हाई स्कूल पोटा केबिन छात्रावास की स्कूली छात्रा ने दिया बच्चे को जन्म…!



अर्जुनझा-
जगदलपुर। बस्तर संभाग के बीजापुर जिले में आदिम जाति विकास एवं कल्याण विभाग बेलगाम हो चला है। विभाग के स्कूलों, आश्रमों, छात्रावासों, कन्या परिसरों में रह रहकर पढ़ाई कर रही बेटियों की सुरक्षा की परवाह विभाग के अधिकारियों को नहीं रह गई है। रोज बरोज कोई न कोई घटना आदिवासी छात्राओं के साथ हो रही है। अब एक छात्रावासी छात्रा के गर्भवती होने और एक बच्चे को जन्म देने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बीजापुर जिले के छात्रावासों में छात्राओं की आबरू से खिलवाड़ किया जा रहा है, आदिम जाति विकास एक कल्याण विभाग की नाक कट रही है और अफसरों को इसकी जरा भी परवाह नहीं है।
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक बीजापुर जिले के गंगालूर स्थित हाई स्कूल आवासीय विद्यालय पोटा केबिन छात्रावास में रहकर 12वीं कक्षा में विज्ञानं विषय की पढ़ाई कर रही ग्राम पुसनार निवासी एक छात्रा के गर्भवती हो जाने और उसकी कोख से एक बच्चे के जन्म लेने की हैरान करने वाली खबर आई है। बताते हैं कि बीती रात उक्त छात्रा को पेट दर्द की शिकायत हुई। उसके बाद उसे रात में ही गंगालूर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ले जाया गया। छात्रा की हालत को देखते डॉक्टरों ने उसे अस्पताल में भर्ती कर लिया। जब डॉक्टरों ने छात्रा का चेकअप किया, तो पता चला कि वह गर्भवती है और अब तब में प्रसव भी हो सकता है। इसके बाद डॉक्टरों ने छात्रा को ऑब्जर्वेशन में रखकर उसकी देखरेख के लिए नर्सो की ड्यूटी लगा दी। बताया जाता है कि देर रात छात्रा का प्रसव हो गया। उसने पूर्ण विकसित बच्चे को जन्म दिया। जैसे ही यह बात हॉस्पिटल से बाहर आई, बीजापुर में हलचल मच गई। लोग आदिवासी छात्राओं के साथ हो रहे दुराचार और अमानवीय कृत्य को लेकर आक्रोशित भी नजर आए। बताते हैं कि उक्त छात्रा 18 साल से अधिक उम्र की है। यह भी खबर है कि छात्रा का गंगालूर के ही एक युवक के साथ प्रेम प्रसंग भी चल रहा है। छात्रा के गर्भवती होने को प्रेम प्रसंग की परिणति माना जा रहा है।

क्या सो रहे हैं सहायक आयुक्त ?
मामला चाहे प्रेम प्रसंग का हो या कुछ और, मगर आदिम जाति कल्याण एवं विकास विभाग बीजापुर के सहायक आयुक्त, छात्रावास अधीक्षिका और संबंधित अन्य अधिकारी कर्मचारी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। छात्रा अपने कथित प्रेमी युवक से मिलने के लिए छात्रावास से कब और कैसे बाहर जाती रही, उस पर संबंधित कर्मियों की नजर कैसे नहीं पड़ी, छात्रावास में छात्राओं का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण क्यों नहीं कराया जाता? ये तमाम सवाल विभाग के सहायक आयुक्त को कटघरे में खड़े कर रहे हैं। इसका मतलब साफ है कि आदिम जाति कल्याण एवं विकास विभाग के छात्रावासों में रहकर पढ़ाई करने वाले छात्र छात्राओं की जिंदगी और आबरू को विभाग के अधिकारियों ने ही दांव पर लगा दिया है। विभाग के अधिकारियों ने आदिवासी विद्यार्थियों को उनके हाल पर छोड़ रखा है। अगर छात्राओं पर बराबर नजर रखी जाती, तो एक छात्रा की इज्जत आज दांव पर नहीं लगी होती। वहीं अगर छात्राओं का समय समय पर हेल्थ चेकअप कराया जाता, तो छात्रा के गर्भवती होने की बात पहले ही पता चल जाती और अप्रिय स्थिति से बचा जा सकता था। मगर लगता है कि बीजापुर में पदस्थ आदिम जाति कल्याण एवं विकास विभाग के सहायक आयुक्त सो रहे हैं। बीजापुर जिले के ही विभागीय छात्रावास में एक अन्य छात्रा के भी गर्भवती होने और छात्रावास में ही उसका प्रसव होने की भी खबर है। कुछ दिनों पहले ही बीजापुर जिले के एक पोटा केबिन छात्रावास में भीषण आग लग गई थी। इस अग्नि दुर्घटना में एक आदिवासी बच्ची जिंदा जल गई थी। इसके बाद भी सहायक आयुक्त व्यवस्था सुधारने की दिशा में कोई पहल करते नजर नहीं आ रहे हैं।

संवेदनशीलता दिखाई डीईओ ने
इस मामले में बीजापुर के जिला शिक्षा अधिकारी बीआर बघेल की तत्परता और कर्तव्य परायणता की दाद देनी होगी। श्री बघेल छात्रावासी छात्रा के मां बनने की जानकारी मिलते ही बिना समय गंवाए गंगालूर के लिए रवाना हो गए। गंगालूर जाने से पहले डीईओ बीआर बघेल अध्यायनरत छात्रा के गर्भवती होने की पुष्टि की। श्री बघेल ने बताया कि वे तुरंत गंगालूर के लिए निकल रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि कुछ ही देर में बीआर बघेल गंगालूर पहुंच भी गए। श्री बघेल की संवेदनशीलता की झलक आज देखने को मिली। लोग श्री बघेल की इस तत्परता और संवेदनशीलता की तारीफ कर रहे हैं और आदिम जाति विकास एवं कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त को ऐसी ही संवेदनशील बनने की नसीहत दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर सहायक आयुक्त कर्तव्य परायण और संवेदनशील बन जाएं, तो विभाग की सारी अव्यवस्थाएं खुद ब खुद दूर हो जाएंगी। फिर कभी किसी आदिवासी छात्रा की इज्जत यूं दांव पर नहीं लगेगी।

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