बिखरने लगा है बस्तर दशहरे का उल्लास; बेल न्यौता रस्म पूरी, कमलचंद भंजदेव और सांसद महेश कश्यप रहे मौजूद

अर्जुन झा-
जगदलपुर। बस्तर संभाग और जगदलपुर शहर में बस्तर दशहरा का रोमांच बिखरने लगा है। बड़ी संख्या में विदेशी मेहमानों के साथ ही देश के अनेक राज्यों से सैलानियों की आमद जगदलपुर में हो चुकी है। होटलों के सारे कमरे लगभग बुक हो चुके हैं।

बस्तर दशहरा की महत्वपूर्ण पर्व रस्म बेल पूजा की अदायगी आज गुरुवार को की गई। इस रस्म में बेलवृक्ष और उसमें एक साथ लगने वाले दो फलों की पूजा का विधान है। ऐसे इकलौते बेलवृक्ष को बस्तर के लोग अनोखा और दुर्लभ मानते हैं। शहर से लगे ग्राम सरगीपाल में वर्षों पुराना एक बेल वृक्ष है, जिसमें सिंगल के अलावा जुड़वां फल भी एक साथ लगते हैं। आज बस्तर राजपरिवार के सदस्य कमलचंद भंजदेव, बस्तर के सांसद व दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप, कुमार जयदेव, नवीन ठाकुर सहित मांझी , चालकी एवं जिला प्रशासन के अधिकारियों दशहरा समिति के सदस्यों तथा ग्रामीणों की मौजूदगी बेल न्योता रस्म पूरी की गई।

अनोखा है बेल वृक्ष
बस्तर दशहरा के दौरान अनोखे बेल की पूजा की जाती है। इस अनोखे बेलवृक्ष और जुड़वां बेल फल की पूजा- अर्चना परंपरा अनुसार की गई। इसी के साथ गुरुवार की दोपहर बेल न्योता विधान संपन्न हुआ। यहां के ग्रामीणों की मानें तो सरगीपाल के इस वृक्ष के आगे-पीछे दो और बेलवृक्ष हैं, लेकिन इन दोनों पेड़ों में केवल एक ही फल लगता है। आमतौर पर बस्तर दशहरा पर्व के प्रमुख विधानों की जानकारी ही आम लोगों तक पहुंचती रही है। बेल पूजा विधान की वास्तविकता के बारे में पता लगाने पर एक रोचक कहानी सामने आई। इस दौरान गांव में उत्सव जैसा माहौल रहता है। बेल पूजा विधान रस्म के दौरान सरगीपाल में काफी उत्साह का माहौल बना रहता है। मानो किसी शादी का समारोह सम्पन्न किया जा रहा हो।लोग नाचते गाते हैं, बैंड बाजा की धुन में सभी वर्ग के लोग थिरकते हैं। छोटे बच्चे से लेकर सभी वर्ग के लोग इस दौरान शामिल रहते हैं। अपने घरों से निकलकर पूजा स्थल पहुंचते हैं।

फ्रांस के लुक हुए दीवाने
बस्तर दशहरे का रोमांच विदेशों तक में है। विदेशी भी बस्तर दशहरे का आनंद लेने बड़ी तादाद में पहुंचते हैं।विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरे को देखने के लिए फ्रांस से पहुंचे पर्यटक लुक ने कहा कि बस्तर में आकर उन्हें काफी अच्छा लगता है। वे इससे पहले भी बस्तर आ चुके हैं। वो बस्तर दशहरा की सभी रस्मों को देख रहे हैं। साथ ही अपने कैमरे में भी तस्वीरों को कैद कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि फ्रांस में भी कई त्योहार मनाए जाते हैं, लेकिन बस्तर दशहरा पर्व की तरह कुछ मनाया नहीं जाता। यही कारण है कि इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए बस्तर आए हैं।

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