कॉलेज कैंपस बना कोर्ट, कॉलेजियंस बने जज, वकील और गवाह
जगदलपुर। शासकीय काकतीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय जगदलपुर कोर्ट कैंपस में तब्दील हो गया, स्टूडेंट्स बने जज, वकील और गवाह। यहां असली अदालत जैसा नजारा था। दरअसल कॉलेज के विधि विभाग द्वारा अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए मूट कोर्ट का आयोजन किया गया था। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य विधि के छात्रों को व्यवहारिक ज्ञान प्रदान करना और उन्हें वास्तविक अदालती कार्यवाही से परिचित कराना था।
कार्यक्रम कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनिल श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। मूट कोर्ट के दौरान छात्रों ने वकील, न्यायाधीश और गवाह की भूमिकाएं निभाते हुए काल्पनिक मामलों पर बहस की। इस वर्ष के अंतिम मूट कोर्ट में गाली-गलौज से जुड़े एक प्रकरण को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इसमें सरकारी पक्ष की ओर से गोविंद कश्यप एवं सुखलाल मरकाम ने अभियोजन पक्ष का प्रतिनिधित्व किया, जबकि बचाव पक्ष की ओर से सोमारु कश्यप ने पैरवी की। दोनों पक्षों के विद्यार्थियों ने अपने-अपने तर्क, साक्ष्य और घटनाक्रम को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। मामले की सुनवाई भारतीय दंड संहिता की धारा 254, 507 एवं 506 के तहत की गई। सुनवाई के दौरान न्यायालयीन प्रक्रिया का पूरा अनुकरण किया गया, जिससे छात्रों को वास्तविक कोर्ट की कार्यप्रणाली का अनुभव प्राप्त हुआ। न्यायाधीश की भूमिका में विद्यार्थी पूनम ठाकुर एवं गोविंद सेन रहे, जिन्होंने दोनों पक्षों के तर्कों और साक्ष्यों का गहन विश्लेषण करते हुए निर्णय सुनाया। कार्यक्रम के दौरान विधि सहायक प्राध्यापक नरेंद्र कुमार साहू ने छात्रों को न्यायालयीन प्रक्रिया की बारीकियों से अवगत कराया। उन्होंने विशेष रूप से यह बताया कि कोर्ट में चार्ज किस प्रकार से सेट और प्रस्तुत किए जाते हैं तथा उनकी कानूनी प्रक्रिया क्या होती है। साथ ही उन्होंने वकीलों के अनुशासन, पेशेवर आचरण और उनके कर्तव्यों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला, जिससे छात्रों को विधिक पेशे की जिम्मेदारियों की बेहतर समझ मिल सके। वहीं विधि विभागाध्यक्ष डॉ. मोहन सोलंकी ने मूट कोर्ट के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन छात्रों को किताबों से परे वास्तविक अनुभव प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि मूट कोर्ट छात्रों के आत्मविश्वास, तार्किक क्षमता और प्रस्तुतीकरण कौशल को विकसित करने का एक प्रभावी माध्यम है। डॉ. हीरा लाल गौतम ने न्यायालय की अवमानना से संबंधित प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए इसके कानूनी पहलुओं की जानकारी दी। वहीं डॉ. स्वीटी ठाकुर ने साक्ष्य के मूल्यांकन पर मार्गदर्शन देते हुए बताया कि न्यायिक निर्णय में साक्ष्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है और सही विश्लेषण से ही न्याय सुनिश्चित होता है। इस आयोजन में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे और उन्होंने पूरे कार्यक्रम को गंभीरता से देखा व सीखा। मूट कोर्ट के माध्यम से छात्रों ने न केवल अपने सैद्धांतिक ज्ञान को व्यवहार में उतारा, बल्कि न्यायालयीन प्रक्रिया की व्यावहारिक समझ भी विकसित की। यह आयोजन विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
