प्रधानमंत्री मोदी की अपील का असर; बैलगाड़ी में निकली बारात, न डीजे, न धमाल, फिर भी कमाल
–अर्जुन झा-
जगदलपुर। न कारों और बसों का काफिला, न ही डीजे, बैंड एवं धमाल बाजा का शोर शोराबा, फिर भी दिखा एक बरात में गजब का कमाल। बस्तर के दूल्हे राजा कुबेर देहारी ने जीत लिया सबका दिल। आदिवासी वैसे भी प्रकृति के उपासक होते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का भी असर रहा कि कुबेर ने अपनी बरात बैलगाड़ी से निकाली।संस्कृति और परंपरा का पुराना वैभव पुनः आलोकित हो उठा। देखने वाले देखते ही रह गए। गजब की सादगी, प्रकृति के सामिप्य का अनूठा अनुभव। यह अतुल्य दृश्य देखने को मिला बस्तर संभाग के नारायणपुर जिले में।
आधुनिक युग में जहां शादियों में महंगी कारों, डीजे और हेलीकॉप्टर का चलन बढ़ता जा रहा है, वहीं नारायणपुर जिले के डूमरतराई गांव निवासी देहारी परिवार ने बैलगाड़ी में बरात निकालकर भारतीय ग्रामीण संस्कृति और पुरानी परंपराओं को जीवंत करने का अनूठा संदेश दिया।दूल्हे राजा कुबेर देहारी एवं उनके परिवार द्वारा निकाली गई यह पारंपरिक बरात समूचे अंचल के लिए दर्शनीय और चर्चा का विषय बन गई। सजी-धजी बैलगाड़ी, पारंपरिक वेशभूषा और ग्रामीण माहौल ने लोगों को पुरानी संस्कृति की याद दिला दी। देहारी परिवार के लोगों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य खर्चीली शादियों को कम करने, परंपराओं को जीवित रखने तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “पर्यावरण संरक्षण एवं ईंधन बचत” के आह्वान से प्रेरित होकर यह अनूठी पहल की गई।
सब कुछ ईको फ्रेंडली
बरात में न डीजे था, न बैंड और न धमाल बाजा। तेज ध्वनि की बजाय पारंपरिक वाद्ययंत्रों का उपयोग किया गया। वहीं टेंट के स्थान पर छिंद पत्तों से मंडप तैयार किया गया था। स्वागत द्वार को पेड़-पौधों की पत्तियों और फूलों से सजाया गया था। ग्रामीण परिवेश में आयोजित यह विवाह समारोह लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। स्थानीय लोगों ने इसे भारतीय संस्कृति, सादगी और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रेरणादायक पहल बताया।
