शांत और स्थिर चित्त रहकर जनहित के लिए संघर्ष करने की कला दिखी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज में

अर्जुन झा-
जगदलपुर। शांत और स्थिर चित्त रहकर भी संघर्ष करने की कला आज के सियासतदानों को सीखनी चाहिए। दीपक बैज ने प्रदेश में कांग्रेस में जनता के हक के लिए संघर्ष की जो संस्कृति विकसित की है, उस पर अमल कांग्रेस अगर वह पूरे प्रदेश में जिला स्तर करे, तो उसे उसका खोया हुआ जनाधार आसानी से वापस मिल सकता है। दीपक बैज की “संघर्ष संस्कृति” का यह नया पैटर्न हमें कल यानि गुरुवार को जगदलपुर में देखने को मिला। हालांकि इस दौरान कुछ अति उत्साही युवाओं की उग्र भीड़ जरा बेकाबू हो गई और बेरिकेट्स तोड़कर ये युवा कलेक्ट्रेट की ओर दौड़ पड़े थे, मगर दीपक बैज ने उन्हें भी खामोशी के साथ हैंडल कर लिया।
दरअसल इंद्रावती नदी के समय से पहले सूख जाने तथा किसानों के सामने आए संकट को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षदीपक बैज के नेतृत्व में 28 अप्रैल से बस्तर जिले के चित्रकोट से इंद्रावती बचाओ किसान आदिवासी संघर्ष यात्रा निकाली गई थी। दर्जन भर से अधिक गांवों से गुजरने के बाद तीसरेदिन यह यात्रा 30 अप्रैल को जगदलपुर पहुंची। यात्रा में हर दिन सैकड़ों नए लोग स्व स्फूर्त जुड़ते चले गए और जगदलपुर आते तक यात्रा हजारों की भीड़ में तब्दील हो चुकी थी। महिला, बच्चे, युवा, किसान, आदिवासी हर वर्ग के लोग इस ऐतिहासिक आंदोलन के सहचर बने। जगदलपुर के पीजी कॉलेज ग्राउंड से कारवां कलेक्ट्रेट की ओर कूच करने लगी। कलेक्ट्रेट के पहले पुलिस ने बेरिकेटिंग कर रखी थी। यहां तक सब कुछ शांति से चलता रहा, मगर कुछ अति उत्साही युवक बेरिकेट्स को लांघ कर कलेक्ट्रेट की ओर दौड़ पड़े, वहीं कुछ महिलाएं महिला पुलिस कर्मियों से उलझ पड़ी। धक्का मुक्की भी हुई। दीपक बैज ने तुरंत मोर्चा सम्हालते हुए महिलाओं और युवकों को शांत करते हुए अपने मिशन को जारी रखा।

एक रहेंगे, तो सेफ रहेंगे कांग्रेसी
कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने की प्रक्रिया पूरी हुई। इस बीच कार्यकर्ताओं और नागरिकों को संबोधित करते हुए दीपक बैज ने कहा कि यह हमारे बस्तर और जीवनदायिनी इंद्रावती नदी को बचाने के संघर्ष की शुरुआत मात्र है, जरूरत पड़ी तो आगे हम पूरे शांतिप्रिय ढंग से और भी बड़ा आंदोलन करेंगे। इस बेहद सफल आंदोलन से साबित होता है कि कैसे छोटे छोटे मुद्दे को भी लोकपयोगी बनाकर संघर्ष किया जा सकता है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इस शांतिप्रिय आंदोलन के जरिए सरकार को सोचने पर मजबूर कर दिया है। आम लोगों की जो भीड़ जुटी उसने सरकार के माथे पर बल पैदा कर दिए हैं। साथ ही खेमों में बंटे कांग्रेस नेताओं के लिए भी एक बड़ा सबक यह आंदोलन दे गया है कि एक रहोगे तो सेफ रहोगे, बटेंगे, तो कटेंगे। कांग्रेस के कर्णधारों को चाहिए कि अब वे मिल जुलकर पूरे राज्य में ब्लॉक और जिला स्तर पर संघर्ष का दीपक बैज वाला पैटर्न अपनाएं।

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