लैंगिक उत्पीड़न मामले मे आयोग ने दिये जांच का निर्देश
रायपुर/10 जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक, सदस्यगण सरला कोसरिया, ओजस्वी मंडावी व दीपिका शोरी ने आज छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के कार्यालय रायपुर में महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों पर 36 प्रकरणों की सुनवाई की गई। आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में प्रदेश स्तर पर आज 413 वी. एवं रायपुर जिले में 200 वी. जनसुनवाई की गई।
आज की सुनवाई के दौरान एक प्रकरण में आवेदिका ने अनावेदक के खिलाफ अभद्र व्यवहार कर अश्लील हरकते व झूठे मामले मे फंसाने की धमकी दिये जाने से संबंधित शिकायत की थी। आवेदिका की शिकायत पर अब तक कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीडन कानून 2023 के तहत आईसीसी कमेटी की बैठक नही की गई है। और अनावेदक को अनावश्यक लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसी दशा मे आयोग के द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी मोहला मानपुर चैकी को निर्देशित किया गया कि 1 माह के अंदर आवेदिका के द्वारा दिये गये आवेदन पर कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न मामले मे आईसीसी कमेटी से जांच कराकर 02 माह के भीतर आयोग मे अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को निर्देशित किया गया।
एक अन्य प्रकरण मे आवेदिका ने बताया की उसका विवाह 10 वर्ष पूर्व हुआ था। वह अन्य समाज से है आवेदिका सतनामी समाज से व उसका पति भी गाडा समाज से है। आवेदिका ने बताया कि सास की मृत्यु पर अनावेदकगण मृत्यु कार्यक्रम मे नही आये क्योकि उन्होने आवेदिका को समाज से बहिष्कृत किया था। उभय पक्षों को समझाईश दिये जाने पर उन्होने कहा कि ना तो आवेदिका को समाज से बहिष्कृत किया है और ना ही भविष्य में करेंगे। आयोग ने कहा की अगर भविष्य मे अनावेदकगण आवेदिका को समाज से बहिष्कृत करते है तो आवेदिका उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा सकेगी इस अनुशंसा के साथ प्रकरण नस्तीबध्द किया गया।

एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि उसने अनावेदक के खिलाफ मानसिक प्रताड़ना से संबंधित शिकायत दर्ज करवायी थी। अनावेदक द्वारा छोटी-छोटी बातो पर वाद-विवाद, बेटी पैदा की हो कहकर प्रताड़ित किये जाने की शिकायत की थी। उभय पक्षों की विस्तृत काउंसलिंग की गयी। आयोग की समझाईश पर अनावेदक आवेदिका को प्रतिमाह 07 हजार रू. निजी खर्च हेतु तथा घर खर्च हेतु प्रति माह 25 हजार रू. देने तैयार हुआ। इस प्रकरण की नियमित निगरानी 06 माह तक की जायेगी। आयोग ने कहा कि यदि पक्षकार आयोग के आदेश की अवहेलना करते है। तो वह न्यायालय जाने के लिए स्वतंत्र है। इस निर्देश के साथ प्रकरण नस्तीबध्द किया गया।
एक प्रकरण में उभय पक्षों के मध्य पूर्व में अलगाव था। डेढ़ वर्ष तक आवेदिका अलग रायपुर मे रहकर घरेलू काम कर अपना व बच्ची का पालन-पोषण कर रही है। 01 माह पूर्व उभय पक्षों के बीच समझौता हो चुका है दोनो के बीच छोटी-छोटी घरेलू समस्याएं है। आयोग ने अनावेदक को समझाई दिया कि आवेदिका को प्रतिमाह 02 हजार रू. खर्च के लिए देगा व उसके साथ दुव्र्यवहार नहीं करेगा जिस पर अनावेदक ने अपनी सहमति जताई। यदि भविष्य में अनावेदक आवेदिका से मारपीट या दुव्र्यवहार करता है तो आवेदिका थाने में जाकर अनावेदक के विरूध्द प्रताड़ना की रिपोर्ट दर्ज करा सकेगी। इस अनुशंसा के साथ प्रकरण नस्तीबध्द किया गया।
