आदिवासियों की आस्था, संस्कृति और अस्तित्व के लिए लड़ते आए हैं भोजराज नाग
जगदलपुर। बस्तर संभाग की कांकेर लोकसभा सीट के भाजपा प्रत्याशी भोजराज नाग के रग रग में आदिवासी आस्था, संस्कृति और आदिवासियों के अस्तित्व की रक्षा का जज्बा भरा हुआ है।छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले की अति संवेदनशील अंतागढ़ तहसील के ग्राम हिमोड़ा के मूल निवासी भोजराज नाग को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की कार्यप्रणाली और भाजपा की राजनीति के गुण अपनी माता नूतन बाई नाग से मिले हैं।
भोजराज नाग की माताजी नूतन बाई नाग भाजपा अंतागढ़ मंडल अध्यक्ष एवं जिला पंचायत सदस्य रही। भोजराज की प्रारंभिक शिक्षा एवं उच्चतर शिक्षा अंतागढ़ तहसील में ही संपन्न हुई। छात्र जीवन से ही राष्ट्रभक्ति, सेवा का भाव होने से संघ और संघ कार्य के लिए आगे बढ़ते गए और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के तृतीय वर्ष शिक्षित होकर स्वयं सेवक बने। सन 1992 से 1997 तक भोजराज नाग सरपंच के रूप में कार्य करते रहे। फिर सन 2000 से 2005 तक श्री नाग जनपद अध्यक्ष रहे। भोजराज नाग सन 2009 से 2014 तक जिला पंचायत सदस्य के रूप में जनसेवा के कार्य करते रहे। सन 2014 से 2018 तक अंतागढ़ विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। उन्होंने पूर्व भाजपा अंतागढ़ मंडल के अध्यक्ष का कार्यभार भी संभाला और भारतीय जनता पार्टी जिला कांकेर के तीन बार जिला महामंत्री के रूप में पार्टी की सेवा भी की। विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए श्री नाग जनजाति सुरक्षा मंच के प्रदेश संयोजक बनाए गए और धर्मांतरण के खिलाफ आंदोलन शुरू किया। 2006 से 2009 तक जनजाति सुरक्षा मंच संगठन मंत्री के रूप में कार्य किया और वे जनजाति सुरक्षा मंच केंद्रीय टोली के सदस्य भी हैं। बस्तर क्षेत्र में भोजराज नाग देवी देवताओं के पुजारी एवं बैगा के रूप में प्रसिद्ध हैं। बस्तर संभाग सहित पूरे छत्तीसगढ़ में भ्रमण करते हुए आपने धर्मांतरण के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं और अपनi राष्ट्रभक्ति से जनमानस के हृदय में अपना स्थान बनाने में सफल रहे हैं।
