सामग्री खरीदी में गड़बड़ी पर डॉ. राजन के खिलाफ जांच शुरु



बीएमओ और सीएमएचओ पदों पर रहने के दौरान डॉ. राजन का विवादों से रहा है नाता

जगदलपुर :- यहां सीएमएचओ पद रहने के दौरान डॉ. डी राजन द्वारा स्वास्थ्य विभाग के लिए सामग्री खरीदी में की गई गड़बड़ी की जांच शुरू हो गई है। संभाग आयुक्त ने मामले की जांच के निर्देश बस्तर जिला प्रशासन को दिए हैं।
छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के प्रतिनिधि मंडल ने संघ के जिला अध्यक्ष अजय प्रताप सिंह परिहार के नेतृत्व में डॉ. डी राजन के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए बस्तर संभाग के आयुक्त के समक्ष लिखित शिकायत प्रस्तुत की थी।

शिकायत पत्र में संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं बस्तर जिला अध्यक्ष अजय प्रताप सिंह परिहार तथा अन्य पदाधिकारियों ने डॉ. राजन पर अंधत्व निवारण अभियान के नाम पर चश्मे, दवाइयां एवं अन्य सामग्री की खरीदी में जमकर गड़बड़ी करने का आरोप लगाया था। सीएमएचओ पद पर रहते हुए डॉ. राजन ने जगदलपुर के एक फर्म से जो समग्रियां क्रय की थीं, उनकी राशि का भुगतान न्यूनतम निविदा दर से अधिक दर पर किया गया था। बाद में मामला सार्वजनिक हो जाने पर संबंधित फर्म से राशि वापस मांगी गई थी। श्री परिहार का कहना है कि दरअसल यह पूरा मामला भ्रष्टाचार का है और फर्म के संचालक से मिलीभगत कर राशि हड़पने की योजना थी। इसके पीछे संघ की दलील है कि फर्म द्वारा पेश बिल व दस्तावेज तीन चार अधिकारियों की टेबलों से होकर गुजरे थे। ऐसे में किसी न किसी अधिकारी की नजर इस गड़बड़ी पर जरूर गई होगी, लेकिन जिले के सीनियर अफसर से लिंक जुड़े होने के कारण किसी अधिकारी ने बिल पर ऑब्जेक्शन नहीं किया। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए बस्तर के संभागायुक्त श्याम धावड़े ने जिला प्रशासन को मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। कमिश्नर के निर्देश के परिपालन में जिला प्रशासन ने मौजूदा मुख्य चिकित्सा एवं जिला स्वास्थ्य अधिकारी को पत्र भेजकर मामले की जल्द जांच पूरी कर सात दिनों के भीतर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा है। छ्ग प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष अजय प्रताप सिंह परिहार ने कहा है कि इस मामले की तो निष्पक्ष जांच होनी ही चाहिए, साथ ही डॉ. राजन ने बीएमओ एवं सीएमएचओ पदों पर रहते हुए जो टीए बिल व अन्य तरह के बिल पेशकर तथा सामग्री खरीदी के नाम पर जो गड़बड़ियां की हैं, उनकी भी फाइलें खुलनी चाहिए।

लग गई सोनिया यादव की हाय
डॉ. राजन का रवैया कर्मचारी विरोधी भी रहा है। कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाकर विभाग की योजनाओं का सफल क्रियान्वयन कराना तो दूर, डॉ. राजन पर हमेशा कर्मचारियों का मनोबल तोड़ने और उन्हें प्रताड़ित करने के आरोप लगते रहे हैं। डॉ. राजन की प्रताड़ना से सबसे ज्यादा प्रभावित स्टॉफ नर्स सोनिया प्रमोद यादव रही है। आरोप है कि विभागीय कर्मचारियों की मीटिंग में डॉ. राजन द्वारा सोनिया यादव के लिए सार्वजनिक रूप से अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया जाता था। सोनिया प्रमोद यादव से डॉ. राजन को न जाने किस बात की खुन्नस थी, कि वे स्तरहीन और अमर्यादित भाषा के जरिए सोनिया यादव को अपमानित करने से नहीं चूकते थे। सोनिया प्रमोद यादव अपमान सहते सहते अपनी जिंदगी से तंग आ चुकी थी और उन्होंने कुछ भी कदम उठा लेने की मानसिकता तक बना ली थी। अब चूंकि ‘डॉ. राजन फाइल्स’ खुल रही तब माना जा रहा है कि डॉ. राजन को एक अबला नारी की हाय लग गई है।

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