कांकेर सीट के चयन ने चौंकाया, बदले जा सकते हैं कई सीटों के प्रत्याशी



कांकेर से मोहन मंडावी का टिकट कटना चर्चा का विषय
-अर्जुन झा-
जगदलपुर। लोकसभा चुनाव के लिए टिकट वितरण में भले ही भाजपा ने कांग्रेस से बाजी मार ली है, लेकिन छत्तीसगढ़ की आधे से भी ज्यादा सीटों पर प्रत्याशी चयन को लेकर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। माना जा रहा है कि कांग्रेस को उलझाने के लिए भाजपा ने टिकट वितरण का जाल फेंका है। इसीलिए कई सीटों पर पैराशूट प्रत्याशी थोपे गए हैं, तो कई सीटों पर कमजोर प्रत्याशी उतारे गए हैं।इसके चलते कयास लगाए जा रहे हैं कि नामांकन दाखिले के अंतिम क्षणों में कुछ सीटों के प्रत्याशी बदले जा सकते हैं।

बस्तर संभाग की दोनों सीटों पर भाजपा ने जो प्रत्याशी उतारे हैं, दोनों ही राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की पृष्ठभूमि वाले हैं। खास बात यह है कि बस्तर से प्रत्याशी महेश कश्यप और कांकेर सीट से प्रत्याशी भोजराज नाग धर्मान्तरण को लेकर आवाज बुलंद करते आए हैं। श्री कश्यप और श्री नाग ने बस्तर संभाग में धर्म परिवर्तन के खिलाफ वृहद जन जागरण अभियान चलाते रहे हैं। इसी वजह से बस्तर संभाग में दोनों की विशिष्ट पहचान है। बस्तर से महेश कश्यप के नाम को लेकर तो कोई हैरानी नहीं हुई, लेकिन कांकेर के वर्तमान सांसद मोहन मंडावी का टिकट कटना सबसे ज्यादा हैरान करने वाला है। दरअसल मोहन मंडावी अपने संसदीय क्षेत्र काफी सक्रिय रहे हैं। मोहन मंडावी मानस मर्मज्ञ हैं।.हाल ही में श्री मंडावी ने कांकेर लोकसभा क्षेत्र में श्रीराम चरित मानस की 51 हजार प्रतियां बंटवाकर धर्म प्रभावना को विस्तारित करने में बड़ी अहम भूमिका निभाई है। अपनी इस पहल को लेकर वे पूरे छत्तीसगढ़ में और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक मोहन मंडावी काफी चर्चित और लोकप्रिय हो चले थे। ऐसे में उम्मीद की जा रही थी कि कि कांकेर में मंडावी का कोई विकल्प नहीं हैं और वही रिपीट भी किए जाएंगे, लेकिन जब प्रत्याशी की घोषणा हुई, तो बड़े बड़े राजनैतिक पंडित भी अचंभे में पड़ गए। खैर भाजपा की नई पसंद में भी कोई नुख्स नहीं है। प्रत्याशी भोजराज नाग सरपंच, जनपद अध्यक्ष, जिला पंचायत सदस्य और विधायक तक का सफर तय कर चुके हैं और अब संसद तक पहुंचने की बारी है। वहीं महासमुंद से रूप कुमारी चौधरी, जांजगीर चांपा से कमलेश जांगड़े, कोरबा से डॉ. सरोज पाण्डेय, रायगढ़ से राधेश्याम राठिया, सरगुजा से चिंतामणि महाराज के नामों को लेकर जो बातें सामने आ रही हैं, वे इन सीटों से टिकट की आस लगाए बैठे भाजपा नेताओं को राहत पहुंचा सकती है। कहा जा रही है कि इन सभी लोकसभा क्षेत्रों के प्रत्याशी अंतिम क्षणों में बदले जा सकते हैं। इसके पीछे दलील यह दी जा रही है कि इनमें से कुछ प्रत्याशी कमजोर हैं तथा कुछ बाहर से थोपे गए हैं।

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