इंद्रावती और भास्कली नदी रेत खनन शिखर पर; खनिज अधिकारी चेरपा मौन साधना में लीन, ग्रामीणों ने पकड़े ट्रक

अर्जुन झा-
बकावंड। हर स्तर पर प्रशासनिक कार्रवाई के बाद भी बकावंड ब्लॉक में भास्कली और इंद्रावती नदी से रेत के अवैध खनन एवं परिवहन का खेल बदस्तूर जारी है। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि रेत माफिया के हौसले आखिर क्यों इस कदर बुलंद हैं? क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और ग्रामीण सीधे तौर पर खनिज अधिकारी शिखर चेरपा को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। खनिज विभाग की मौन साधना को देखते हुए अब ग्रामीणों ने खुद रेत परिवहन कर रहे ट्रक ट्रेक्टरों की धर पकड़ शुरू कर दी है। तारापुर ग्राम पंचायत के ग्रामीणों ने कल शनिवार को
रेत भरे कई ट्रकों को जप्त कर लिया।

आखिर तमाम प्रशासनिक कार्रवाई के बाद भी रेत चोर किसके इशारे पर इंद्रावती और भास्कली नदी को सूखने की कगार पर ला रहे हैं? दरअसल बकावंड विकासखंड की ग्राम पंचायत बनियागांव और तारापुर के आसपास भास्कली नदी एवं इंद्रावती नदी में बड़े पैमाने पर रेत का अवैध खनन जेसीबी मशीन के जरिए किया जा रहा है। अवैध खनन के चलते बनियागांव में भास्कली नदी की धारा की दिशा ही बदल गई है। नदी का बहाव बनियागांव की दिशा में होने लगी है और यहां के कई किसानों की कृषि जमीन नदी में समा चुकी है। बनियागांव के पंचायत प्रतिनिधि और ग्रामीण अवैध खनन की शिकायत कई बार कर चुके हैं, मगर खनिज अधिकारी शिखर चेरपा हैं कि कोई कदम ही नहीं उठा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि श्री चेरपा अभी मौन साधना में लीन हैं। शायद उन्होंने रेत माफियाओं को खुली छूट दे रखी है। कुछ दिनों पहले एसडीएम ऋषिकेश तिवारी ने बनियागांव जाकर मौका मुआयना किया था। तब श्री तिवारी को रेत का परिवहन करते एक भी ट्रक या ट्रेक्टर नहीं मिला। अलबत्ता उन्हें नदी के बीचोंबीच एक बैक हो मशीन जरूर नजर आई, मगर ओड़िशा और बस्तर की सीमा को लेकर असमंजस के चलते कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी। बाद में ग्रामीणों ने उक्त मशीन की जप्ती खुद ही बना ली थी। इसके बाद भी भास्कली और इंद्रावती नदी से रेत निकासी का सिलसिला थमा नहीं है।जब खनिज विभाग के अधिकारी शिखर चेरपा और उनकी टीम की ओर से कोई कार्रवाई होती नजर नहीं आई तब बकावंड विकासखंड की ग्राम पंचायत तारापुर के ग्रामीण एवं पंचायत प्रतिनिधि खुद मैदान पर उतर आए। उन्होंने दर्जनों अवैध रूप से रेत परिवहन कर रहे कई ट्रकों को पकड़ लिया। इन ट्रकों को पंचायत ने अपनी अभिरक्षा में रखा है। ग्रामीणों का आरोप सीधे माइनिंग अधिकारी शिखर चेरपा पर है कि पूरे बकावंड विकासखंड में रेत चोरी उन्हीं के आशीर्वाद से हो रही है। वरना रेत माफिया ऐसा दुस्साहस हरगिज नहीं दिखाते।

दिखावे की थी कार्रवाई?
खनिज विभाग की टीम ने बीते 25 एवं 26 मई को बस्तर जिले के विभिन्न स्थानों पर जो कार्रवाई की थी। क्या यह कार्रवाई महज दिखावे की थी? टीम ने 25 मई को ग्राम माड़पाल, उपनपाल, लालबाग जगदलपुर कवि आसना और 26 मई को ग्राम जामगुड़ा फरसागुड़ा एवं उलनार क्षेत्र में अवैध रूप से गौण खनिज रेत, गि‌ट्टी, मुरूम का परिवहन करते 12 वाहनों को पकड़ा था। परिवहनकर्ताओं और उत्खनन कर्ताओं के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर वाहनों को पुलिस के हवाले किया गया था। तब खनिज अधिकारी शिखर चेरपा ने बताया था कि 6 हाइवा वाहन व एक ट्रेक्टर को रेत का, दो हाइवा वाहन को चूना पत्थर और दो टीपर को मुरूम परिवहन करते और एक जेसीबी से मुरूम खनन करते पकड़ा गया है। इन सभी 12 वाहनों को मय खनिज जप्त कर पुलिस के हवाले कर वाहन मालिकों के खिलाफ खनिज अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई को अपनी बड़ी उपलब्धि बताते हुए खनिज अधिकारी शिखर चेरपा ने मीडिया के जरिए वाहवाही लूटने की कोशिश की थी। मगर यह कार्रवाई महज दिखावे की साबित हुई है। तारापुर के ग्रामीणों द्वारा रेत परिवहन कर रहे ट्रकों को पकड़ा जाना इस बात का प्रमाण है।

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