जिसने भी खाई डीएमएफटी से बोटी, वे तोड़ेंगे जेल की रोटी



कई और बड़े अफसरों को जेल भेजने की हो गई है तैयारी

जगदलपुर (अर्जुन झा ) :- जिला खनिज न्यास ट्रस्ट (डीएमएफटी) की रकम की बंदरबांट के मामले की जांच ईडी ने तेज कर दी है। पिछले 2 वर्ष से छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन और डीएमएफ फंड में भ्रष्टाचार के मामले सुर्खियों में हैं। जांच में आयकर विभाग के साथ ही ईडी की भी एंट्री हो चुकी है। कुछ लोग जेल जा चुके हैं तथा कुछ और लोग कतार में हैं। यानि जिसने भी डीएमएफटी की रकम से बोटी खाई है, उन्हें अब जेल की रोटी तोड़नी ही पड़ेगी।
केंद्र शासन की व्यवस्था के अनुसार डीएमएफटी का चेयरमैन संबंधित जिले के कलेक्टर होते हैं और एक समिति भी होती है।डीएमएफ में कोयला और लौह अयस्क क्षेत्र से ज्यादा रकम प्राप्त होती है। छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा फंड कोरबा और दंतेवाड़ा, कांकेर सहित चांपा जांजगीर, रायगढ़, सूरजपुर जिला से ज्यादा प्राप्त होता है। फंड को लेकर केंद्र सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार ने गाइडलाइन भी जारी की है। गाइडलाइन का पालन नहीं किया जाता है। डीएमएफटी से जिन कार्यों की स्वीकृति दी जाती है उन्हें सार्वजनिक नहीं किया जाता और ना शासन के पोर्टल में इसे दर्शाया जाता है।

न ऑडिट, न हिसाब किताब
डीएमएफ फंड में अरबों रुपए हैं। छत्तीसगढ़ राज्य 2000 में बनने के बाद से 12 अगस्त 2023 तक अरबों रुपए डीएमएफ को प्राप्त हो चुके हैं, लेकिन इसका ऑडिट नहीं होता। जबकि ऑडिटर जनरल से इसका ऑडिट कराया जाना चाहिए। चार्टर्ड अकाउंटेंट से औपचारिकता पूर्ति कर इतिश्री कर ली जाती है। नई खनिज लीज में प्रथम वर्ष 30 प्रतिशत राशि प्राप्त होती थी। बाद में प्रतिवर्ष इसे 10 प्रतिशत कर दिया गया। राज्य और केंद्र सरकार की गाइड लाइन के अनुसार जिन जिलों में खनिज की लीज दी जाती है, वहां खनिज उत्खनन से प्रभावित लोगों के हित में कार्य करने के लिए यह फंड लिया जाता है। लेकिन अब इसका स्वरूप ही बदल गया है। इस राशि का कोई हिसाब किताब भी नहीं है।

अदृश्य शक्ति कराती है खेल
कहने को तो इसमें अध्यक्ष कलेक्टर होते हैं और एक समिति भी होती है लेकिन समिति लगभग सिर्फ फॉर्मेलिटी और कार्य अनुमोदन हेतु सदस्यों से हस्ताक्षर मात्र कराने के लिए होती है। समिति के सदस्य 1-2 काम की जो अनुशंसा करते हैं उसका समावेश कर दिया जाता है। सारा अधिकार कलेक्टर के पास ही सुरक्षित रहता है। कलेक्टर सरकार में बैठे अदृश्य ताकतवर व्यक्ति के मौखिक निर्देश पर अधिकांश काम स्वीकृत और ठेकेदार, सप्लायर एवं अन्य लोगों को काम वितरित करते हैं।

उठ रही है 2005 से जांच की मांग
डीएमएफटी की रकम में कथित गड़बड़ी को लेकर ईडी सक्रिय हो चुका है। उपरोक्त जिलों में 2016 से 2023 तक की जानकारी मांगी गई है। फंड के माध्यम से किस तरह खर्च हुआ, उसका स्वरूप क्या था, किसे किसे काम दिया गया, किन-किन सप्लायर और ठेकेदारों को काम दिया गया, उनके नाम, पेन नंबर, जीएसटी नंबर ईडी ने मांगे हैं। इसको लेकर खनिज विभाग व शासन में हलचल मची हुई है। वहीं राज्य की बुद्धिजीवियों, समाजसेवियों और अनेक राजनेताओं की मांग है कि डीएमएफटी घोटाले की जांच सन 2005 से भी होनी चाहिए। इससे कई और सफेदपोश सियासतदां और नौकरशाह बेनकाब होंगे।

बंदरों से पूछताछ, अब मदारियों की बारी
अति विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ईडी ने 8 अगस्त को कुछ कद्दावर सप्लायरों को रायपुर कार्यालय पुजारी पार्क में बुलाकर 8 घंटे तक मैराथन पूछताछ की थी। उनसे कुछ कागजों पर हस्ताक्षर करवाए गए और उनसे स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जब बुलाया जाएगा आप लोगों को कार्यालय पहुंचना ही होगा। दरअसल भ्रष्टाचार के खेल में ये सप्लायर एक तरह से ऐसे बंदर ही हैं, जो मदारियों के इशारे पर नाचते हैं। कहा जा रही है कि उन्हें नचाने वाले मदारियों की भी बारी जल्द आने वाली है।

कृषि विभाग पर भी है नजर
सूत्र यह भी बता रहे हैं कि ईडी द्वारा मुख्य रूप से एग्रीकल्चर, हॉर्टिकल्चर और एजुकेशन में, जो करोड़ों अरबों रुपए के आदेश दिए गए हैं, उनके कागजातों को खंगाला जा रहा है और पूछताछ भी उसी तरीके से की जा रही है। अन्य विभाग भी इसकी चपेट में आने वाले हैं।खनिज विभाग द्वारा ईडी को फंड से जो खर्च दिखाया गया है उसकी रिपोर्ट आने के बाद कृषि विभाग समेत अन्य विभागों में भी ईडी की दबिश होने वाली है।

आईएएस की टीप पर जांच
एक महिला आईएएस और छत्तीसगढ़ कांग्रेस सरकार के एक मंत्री ने मिलकर बहुत सारे दस्तावेज उपरोक्त मामले में ईडी को उपलब्ध करवाएं हैं। ईडी ने जेल में बंद आईएएस रानू साहू से उनके कोरबा कलेक्टर रहते फंड के मामले पर पूछताछ के लिए रायपुर न्यायालय से अनुमति ले ली है। 16 एवं 17 अगस्त को जेल में जाकर ईडी के अधिकारी पूछताछ करेंगे।

सबका नंबर आएगा
इसके बाद उपरोक्त जिलों में जो कलेक्टर रहे हैं और जिन्होंने करोड़ों अरबों रुपए उपरोक्त फंड के माध्यम से कार्य स्वीकृत कर सप्लायर और ठेकेदारों को दिए गए हैं, उनसे भी पूछताछ होने की बात कही जा रही है। छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्रालय के अधिकारियों और उक्त जिलों में पदस्थ कलेक्टरों, सप्लायरों और ठेकेदारों में दहशत व्याप्त है।

बगैर सप्लाई, खा गए करोड़ों रुपए
बताया तो यह भी जा रहा है कि आर्डर तो दिए गए उपरोक्त फंड के माध्यम से, लेकिन सामान सप्लाई नहीं हुआ। सिर्फ सामान गोडाउन में पहुंचना बताकर, पावती लेकर फंड की बंदरबांट कर ली गई।सूत्र बता रहे हैं कि करोड़ों अरबों रुपए का घोटाला हो चुका है।

आईएएस और आईपीएस लॉबी में आक्रोश
ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स विभाग की कार्रवाई से राज्य की आईएएस एवं आईपीएस लॉबी में आक्रोश देखा जा रहा है। इस आक्रोश की आंच मध्यप्रदेश तक भी पहुंच चुकी है। सूत्र बताते हैं कि आईएएस और आईपीएस अधिकारियों का यह गुस्सा छत्तीसगढ़ के साथ ही मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनावों तथा लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।

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