छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, जगदलपुर में दो दिवसीय मानसिक स्वास्थ्य एवं व्यक्तित्व विकास कार्यक्रम संपन्न
जगदलपुर, 6 अक्टूबर 2026।
छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, जगदलपुर द्वारा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ योगा एंड मैनेजमेंट, हरियाणा के सहयोग से विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, आत्म-विकास एवं समग्र व्यक्तित्व निर्माण के उद्देश्य से 5 एवं 6 अक्टूबर 2026 को दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में आचार्य दर्शन जी, पूर्व प्राचार्य, शासकीय महाविद्यालय, करतला तथा आचार्य अमोल जी, CEO एवं निदेशक, स्विस MNC ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को भगवान बुद्ध के आर्य अष्टांगिक मार्ग की अवधारणा से परिचित कराया गया तथा इसे वर्तमान जीवन में मानसिक शांति, आत्म-विकास और संतुलित व्यक्तित्व के लिए प्रासंगिक बताया गया। विद्यार्थियों को समझाया गया कि जीवन में सही दृष्टिकोण, सही संकल्प, सही वाणी और सही कर्म के माध्यम से व्यक्ति अपने व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ परिवार, समाज एवं राष्ट्र के विकास में भी सकारात्मक योगदान दे सकता है।
अष्टांगिक मार्ग के विभिन्न आयामों को विद्यार्थियों के जीवन से जोड़ते हुए सम्यक दृष्टि, सम्यक संकल्प, सम्यक वाणी एवं सम्यक कर्म पर विशेष रूप से चर्चा की गई। इसके साथ ही विद्यार्थियों को सम्यक संबंध के महत्व से भी अवगत कराया गया। परिवार, मित्रों, सहपाठियों, समाज तथा कार्यस्थल पर परस्पर सम्मान, सहयोग, संवेदनशीलता और विश्वास के आधार पर स्वस्थ संबंधों के निर्माण को मानसिक स्वास्थ्य एवं सफल जीवन का महत्वपूर्ण आधार बताया गया।
कार्यक्रम में व्यक्तिगत विकास के साथ-साथ परिवार, समाज एवं राष्ट्र के विकास में योगदान देने की भावना पर विशेष बल दिया गया। देशभक्ति गीतों एवं विभिन्न संवादात्मक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं देश के प्रति कर्तव्य-बोध की भावना को प्रोत्साहित किया गया।
इस अवसर पर आचार्य दर्शन जी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि “हमें भीड़ का हिस्सा नहीं बनना है, बल्कि अपने आत्म-विकास की दिशा में आगे बढ़ना है।”
आचार्य अमोल जी ने जीवनशैली और आंतरिक विकास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “Sanyas is nothing but a lifestyle.”
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण सोऽहम ध्यान (Soham Meditation) तथा ब्रह्मनाद ध्यान (Brahmanad Meditation) का व्यावहारिक सत्र रहा। विद्यार्थियों को ध्यान एवं श्वास के माध्यम से एकाग्रता, आत्म-जागरूकता, मानसिक शांति और आंतरिक संतुलन विकसित करने की तकनीकों का अभ्यास कराया गया।
दो दिवसीय कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि तकनीकी शिक्षा के साथ मानसिक स्वास्थ्य, आत्म-विकास, नैतिक मूल्यों, स्वस्थ संबंधों, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य-बोध का विकास भी आवश्यक है।
कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए आत्मचिंतन, मानसिक स्वास्थ्य, सकारात्मक जीवनशैली एवं समग्र व्यक्तित्व विकास की दिशा में एक उपयोगी और प्रेरणादायी अनुभव रहा।
