“बाबा” तो दिल्ली के लायक हैं, युवा सम्हाल लेंगे छत्तीसगढ़ को



-अर्जुन झा-
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ कांग्रेस नेता टीएस सिंहदेव बाबा के सियासी बोल ने फिर छग कांग्रेस की राजनीति में भूचाल ला दिया है। इस पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सधे अंदाज में कहा है कि बाबा
तो बड़े अनुभवी और सम्माननीय नेता हैं। समय समय पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें बड़ी बड़ी जिम्मेदारियां दी हैं, जिन्हे बाबा ने पूरी गंभीरता के साथ और सफलता पूर्वक निभाया है। वे पूर्णतः परिपक्व नेता हैं, उन्हें अब दिल्ली की जिम्मेदारी सम्हालनी चाहिए।
दरअसल वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव बाबा अक्सर अपने बयानों से कांग्रेस को ही नुकसान पहुंचाने का काम करते आए हैं। जब राज्य में कांग्रेस की सरकार थी, तब बाबा जी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की नाक में दम किए हुए थे। उनकी कुर्सी की भूख इस कदर बढ़ गई थी कि वे अपनी ही सरकार और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ लगातार बयानबाजी करते रहे।उनके हालिया बयान के आधार पर पीसीसी चीफ दीपक बैज ने उन्हें मार्गदर्शक बन कर दिल्ली की राजनीति करने की सलाह क्या दी कि बाबा के तेवर और सख्त हो गए। उन्होंने अपनी तुलना दीपक बैज से कर डाली कि हम भी हारे वो भी हारे फिर फर्क कैसा? दरअसल दकियानूसी सोच के कुछ कांग्रेस नेता जब जब सत्ता करीब आती दिखती है तब तब वे उसे बयानों और जुमलों के दम पर खुद को आगे करने का प्रयास शुरू कर देते हैं। वे भूल जाते है कि जनता उसे ही पसंद करती है जो लगातार उससे संपर्क में रहती है। सत्तर साल से भी ज्यादा उम्र के कांग्रेस नेता बाबा सत्ता के दिनों में रणछोड़ दास की उपाधि से नवाजे गए थे। अब उन्हें अचानक प्रदेश और पार्टी की चिंता सताने लगी है। ये वहीं बाबा हैं, जिन्होंने पूरे पांच साल तक ढाई आखर प्रेम की भाषा कभी नहीं बोली और पूरे पांच साल तक बीजेपी की बिसात पर ढाई ढाई घर चल कर भूपेश सरकार को परेशान करते रहे। इससे पूरे प्रदेश में यह संदेश गया कि इनसे तो अपना परिवार ही नहीं संभलता है तो ये प्रदेश क्या संभालेंगे? सत्ता से बाहर होते ही कांग्रेस को नए कलेवर में पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज द्वारा अपने युवा साथियों के साथ संवारा गया, लगातार पदयात्राएं करके दीपक बैज ने बीजेपी और उसकी सरकार की खामियों को जनता के सामने लाया। आदिवासी समाज को कांग्रेस के पक्ष में एकजुट करने और धर्म की राजनीति करने वालों के खिलाफ संघर्ष किया, लेकिन ये बुजुर्ग मासूम बन कर अपने शौक कभी इंग्लैंड तो कभी ऑस्ट्रेलिया में पूरे करते रहे। भारी बारिश, गर्मी में जब कार्यकर्ता सड़क पर आंदोलन करते रहे तो बाबा साहब अपना व्यापार सम्हालते रहे। छत्तीसगढ़ विधानसभा के चुनाव को महज ढाई साल बचे हैं और पूरे प्रदेश में कांग्रेस के पक्ष में शीतल बयार बहने लगी है तब बाबा को देश, प्रदेश, कांग्रेस और कार्यकर्ताओं की चिंता सताने लगी है। यह चिंता उनके अकेले की नहीं है, बल्कि उन तमाम सत्ता लोभियों की है जिनके बाबा हमेशा लंबरदार बनकर काम करते आए हैं।आज शायद उन्हीं नेताओं के इशारे पर वे पुनः सक्रिय होकर सुचारू रूप से संघर्ष कर अपने युवा कार्यकर्ताओं व नेताओं के मार्गदर्शक बन कर संगठन को लगातार मजबूत बनाने का काम कर रहे पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज को एक हारे हुए नेता बता रहे हैं। मासूमियत की चादर ओढ़े बाबा जी कब तक राजमहल की राजनीति करेंगे, सत्ता पाने और जनसेवा हेतु जनयात्रा करके जनता का सुख दुख जानना ही होता है। तभी जनता उन्हें अपना सरताज बनाती है। रायपुर में जब कुछ पत्रकारों ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज से बाबा की टिप्पणी पर सवाल किया तो उनका निहायत ही सधा हुआ और बाबा के प्रति सम्मानजनक जवाब आया। श्री बैज ने कहा- बाबा हम सबके आदरणीय हैं, अनुभवी नेता हैं, पार्टी नेतृत्व ने उन्हें तमिलनाडु और पांडुचेरी का ऑब्जर्वर नियुक्त किया था। दोनों राज्यों में उन्होंने अच्छा काम किया। उन्हें अब दिल्ली की राजनीति करनी चाहिए।

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