पटवारियों की मांगें जल्द पूरी करे सरकार: अधिवक्ता अवधेश कुमार झा



*जगदलपुर। छत्तीसगढ़ राजस्व पटवारी संघ द्वारा अपनी विभिन्न मांगों को लेकर उठाई जा रही आवाज का छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी विधि विभाग ने समर्थन किया है।
कांग्रेस कमेटी विधि विभाग के प्रदेश महासचिव एवं बस्तर संभाग प्रभारी वरिष्ठ अधिवक्ता अवधेश कुमार झा ने कहा है कि राजस्व विभाग शासन-प्रशासन की एक महत्वपूर्ण एवं आधारभूत इकाई है। राजस्व पटवारी ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में आम जनता और शासन के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करते हैं। भूमि संबंधी अभिलेखों का संधारण, नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, गिरदावरी, फसल संबंधी जानकारी, राजस्व सर्वेक्षण तथा प्राकृतिक आपदा के समय क्षति का आकलन जैसे अनेक महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन पटवारियों द्वारा किया जाता है। श्री झा ने कहा कि राजस्व व्यवस्था को सुचारु एवं पारदर्शी बनाए रखने में पटवारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन से लेकर किसानों की समस्याओं के निराकरण तक पटवारी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं। ऐसे में उनके कार्य की प्रकृति, कार्यभार,जिम्मेदारियों एवं वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उनकी जायज मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार किया जाना आवश्यक है।अवधेश कुमार झा ने कहा कि किसी भी कर्मचारी संगठन द्वारा अपनी न्यायसंगत मांगों को लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से शासन के समक्ष रखना उनका अधिकार है। कर्मचारियों की समस्याओं और मांगों की अनदेखी करने के बजाय सरकार को उनके साथ सकारात्मक संवाद स्थापित कर समाधान की दिशा में पहल करनी चाहिए। वरिष्ठ अधिवक्ता
अवधेश कुमार झा ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि छत्तीसगढ़ राजस्व पटवारी संघ की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक एवं गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए उनके निराकरण के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। पटवारियों को कार्य के अनुरूप आवश्यक संसाधन, सुविधाएं एवं सम्मानजनक कार्य परिस्थितियां उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि वे बिना किसी अनावश्यक दबाव के आम जनता को बेहतर राजस्व सेवाएं प्रदान कर सकें। उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस पार्टी सदैव कर्मचारियों, किसानों, श्रमिकों एवं आम नागरिकों के अधिकारों और हितों की पक्षधर रही है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी विधि विभाग पटवारी संघ की न्यायोचित मांगों के समर्थन में उनके साथ खड़ा है। सरकार को चाहिए कि टकराव की स्थिति निर्मित होने से पहले संगठन के प्रतिनिधियों से चर्चा कर उनकी समस्याओं का व्यावहारिक एवं न्यायसंगत समाधान निकाले।

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