वन विभाग की जमीन पर चर्च और कब्रिस्तान बनाने का खेल
-अर्जुन झा-
जगदलपुर। बस्तर संभाग में आदिवासी समुदाय और दीगर पिछड़ी जातियों के लोगों के बड़े पैमाने पर धर्मांतरण के साथ ही लैंड जिहाद की तर्ज पर वन विभाग और शासन की जमीन पर अवैध कब्जा कर चर्चों एवं कब्रिस्तानों का व्यापक स्तर पर निर्माण कराया जाने लगा है। सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस के कुछ नेता राज्य के वन मंत्री एवं बस्तर के आदिवासी नेता केदार कश्यप को बदनाम करने के लिए अप्रत्यक्ष तौर पर इस अवैध कृत्य को प्रोत्साहन दे रहे हैं।
बस्तर संभाग भले ही माओवाद के कुचक्र से बाहर निकल आया है, मगर संभाग को आदिवासी संस्कृति पर लंबे समय से हावी मतांतरण के मायाजाल से मुक्ति नहीं मिल पाई है। पूरे संभाग में लाखों आदिवासियों को उनकी अपनी मूल संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक आस्था से विलग कर दूसरी राह पर धकेल दिया गया है। मातांतरण के इस खेल ने बस्तर के गांव गांव में आदिवासी समुदाय को खेमों में बांट दिया है। खासकर मातांतरित व्यक्ति के अंतिम संस्कार के दौरान गांवों में संघर्ष के हालात बनते रहते हैं। ताजा मामला नारायणपुर विधानसभा क्षेत्र के भानपुरी थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले करंदोला गांव से सामने आया है, जहां मतांतरित हो चुकी सेवनिवृत शिक्षिका रुक्मणि कुर्रे के शव को दफनाने को लेकर विवाद की स्थिति निर्मित हो गई थी। सूत्र बताते हैं कि इस गांव में वन भूमि पर कब्जा कर कब्रिस्तान बनाते हुए शव दफनाने की प्रक्रिया को एक सुनियोजित षडयंत्र के तहत अंजाम दिया जा रहा था। बताते हैं कि वन विभाग की तार फेंसिंग और बाड़ को उखाड़ कर करीब पांच डिसमिल वन भूमि पर कब्रिस्तान बनाने की योजना थी। ग्रामीणों और हिंदूवादी संगठनों के विरोध के चलते यह साजिश विफल हो गई।
वन भूमि पर पचासों चर्च और कब्रिस्तान
बता दें कि खासकर बस्तर जिले की भानपुरी तहसील, बकावंड विकासखंड और बस्तर ब्लॉक का बड़ा भाग छत्तीसगढ़ के वन मंत्री एवं नारायणपुर के विधायक केदार कश्यप के निर्वाचन क्षेत्र में आता है। युवा आदिवासी नेता केदार कश्यप की लोकप्रियता पूरे बस्तर संभाग में काफी बढ़ चुकी है और भारतीय जनता पार्टी का जनाधार भी लगातार बढ़ रहा है। कांग्रेस के कुछ ऐसे नेता जो किसी न किसी कारण वन मंत्री केदार कश्यप की लोकप्रियता से परेशान हैं, वे मतांतरित लोगों को वन भूमि पर कब्रिस्तान और चर्च बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और हिंदू जागरण मंच से जुड़े कार्यकर्ता और अपनी जड़ों से जुड़े आदिवासी जन समय समय पर ऐसे षडयंत्र को विफल करते रहते हैं।मिली जानकारी के अनुसार इन क्षेत्र में वन भूमि पर सैकड़ों चर्च खड़े कर दिए गए हैं और बड़ी तादाद में कब्रिस्तान बना लिए गए हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि वन विभाग का आमला ऐसे लोगों पर कठोर कार्रवाई करने से बच रहा है, जबकि यही अमला वन भूमि पर खेती करने वाले आदिवासियों को बेदखल करने तुरंत दौड़ पड़ता है।
