अब अपनी वंश वृद्धि कर सकेंगे आत्मसमर्पित नक्सली युवा
-अर्जुन झा-
जगदलपुर। बस्तर संभाग में आत्मसमर्पण करने के बाद पुनर्वासित जीवन जी रहे युवा नक्सली अब अपनी वंशवृद्धि कर सकेंगे। माओवाद का रास्ता अपनाने से पहले इन युवाओं ने नसबंदी करा ली थी। इन युवाओं के नसबंदी के टांके अब फिर से खोले जाएंगे।
समाज की मुख्यधारा में शामिल हो चुके बस्तर के पुनर्वासित युवाओं के सामाजिक पुनर्स्थापन और बेहतर भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए महारानी अस्पताल जगदलपुर में जिला प्रशासन और पुलिस विभाग के सहयोग से शनिवार को विशेष ऑपरेशन शिविर आयोजित किया गया। इस शिविर में यूरोलॉजिकल सोसायटी वेस्टर्न ज़ोन तथा एम्स रायपुर के यूरोलॉजिस्ट दल द्वारा विशेष चेरिटेबल कैंप के तहत ईच्छुक पुनर्वासित युवाओं का नसबंदी खोलने (रिकैनालाइजेशन) संबंधी स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार की प्रक्रिया शुरू की गई। रिकैनालाइजेशन शिविर में 28 युवा पुनर्वासितों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा उनकी विस्तृत जांच के बाद नसबंदी खोलने के ऑपरेशन की प्रक्रिया संपादित की जाएगी। इस पहल से लाभान्वित होने वाले युवा पुनर्वासित अपने पारिवारिक और सामाजिक जीवन में पूर्ण सहभागिता सुनिश्चित कर सकेंगे तथा समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक जीवन व्यतीत करने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे। इस अवसर पर इन पुनर्वासित युवाओं का उत्साहवर्धन करने के लिए कमिश्नर बस्तर संभाग डोमन सिंह, आईजी बस्तर रेंज सुंदरराज पी., कलेक्टर आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। वहीं अधिकारियों ने उक्त युवाओं से संवाद कर उन्हें सकारात्मक जीवन की ओर अग्रसर रहने तथा शासन की पुनर्वास योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। इस मौके पर अधिकारियों ने वेस्टर्न जोन यूरोलाजिकल सोसाइटी तथा एम्स रायपुर के विशेषज्ञों को स्मृति चिह्न प्रदान कर उन्हें बस्तर में पुनः सेवायें देने उत्साहित किया। उक्त आपरेशन शिविर के सफल आयोजन में स्वास्थ्य विभाग, जिला अस्पताल के चिकित्सकों एवं अन्य चिकित्सा कर्मचारियों ने विशेष सक्रियता और संवेदनशीलता के साथ सहभागिता निभाई। इस मौके पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ संजय बसाक, सिविल सर्जन डॉ संजय प्रसाद सहित अन्य विशेषज्ञ चिकित्सक व पैरामेडिकल स्टाफ़ उपस्थित थे।
क्यों पड़ी ऎसी जरूरत?
दरअसल नक्सलवाद से जुड़ने से पहले बड़े नक्सली लीडर्स द्वारा घर परिवार और पत्नी संसर्ग से दूर रहने निर्देशित किया जाता रहा है। चूंकि नक्सली संगठन में महिला सदस्याओं की भी खासी तादाद रहती रही है, इसलिए अनैतिक संबंध से कोई महिला नक्सली गर्भवती न हो जाए, इसलिए युवा नक्सलियों की नसबंदी करा दी जाती थी। चूंकि ये युवा अब समाज की मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं, इसलिए उन्हें भी पत्नी और बच्चों के बीच रहकर जीवन गुजारने के वास्ते उनकी नसबंदी अब खुलवाई जा रही है। इससे एक फायदा यह भी होगा कि आगे चलकर बेटे बेटियों के मोह में ये युवा फिर से अपने पुराने रास्ते पर लौट नहीं पाएंगे, संतान मोह उनके कदम रोक लेगा। यहां यह भी बता दें कि बाहरी बड़े नक्सली खुद तो व्यभिचार में फंसे रहे हैं। वे बस्तर की महिला नक्सलियों का दैहिक शोषण करते रहे हैं। पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा बरामद किए गए नक्सली डंप में कई बार काम वर्धक और गर्भपात की दवाएं मिल चुकी हैं।
