कवियों ने सावन की रिमझिम फुहारों के बीच बताई पानी की महत्ता
रायपुर/ जगदलपुर :- रोटरी काव्य मंच की 145 वी ऑन लाइन राष्ट्रीय ऑडियो काव्यगोष्ठी बेला में नेपाल एवं कनाडा सहित देश विदेश के 48 कवि, कवयित्रियों की सहभागिता में आयोजित की गई। गोष्ठी का विषय “पानी तुझमें जिसे मिलाओं, वह हो जाता उस जैसा, काश इंसान भी हो जाए तुझ जैसा” था। इस दार्शनिक विषय पर दार्शनिक रचनाओं के सुमधुर वाचन से रचनाकारों ने सावन की स्निग्ध फुहारों को काव्य प्रेम सुधा से उमंग से भर दिया।
काव्य गोष्ठी रोटेरियन धीरेंद्र दत्ता पूर्व मंडल अध्यक्ष भोपाल के मुख्य आतिथ्य व रोटेरियन डॉ. बनवारीलाल जाजोदिया ‘यथार्थ’ इंदौर की अध्यक्षता में हुई। संचालन रोटेरियन राजकुमार हांडा महासचिव इंदौर ने एवं शोभा रानी तिवारी बैंगलोर ने किया। काव्य गोष्ठी में पानी की महत्ता व उसका मानवीयकरण कर इंसान को अपना स्वभाव पानी जैसा कैसे बनाएं और संसार में प्रेम की सरिता कैसे प्रवाहित करें इस सुंदर भाव से ओतप्रोत रचनाएं समस्त रचनाकारों ने अपनी कविताओं, गीत, गजलों की मोहक प्रस्तुति से सभी को रस विभोर कर दिया। अतिथियों का पुष्प गुच्छ से स्वागत नीति ने किया। सरस्वती वंदना डॉ. स्वाति सिंह ने प्रस्तुत की। स्वागत गीत शोभा रानी तिवारी ने प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि का परिचय डॉ. स्वाति सिंह ने दिया। सम्मान पत्र का वाचन रोटेरियन अशोक द्विवेदी ने किया।काव्य गोष्ठी में डॉ. स्वाति सिंह, रानी नारंग, नीति अग्निहोत्री, शोभा रानी तिवारी, मीना अग्रवाल, संतोष तोषनीवाल, शेषनारायण चौहान बेंगलूर, रोटेरियन राजकुमार हांडा, मनमोहन छाबड़ा, अशोक कुमार गर्ग, डॉ. जवाहर लाल गर्ग, डॉ. मनोहर गोरे ‘सत्संगी’ इंदौर, शिशिर देसाई, डॉ. राजेंद्र कुमार खरे, डॉ. राज गोस्वामी दतिया, डॉ. मीना कुमारी परिहार बिहार, मनीराम शर्मा दतिया, रामस्वरूप साहू मुंबई, हुकुमचंद कटारिया आदर्श सनावद, दिनेंद्र दास साहेब बालोद छत्तीसगढ़, मंजू पोद्दार, जयप्रकाश अग्रवाल काठमांडू नेपाल, निर्मल सिंघल, डॉ. अशोक आकाश बालोद छत्तीसगढ़, डॉ. बनवारीलाल जाजोदिया ‘यथार्थ’, डॉ. श्याम मनोहर सिरोठिया सागर, पूरनचंद शर्मा दतिया, डॉ. अंजुल कंसल, कनुप्रिया, शिरोमणि माथुर दल्ली राजहरा छ्ग, डॉ. दीपिका सुतोदिया, गोपाल बघेल टोरंटो क नाडा, बरखा बंसल अलवर, अशोक पाल सिंह रुड़की, रो. धीरेंद्र दत्ता, डॉ. अजीत जैन आगरा, डॉ. अरविंद श्रीवास्तव असीम दतिया, चंद्रकला जैन चंडीगढ़, हंसा मेहता, राजेश रामनगीना, रो.नवीन नाहर देवास, डॉ. विनोद कुमार हंसौड़ा दरभंगा, मोहन त्रिपाठी गुजरात, अनिल वर्मा अलीगढ़, शुभ कुमार वर्णवाल मधुबनी बिहार, विजय लक्ष्मी अनु आगरा, आशा जाकड़, महेंद्र शर्मा, ललित सिंह ठाकुर छत्तीसगढ़ समेत 48 कवियों ने भावपूर्ण उत्कृष्ट रचनाओं से रस माधुर्य की वर्षा कर गोष्ठी के मुख्य विषय का प्रतिपादन किया। मुख्य अतिथि धीरेंद्र दत्ता ने अपनी कविता व प्रेरक उद्बोधन में पानी की महत्ता को इंगित किया। डॉ. बनवारीलाल जाजोदिया ने कहा कि आज के कार्यक्रम में मौसम के अनुरूप सबने दिल से रचना लिखी, गंभीर भाव और दिल से रचना पाठ किया, पानी के कितने रूप देखने को मिले, ज्ञान वर्धन हुआ। संचालक द्वय के अदभुत संयोजन ने गोष्ठी को माधुर्यता प्रदान की। आभार प्रदर्शन करते हुए रोटेरियन डॉ. राजेंद्र खरे ने कहा कि इस अद्भुत विषय पर रचनाकारों ने अद्भुत सौम्य, काव्य सौंदर्य का प्रस्तुतिकरण किया।
