तीस साल बाद फिर गुलजार हुआ इंद्रावती टाइगर रिजर्व



-अर्जुन झा-
जगदलपुर। वन मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में बस्तर संभाग का पर्यटन उद्योग लगातार नए आयाम रच रहा है। नक्सलवाद के खात्मे के बाद जहां बस्तर में विकास की रफ्तार तेज हुई है, वहीं यहां के जंगल भी फिर से आबाद होने लगे हैं। जंगलों में बाघ, तेंदुओं, चीतों, भालुओं और अन्य प्रजाति के जानवरों तथा खूबसूरत पक्षियों की आबादी काफी बढ़ गई है। यहां की वादियों में देशी-विदेशी पर्यटकों की आमद रफ्त काफी बढ़ गई है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ राज्य के स्थापना दिवस पर आज से बस्तर के बीजापुर जिले में स्थित इंद्रावती टाइगर रिजर्व के द्वार पर्यटकों के लिए फिर खोल दिए गए हैं।
अति नक्सल प्रभावित रहे बीजापुर जिले में शांति, विकास और पर्यटन की नई संभावनाओं के बीच इंद्रावती टाइगर रिजर्व में लगभग तीस साल बाद जंगल सफारी की शुरुआत हो गई है। प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में 1 नवंबर 2026 से पर्यटक जंगल सफारी के माध्यम से वन्यजीवों एवं प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव कर सकेंगे। यह पहल जिले में पर्यटन विकास, वन्यजीव संरक्षण एवं स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। बीते 31 मार्च को नक्सलवाद के खात्मे के बाद बीजापुर जिले में शांति एवं विकास के द्वार खुल गए हैं। इंद्रावती टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी की शुरुआत होने से जिले की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलेगी। वहीं स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका के नए अवसर भी सृजित होंगे। इंद्रावती टाइगर रिजर्व क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का चौथा सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। वर्ष 1981 में इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया तथा वर्ष 1982-83 में प्रोजेक्ट टाइगर के अंतर्गत शामिल किया गया। रिजर्व का कुल क्षेत्रफल 2,799.07 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें 1,258.37 वर्ग किलोमीटर कोर एवं 1,540.70 वर्ग किलोमीटर बफर क्षेत्र शामिल है। यहां बाघ, तेंदुआ, जंगली भैंसा, गौर, चीतल, ऊदबिलाव सहित भारतीय गिद्ध एवं सफेद पीठ वाले गिद्ध जैसे दुर्लभ वन्यजीव एवं पक्षी पाए जाते हैं।



सफारी के लिए 4 जिप्सी वाहन
प्रथम चरण में उल्लूर गांव से उंडलापर्ती तक लगभग 9 किलोमीटर का मार्ग जंगल सफारी के लिए निर्धारित किया गया है। पर्यटकों की सुविधा के लिए 4 जिप्सी वाहन उपलब्ध कराए गए हैं तथा सफारी का शुल्क 2 हजार रुपये तय किया गया है। भविष्य में पर्यटकों की संख्या एवं पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के अनुरूप वाहनों की संख्या बढ़ाई जाएगी। जंगल सफारी के दौरान प्रशिक्षित स्थानीय गाइड पर्यटकों को वन्यजीवों, जैव विविधता एवं प्राकृतिक विशेषताओं की जानकारी देंगे। इसके लिए 6 स्थानीय युवाओं को गाइड एवं सफारी वाहन चालक के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। सफारी गेट के समीप पारंपरिक मिट्टी के घरों की थीम पर जलपान गृह की व्यवस्था भी की गई है, जहां पर्यटक ग्रामीण परिवेश में स्थानीय व्यंजनों एवं जलपान का आनंद ले सकेंगे।

बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
इंद्रावती टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी की शुरुआत होने से स्थानीय युवाओं एवं ग्रामीणों के लिए गाइड, वाहन चालक, होम स्टे, खान-पान एवं पर्यटन से जुड़ी अन्य गतिविधियों में रोजगार तथा स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक व्यंजन, जनजातीय कला एवं संस्कृति को प्रोत्साहन मिलेगा। भविष्य में इंद्रावती टाइगर रिजर्व के अन्य क्षेत्रों में भी जंगल सफारी शुरू करने की योजना है। इंद्रावती टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी की शुरुआत बीजापुर जिले के बदलते परिवेश और विकास की नई दिशा को प्रदर्शित करती है। इससे जहां पर्यटकों को बस्तर की समृद्ध प्राकृतिक विरासत को करीब से देखने का अवसर मिलेगा, वहीं स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को भी नई गति प्राप्त होगी।

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