मंडी बोर्ड में अब भी कायम है कांग्रेसी ठेकेदारों का दबदबा



रायपुर :- राज्य में सरकार बदल चुकी है, लेकिन छत्तीसगढ़ राज्य मंडी बोर्ड के अधिकारियों के कामकाज का ढर्रा नहीं बदल सका है। वे अभी भी कांग्रेसी मानसिकता वाले अपात्र ठेकेदारों को भी निर्माण कार्यों के ठेके देने में जरा भी गुरेज नहीं कर रहे हैं। इससे लगता है कि अधिकारी कांग्रेस शासन काल की दबाव वाली राजनीति से अब तक उबर नहीं पाए हैं।
मंडी बोर्ड की तकनीकी शाखा के वरिष्ठ अधिकारी अभी भी कांग्रेस फोबिया से ग्रसित हैं। तकनीकी शाखा मंडी बोर्ड की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है। इस शाखा पर अहम निर्माण कार्यों को अंजाम देने का दायित्व रहता है। कृषि उपज मंडियों में सड़क, प्लेटफार्म, शेड, भवन आदि बनवाने का जिम्मा मंडी बोर्ड की तकनीकी शाखा के अधिकारियों पर होता है। कांग्रेस शासन काल के दौरान तकनीकी शाखा के वरिष्ठ अधिकारी द्वारा कांग्रेस से जुड़े और कांग्रेसी विचारधारा वाले ठेकेदारों को निर्माण कार्यों के ठेके दे दिए जाते रहे हैं। ये ठेकेदार संबंधित कार्य को कराने के लिए पात्र नहीं हों तब भी नियमों को शिथिल कर उन्हें ठेके देने का खेल चलता रहा है। ऐसा करके अधिकारी ने शासन को जमकर चूना लगाया है। सूत्र बताते हैं कि तकनीकी शाखा के अधीक्षण यंत्री कांग्रेस शासनकाल में पूरे पांच साल तक ऐसे कृत्य को अंजाम देते रहे हैं। उनकी यह कारगुजारी सरकार बदलते ही सामने आने लगी है। पता चला है कि अधीक्षण यंत्री से मिलीभगत करके कुछ अपात्र कांग्रेसी ठेकेदारों को भी पात्र घोषित कर करोड़ों के ठेके दे दिए गए हैं। अब सरकार बदलने के बाद पीड़ित पात्र ठेकेदारों द्वारा इसकी मय सबूत लिखित शिकायत करने की तैयारी की जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार रायपुर जिले के आरंग में विधानसभा के समीप धनेली से धनसूली तक 3 किमी लंबी सड़क का निर्माण लगभग 4 करोड़ की लागत से कराने हेतु निविदा निकली थी। इस निविदा से कई ठेकेदारों को महज इसलिए बाहर कर दिया गया कि वे गैर कांग्रेसी और ईमानदार हैं। ये ठेकेदार मंडी बोर्ड के सभी मापदंडों खरे उतरते हैं। निर्माण कार्यों का उनके पास खासा तजुर्बा भी है। ऐसे योग्य ठेकेदारों को बेतुके कारण बताकर निविदा से बाहर करके अपात्र ठेकेदार के नाम से आनन फानन में कार्य स्वीकृत कर दिया गया। कहा जा रहा है ऐसे ठेकेदार को कार्य देने में मंडी बोर्ड के सभी नियमो को शिथिल कर दिया गया है।

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