बस्तर की गुफाओं में स्थित शैलचित्रों का वैज्ञानिक कर रहे हैं अध्ययन



जगदलपुर। राज्य गठन के बाद पहली बार बस्तर की गुफाओं में बने शैल चित्रों का वैज्ञानिक वर्गीकरण कर उनका अध्ययन किया जा रहा है।जगदलपुर स्थित मानव विज्ञान सर्वेक्षण विभाग यह कार्य कर रहा है।
विभाग के उप केंद्र जगदलपुर के कार्यालय प्रमुख डॉ. पीयूष रंजन साहू ने बताया कि इस कार्य की शुरुआत कांकेर जिले से हो चुकी है। मानव विज्ञान सर्वेक्षण की टीम हजारों साल पुराने इन धूमिल पड़ चुके शैल चित्रों का अध्ययन करने अत्याधुनिक कैमरों के सहारा ले रही है। इन कैमरों से उतरी फोटो को एक ऐप के जरिए थ्री डी इमेज़ में परिवर्तित किया जाएगा। इसके लिए कंप्यूटर ग्राफिक बनाकर वास्तविक शैल चित्र और उस पर जमी परतों को अलग कर देखने और समझने आसानो होगी।

शोध की शुरुआत फील्ड वर्क
भारतीय मानव सर्वेक्षण केंद्र ने इन दिनों “बस्तर के विशेष संदर्भ के साथ भारत की रॉक आर्ट हेरिटेज” शीर्षक से एक शोध परियोजना शुरू की है। छत्तीसगढ़ के बस्तर उप मंडल के विभिन्न जिलों में यह फील्डवर्क किया जा रहा है। इस परियोजना में, शोधकर्ता बस्तर में विभिन्न स्थलों पर पाए जाने वाले रॉक आर्ट के माध्यम से प्राचीन मानव साक्ष्य की खोज और पहचान कर रहे हैं। शुरुआत में फील्डवर्क दो चरणों में आयोजित किया जाएगा। फ़िलहाल पहला चरण चल रहा है। अध्ययन विशेष रूप से बस्तर में रॉक आर्ट साइटों की पहचान और व्यवस्थित प्रलेखन पर ज़ोर देता है। इसमें रॉक आर्ट के रूपांकनों, तकनीकों और शैलीगत विशेषताओं का विश्लेषण करने के लिए आदिवासी समुदायों के साथ नृवंशविज्ञान जुड़ाव के माध्यम से रॉक आर्ट और रॉक आर्ट साइटों के सामाजिक-सांस्कृतिक और पारिस्थितिक संदर्भों को समझा जाना है।

विरासत को संरक्षित करने पहल
डॉ. पीयूष रंजन साहू ने बताया कि यह शोध अभियान बस्तर की विरासत के संरक्षण और स्थानीय सामुदायिक जुड़ाव के लिए रणनीतियां तय करने चलाया जा रहा है। इससे इतिहास और संस्कृति के नए अध्याय खुलेंगे।

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