फांसी पर लटकाया उनके नाम मांडवी सुजा व पोडियामी कोसा बताए जा रहे हैं। इन दोनों ग्रामीणों के शव के पास नक्सली पर्चे भी पड़े मिले हैं। दोनों ग्रामीण गांव में खेती किसानी का काम करते थे। जप्पेमरका के दो ग्रामीणों की मौत के बारे में पुलिस को कोई सूचना परिजनों द्वारा नहीं दी गई है। मिरतुर छात्रावास के अधीक्षक ने बताया कि बुधवार को छात्र का पालक गांव में दुख होने की बात कहकर छात्र साथ ले गए थे।छात्र अभी तक वापस नहीं लौटा है। मेरे द्वारा पालक से जानकारी ली जा रही है। जप्पेमरका में हुई घटना के संबंध भैरमगढ़ के एसडीओपी तारेश साहू ने बताया कि ऐसी सूचना मिली है, पुख्ता जानकारी जुटाई जा रही है। मिरतुर और बेचापाल से फोर्स रवाना कराई गई है। विस्तृत जानकारी मिलने पर दी जायेगी।

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