कौन निगल गया बस्तर के गरीबों का पौष्टिक आहार?



अर्जुन झा-
जगदलपुर। बाजार में शक्कर के दाम दुगुना होते ही बस्तर जिले के लगभग 350 से अधिक पीडीएस दुकानों में गुड़ और चना गायब हो चुका है। नान से मिली जानकारी के अनुसार विगत 3 माह से गुड़ एवं चना की सप्लाई बंद कर दी गई है। कुछ दुकानों को छोड़ दें तो अधिकांश राशन दुकानों में जुन-जुलाई, अगस्त माह से गुड़ एवं चना, शक्कर का वितरण नहीं किया गया है। वहीं जिले में कई ऐसे पीडीएस दुकानें हैं जहां चावल की बोरियों में 2 से 3 किलो कम सप्लाई की जा रही है। इस शॉर्टेज की भरपाई को पूरा करने दुकान संचालक हितग्राहियों के हिस्से के चावल में डंडीमारी कर रहे हैं। उन्हें 500 ग्राम से एक किलो कम चावल देकर शॉर्टेज की भरपाई किए जाने की खबर है। विभाग के अधिकारी इस अनियमिता से अनजान बने बैठे हैं और जिले के जिम्मेदार अफसर जांच का हवाला देकर चुप्पी साधे हुए हैं।
जानकारी के अनुसार बस्तर जिले के 7 विकासखंडों की 350 से अधिक पीडीएस दुकानों में विगत तीन माह से पौष्टिक आहार के रूप में मिलने वाले गुड़ और चना का वितरण नहीं किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि बस्तर जिले को कुपोषण से कैसे मुक्ति मिलेगी? कुई दुकानों में अंत्योदय कार्ड धारकों को शक्कर भी नसीब नहीं हो पा रही है। विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बस्तर जिला ही नहीं पूरे संभाग भर में चना और गुड़ की सप्लाई 3 माह से नहीं होने के कारण कार्ड धारकों को वितरण नहीं किए जाने की खबर है। जानकारी के अनुसार कुछ दुकानों में पुराना स्टॉक होने पर वितरण किा गया है, लेकिन अधिकांश दुकानों में स्टॉक खत्म होने के कारण तीन माह से वितरण नहीं किया गया है। नान से मिली जानकारी के अनुसार 3 माह से आंबटन प्राप्त नहीं होने के कारण दुकानों में वितरण नहीं किया जा रहा है। जबकि जिले के प्रत्येक माह 4 हजार क्विंटल गुड़ एवं इतनी ही मात्रा में चना का वितरण किया जाता है। सरकार द्वारा पौष्टिक आहार के रूप में इन दोनों खाद्य सामाग्री का वितरण किया जाता है। चना से प्रोटीन और गुड़ आयरन की कमी को दूर करने में मदद करता है। इससे बच्चों एवं महिलाओं और गरीब परिवारों में कुपोषण और रक्ताल्पता (एनीमिया) से लड़ने में मदद मिलती है।

,नहीं दी जा रही शक्कर भी
खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत गरीब एवं जरूरतमंदों को बहुत कम दर पर अनाज उपलब्ध कराया जाता है। अंत्योदय योजना के तहत दो प्रकार के कार्ड बनाए गए हैं। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत जिन कार्ड धारकों को शक्कर का वितरण किया जाता है ऐसे कार्डधारियों को शक्कर राशन दुकानों में नहीं दी जा रही है। पीडीएस दुकानों में 50 फीसदी अंत्योदय कार्डधारकों koशवकर कई माह से नहीं दी जा रही है। राज्य खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत जिनका कार्ड बना है शासकीय उचित मूल्य की दुकान से उन्हें शक्कर दी जा रही है। जबकि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत शक्कर का वितरण नहीं किया जा रहा है। राशन दुकानों में पहुंचने वाली चावल भरी बोरियों में 500 ग्राम से लेकर एक किलो तक चावल पहुंच रहा है। चावल की इस शॉर्टेज की भरपाई दुकान संचालक हितग्राहियों को 500 ग्राम से एक किलो कम चावल देकर कर रहे हैं। ऐसा नजारा बस्तर विकासखंड के रेटावंड सहित अन्य कई दुकानों में देखा गया तो वहीं बकावंड ब्लॉक के उलनार सहित कई दुकानों में भी ऐसा ही कृत्य किया जा रहा है। वहीं उपस्थित हितग्राहियों ने शक्कर एवं चना नहीं मिलने की बात कही। खाद्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी घनश्याम राठौर भी चना, गुड़, शक्कर वितरण ममाले में कुछ भी बोलने से बच्च रहे हैं, तो वहीं जिले के जिम्मेदार अफसर गरीबों के खाद्यान्न वितरण को लेकर बेखबर हैं।

गरीबों का हक मार रहे भाजपाई
पौष्टिक आहार के रूप में गरीबों को मिलने वाले चना और गुड़ को भाजपा सरकार खा गई। भाजपा सरकार को गरीबों की चिंता नहीं सिर्फ चुनाव के समय वोट बैंक के रूप में उपयोग किया करती है। चना गुड़ गरीबों को दिलाने कांग्रेस पार्टी आंदोलन करेगी।
-दीपक बैज,
अध्यक्ष, प्रदेश कांग्रेस


शीघ्र होगा वितरण मामले में संबंधित विभाग के अफसरों से रिपोर्ट तलब जाएगी। किन कारणों से चना और गुड़ का वितरण नहीं किया रहा है अफसरों से रिपोर्ट लेकर शीघ्र बस्तर अंचल में इनका वितरण कराया जाएगा।
दयालदास बघेल,
खाद्य मंत्री छग


खाद्य विभाग से लेंगे जानकारी
चना और गुड़ का वितरण क्यों नहीं हो रहा है इसकी जानकारी संबंधित विभाग के अधिकारी से ली जाएगी। अगर किसी कारणों से वितरण नहीं हुआ है तो शीघ्र वितरण कराने के निर्देश दिए जाएंगे।
डोमन सिंह,
कमिश्नर, बस्तर संभाग

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