अमृत मिशन के लिए पीएमसी नियुक्ति में टेंडर घोटाला !
फर्जी सर्टिफिकेट लगवाकर मेसर्स पौराणिक ब्रदर्स को दे दिया गया ठेका
जगदलपुर (अर्जुन झा) :- घर घर नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए अमृत मिशन के कार्यों में करोड़ों के वारे न्यारे कर दिए गए हैं। सुडा और नगरीय निकायों के अधिकारियों ने एक अपात्र फर्म को ठेका देने में जमकर धांधली की है। ऐसा करके अधिकारियों और ठेका फर्म ने केंद्र सरकार को करोड़ों रुपयों का चूना लगा दिया है। इस गड़बड़झाले में जगदलपुर नगर निगम भी शामिल है। इस बड़े घोटाले पर केंद्रीय जांच एजेंसियां जल्द एक्शन लेने वाली हैं।

अमृत मिशन के पीएमसी कार्यों हेतु पूरे राज्य के लिए टेंडर प्रक्रिया के तहत जिस एजेंसी का चयन किया जाता है, उसे अमृत मिशन के अंतर्गत चल रहे सभी कार्यों की पीएमसी के रूप में देखभाल करना होता है। ऐसा अमृत मिशन के कार्य हेतु भारत सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों में प्रावधान है। इस प्रावधान की धज्जियां छत्तीसगढ़ में उड़ाई गईं हैं।सूचना के अधिकार के तहत जो सबूत मिले हैं, उनके अनुसार सुडा एवं नगरीय प्रशासन विभाग के कतिपय अधिकारियों के भ्रष्टाचार की वजह से छत्तीसगढ़ के कई नगरी निकायों के लिए पृथक से टेंडर की प्रक्रिया अपनाई गई। इसमें अपनी चहेती खास एजेंसी मेंसर्स पौराणिक ब्रदर्स को फायदा पहुंचाया गया। पौराणिक ब्रदर्स के पीएमसी को कार्यों हेतु योग्य न होने के बावजूद उसे करोड़ों का कार्यादेश देकर अधिकारियों ने अपनी तिजोरी भर ली और शासन को करोड़ों रुपयों का चूना लगा दिया। इतना ही नहीं जब पीएमसी के कार्यों हेतु पूरे राज्य के लिए मेंसर्स शाह टेक्निकल सर्विसेज एमटीसी का चयन टेंडर प्रक्रिया के तहत किया गया, तो भी सुडा के अधिकारियों ने भ्रष्टाचार को अहमियत दी। जगदलपुर, रायपुर, भिलाई, कुम्हारी, कोरबा, भिलाई चरौदा एवं बीरगांव समेत कुछ अन्य नगरीय निकायों में पृथक से टेंडर आमंत्रित किए गए। इसमें एमसीसी के इंजीनियर स्टाफ को नहीं रखने हेतु भारी भरकम राशि चार्ज की गई और इन सभी जगहों पर पृथक से टेंडर बुलाकर मनमाने तरीके से मेसर्स पौराणिक ब्रदर्स को करोड़ों का कार्य सौंप दिया गया। इस कार्य में फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र लगाए गए। इससे जुड़े सारे दस्तावेज इस संवाददाता के पास मौजूद हैं। इन दस्तावेजों से यह स्पष्ट हो जाता है कि छत्तीसगढ़ में अमृत मिशन के कार्यों में जमकर भ्रष्टाचार किया गया है। जानकारी मांगने पर नगरी निकायों द्वारा आधे अधूरे कागजात दिए जाते रहे, जबकि भिलाई चरोदा नगर निगम द्वारा सूचना हेतु पत्र लेने से ही इंकार कर दिया गया। इससे प्रतीत होता है कि किस तरह अमृत मिशन को किस कदर पलीता लगाया जा रहा है। इस सारे भ्रष्टाचार की जांच हेतु विभागीय मंत्री छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव को भी आवेदन दिया गया है, जिस पर अब तक कोई कार्यवाही नहीं हो पाई है।
डी श्रेणी के फर्म को करोड़ों के कार्य ?
अमृत मिशन के कार्य के लिए मेसर्स शाह टेक्नीकल कंसल्टेंट (एसटीसी) का टेंडर प्रक्रिया के द्वारा चयन किया गया। इस फर्म को राज्य में अमृत मिशन के तहत चल रहे सभी कार्यों की देखरेख के लिए नियुक्त किया गया था। ऐसे में सवाल उठता है कि जब मेसर्स एसटीसी का चयन किया जा चुका था, तब पृथक से करोड़ों का टेंडर क्यों किया गया ? राज्य द्वारा चयनित मेसर्स एमसीसी को अवार्ड की गई लागत में सभी कार्यों की देखभाल देखरेख करनी थी। सुडा एवं नगर निगमों के अधिकारियों की मिलीभगत से सात आठ निकायों में अलग से टेंडर कॉल किया गया तथा सभी कार्य पौराणिक ब्रदर्स को दे दिए गए। ऐसा करके शासन को करोड़ों रुपए का चूना लगाते हुए केंद्र सरकार की रकम की बंदरबांट कर ली गई। प्रथक से कॉल किए गए टेंडर में पौराणिक ब्रदर्सको ही क्यों चयनित किया गया? जबकि उसका रजिस्ट्रेशन डी श्रेणी का है। इस लिहाज से पौराणिक ब्रदर्स एक करोड़ से अधिक के कार्यों में भाग लेने के पात्र नहीं है। जबकि अमृत मिशन के सभी कार्य 1 से 6 करोड़ तक रहे हैं।
चार साल की उम्र से प्रोजेक्ट वर्क!
मेसर्स पौराणिक ब्रदर्स द्वारा टेंडर हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेज पेश किए गए हैं। इन दस्तावेजों में फर्जी अनुभव प्रणाम पत्र भी शामिल है। पेश दस्तावेजों में पौराणिक ब्रदर्स ने मोहम्मद शादाब कुरैशी को कंप्यूटर ऑपरेटर के तौर पर अपना कर्मचारी बताया है। शादाब कुरैशी की उम्र 26 साल और एक्सपिरियंस सर्टिफिकेट में शादाब का अनुभव 22 साल का दिखाया गया है। दस्तावेजों के मुताबिक शादाब कुरैशी की जन्मतिथि 1 जुलाई 1997 है और उसे प्रोजेक्ट में 22 वर्ष का अनुभवी दिखाया गया है। मतलब चार साल की उम्र से ही शादाब कुरैशी इस तरह के प्रोजेक्ट वर्क करते रहे हैं। ऐसे और भी कई दस्तावेज मौजूद हैं जिससे पता चलता है कि किस तरह अधिकारियों की मिलीभगत पौराणिक ब्रदर्स से है और कमीशन का कैसा खेल छत्तीसगढ़ में चल रहा है। अमृत मिशन हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने वाली केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजना है। इसमें हुए व्यापक भ्रष्टाचार की केंद्रीय जांच एजेंसियां जांच शुरू कर सकती हैं। जांच और कार्रवाई तो होनी ही है। तब फिर सुडा एवं नगरीय प्रशासन विभाग के कई बड़े अधिकारी और तथाकथित फर्म के संचालक नप जाएंगे।
