शिक्षकों की पेंशन पर निर्णय की सुरक्षा के लिए छग टीचर्स एसोसिएशन ने दायर किया कैविएट
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने शिक्षकों से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी मामले में अपने पक्ष को मजबूती से रखने और किसी भी एकपक्षीय निर्णय को रोकने के लिए उच्चतम न्यायालय में 5 मई को अपने अधिवक्ता के माध्यम से कैविएट दाखिल किया है। यह कैविएट संघ के कोंडागांव जिलाध्यक्ष ऋषिदेव सिंह के माध्यम से एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड आशुतोष घड़े द्वारा दायर किया गया है।
मामला छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर द्वारा विभिन्न अवसरों पर दिए गए निर्णयों से संबंधित है। चूंकि राज्य सरकार या अन्य पक्ष इन फैसलों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर कर सकते हैं, इसलिए एसोसिएशन ने पहले ही सुप्रीम कोर्ट में अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी है।कैविएट दायर होने के बाद, अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले में शिक्षकों का पक्ष सुने बिना कोई भी स्थगन आदेश या विपरीत फैसला नहीं दे सकेगा। यदि राज्य सरकार या कोई अन्य पक्ष सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाता है, तो न्यायालय के लिए एसोसिएशन (कैविएटर) को नोटिस जारी करना और सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य होगा। छग टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा व जिला अध्यक्ष कोंडागांव ऋषिदेव सिंह ने बताया कि शिक्षकों के न्यायसंगत अधिकारों और उच्च न्यायालय से मिली जीत को बरकरार रखने के लिए यह कानूनी कदम उठाना अत्यंत आवश्यक था। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा, प्रदेश संयोजक सुधीर प्रधान, वाजिद खान, प्रदेश उपाध्यक्ष देवनाथ साहू, बसंत चतुर्वेदी, प्रवीण श्रीवास्तव, शैलेंद्र यदु, कोमल वैष्णव, मुकेश मुदलियार, प्रदेश सचिव मनोज सनाढ्य, प्रदेश कोषाध्यक्ष शैलेंद्र परिक एवं कोंडागांव जिलाध्यक्ष ऋषिदेव सिंह ने कहा है कि हम शिक्षकों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होने देंगे। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने हमारे पक्ष में जो निर्णय दिए हैं, उन्हें उच्चतम न्यायालय में भी सुरक्षित रखने के लिए हम पूरी तरह तैयार हैं। यह कैविएट सुनिश्चित करती है कि हमारी बात सुने बिना कोई भी आदेश पारित नहीं होगा। एसोसिएशन ने प्रदेश के सभी शिक्षक संवर्ग को आश्वस्त किया है कि संगठन उनकी सेवा शर्तों और कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क से लेकर सर्वोच्च अदालत तक तत्परता से खड़ा है।

पूर्व सेवा से पेंशन लेने जारी रखेंगे प्रयास
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रांतीय वर्चुअल बैठक में निर्णय लिया गया था कि उच्च न्यायालय बिलासपुर द्वारा पेंशन के संबंध में दिए गए फैसले को सुरक्षित रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट में केविएट याचिका दायर की गई है।एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि केविएट दायर करने के लिए किसी भी सामान्य शिक्षक से कोई आर्थिक चंदा या सहयोग नहीं लिया गया है। वर्चुअल बैठक में पदाधिकारियों एवं मूल याचिकाकर्ताओं ने सुझाव दिया कि छग के सभी जिलों में बैठक आयोजित करके शिक्षकों को किसी के भी बहकावे में न आने के लिए जागरूक किया जाएगा तथा क्यू आर कोड वालों से सावधान रहने की अपील की जाएगी। टीचर्स एसोसिएशन ने पेंशन के सम्बंध में उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिका दायर करने वाले सभी शिक्षकों की सराहना करते हुए पेंशन की मांग के लिए एकजुट रहने की अपील की है।टीचर्स एसोसिएशन ने कहा है कि कैविएट लगाने का व्यय टीचर्स एसोसिएशन द्वारा स्वयं वहन किया गया है। कैविएट के लिए किसी भी शिक्षक से कोई शुल्क नही लिया गया है। राशि कलेक्शन का प्रयास करने वालों से सतर्क रहना जरूरी है। साथ ही सांगठनिक स्तर से भी संविलियन पूर्व प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा की गणना कर पूर्ण पेंशन के लिए सरकार से विभिन्न माध्यम से चर्चा कर प्रयास किया जाएगा। रमेश चंद्रवंशी, ऋषिदेव सिंह, शत्रुहन साहू, जयंत यादव, दिलीप साहू, प्रवीण श्रीवास्तव, सुधीर कुमार दुबे, वाजिद खान, देवनाथ साहू, मेघनाथ साहू, आशीष राम, सोनसिंह कश्यप, राजेश यादव, गोपी वर्मा, हेमेंद्र साहसी, रामसिंह मरापी, करण सिंह बघेल, शिव सिंह चंदेल, डॉ कृष्ण मूर्ति शर्मा, रामलाल डडसेना, दुर्गा गुप्ता, मुकेश कोरी, विक्रम सिंह, गिरधर राम साहू, किशन लाल देशमुख,मनोहर लाल गौतम, मदन साटकर सहित सैकड़ों याचिकाकर्ताओं की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए विभिन्न मौकों पर दिए गए हाईकोर्ट के फैसले की मुख्य बातें इस प्रकार हैं उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि संविलियन पूर्व की गई सेवा को अप्रासंगिक मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सेवा की निरंतरता, कार्य की प्रकृति, वेतन के स्रोत और प्रशासनिक नियंत्रण के साथ-साथ संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 16 के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है। उच्च न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया है कि पेंशन कोई खैरात नहीं, बल्कि एक कल्याणकारी योजना है जिस पर कर्मचारियों का अधिकार है।
