नक्सालियों ने रखी सशर्त वार्ता की पेशकश, खुद को बताया आदिवासियों और अल्पसंख्यकों का हमदर्द



-अर्जुन झा-
जगदलपुर। बस्तर संभाग में सक्रिय नक्‍सलियों की दंडकारण्‍य कमेटी ने सरकार के साथ शांति वार्ता के लिए प्रस्ताव रखा है। इसके लिए नक्सली संगठन ने शर्तों की झड़ी भी लगाई है। कई शर्ते तो ऐसी ही हैं, जो उनकी कथनी और करनी की पोल खोल रही हैं।
शांति वार्ता के लिए नक्सली संगठन भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की दंडकरण्य स्पेशल जोनल कमेटी ने पोस्टर नुमा लंबा चौड़ा पत्र जारी किया है। इस पत्र में नक्‍सलियों ने बातचीत के लिए कई शर्तें रखी हैं। इसमें कहा गया है कि बातचीत के लिए अनुकूल वातावरण बन जाने पर ही हम आगे आएंगे। पत्र में सुरक्षा बलों को छह माह तक उनके कैंपों तक ही सीमित रखने पर जोर दिया गया है। इसका मतलब है कि सुरक्षा बल नक्सल विरोधी अभियान पूरी तरह बंद रख जंगलों में सर्चिंग और गश्त के लिए न निकलें। यह भी कहा गया है कि पुलिस और सुरक्षा बल फर्जी मुठभेड़ बंद करें और सुरक्षा बलों के नए कैंप स्थापित न किए जाएं। इस संगठन का कहना है कि किसानों, मजदूरों, मध्यम वर्गीय लोगों, छोटे व मध्यम पूंजीपतियों, आदिवासियों, दलितों ईसाई, मुस्लिम अल्पसंख्यकों, महिलाओं के हितों को छोड़कर उनका कोई अलग व्यक्तिगत हित नहीं है। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा के बयानों का भी इस पत्र में जिक्र किया गया है। नक्सली संगठन ने कहा है कि उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा लगातार बयान देते आए हैं कि सरकार नक्सलियों से बातचीत के लिए तैयार है। अपने बीजापुर जिले के जांगला प्रवास के दौरान भी विजय शर्मा ने ऐसा ही बयान दिया था। मगर वार्ता पर वे दंडकरण्य स्पेशल जोनल कमेटी के बयान का वे कोई सीधा जवाब नहीं दे रहे हैं। विजय शर्मा के बयान को नक्सली संगठन ने जनता को दिग्भ्रमित करने वाली चाल करार दिया है।नक्सली संगठन ने दलितों मुस्लिम व ईसाई अल्पसंख्यकों, आदिवासियों, महिलाओं, मजदूरों, किसानों के हितों के लिए सरकारों द्वारा पर्याप्त कदम उठाए जाने के बाद ही वार्ता के लिए खुद के आगे आने की बात कही है।

सामने आया दोहरा चरित्र
नक्सली संगठन ने अपने पत्र में जिक्र किया है कि किसानों को निशुल्क सिंचाई व बिजली की सुविधा दी जाए, उनकी उपज को समर्थन मूल्य पर खरीदने की गारंटी दी जाए, गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी, बिजली, सड़क की व्यवस्था की जाए। अब यहां सवाल उठता है कि जो नक्सली शाला भवनों व अन्य सरकारी इमारतों में आगजनी करते आए हैं, पुल पुलियों को विस्फोट कर ढहाते आए आए हैं, सड़कों के निर्माण में लगे वाहनों व मशीनों को जलाते आए हैं, वे अब किस मुंह से गांवों में ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दे रहे हैं। वहीं इस पर्चे में आदिवासी हितों की बात करने वाले नक्सली पचासों आदिवासियों को मौत के घाट उतार चुके हैं। इससे नक्सालियों का दोहरा चरित्र स्वतः उजागर हो गया है।

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