टपकती, दरकती छत के नीचे जान जोखिम में डालकर पढ़ाई कर रहे हैं नौनिहाल

अर्जुन झा-
जगदलपुर। डबल इंजन वाली भाजपा सरकार जनजातीय क्षेत्रों के चहुमुखी विकास के लिए ठोस कार्य कर रही है। खासकर नक्सल प्रभावित आदिवासी इलाकों में नियद नेल्ला नार योजना के तहत सड़क, शिक्षा, बिजली, पानी, चिकित्सा, संचार आदि सुविधाएं बढ़ाने कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। इसके बावजूद बस्तर संभाग के अति नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में अधिकारी उल्टी गंगा बहा रहे हैं। स्कूल का भवन दरक गया है, छत से पानी टपक रहा है, बच्चों के बैठने के लिए जगह की तंगी है, एक टॉयलेट पर करीब 350 बच्चे निर्भर हैं। यह नजारे इस बात की गवाही दे रहे हैं कि बीजापुर जिले के अधिकारी साय सरकार को बदनाम करने की कसम खाए बैठे हैं।
बच्चों की जान से खिलवाड़ का यह गंभीर मामला बीजापुर जिले के भोपालपटनम ब्लाक से सामने आया है। इस ब्लॉक के स्वामी आत्मानंद विद्यालय मद्देड़ में मूलभूत सुविधाओं की कमी की समस्या सामने आई है। वर्ष 2022 से संचालित इस विद्यालय में शैक्षणिक गुणवत्ता तो है, लेकिन आधारभूत ढांचे की हालत बेहद दयनीय बनी हुई है। हाल ही में शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष संतोष पुजारी, उपाध्यक्ष शोभा दुबे और अन्य सदस्यों ने विद्यालय का निरीक्षण कर कई गंभीर कमियों को सामने लाया है। अध्यक्ष संतोष पुजारी ने बताया कि लगातार दो दिन बारिश होने पर विद्यालय की छत टपकने लगी है। छत की लीकेज के कारण पानी सीधे क्लास रूम में घुस रहा है। जल भराव से छात्र-छात्राओं को बैठने और पढ़ाई करने में दिक्कत हो रही है। निरीक्षण में यह भी देखा गया कि छत का प्लास्टर कई जगहों पर गिर चुका है, जो कि बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।

कमरों की है भारी कमी
इस विद्यालय में कक्षा पहली से बारहवीं तक की कक्षाएं संचालित हो रही हैं, मगर रूम की कमी के कारण विशेषकर 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को बैठने की भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एक तरफ छात्रों की दर्ज संख्या बढ़ रही है, तो दूसरी ओर आधारभूत सुविधाओं का अभाव शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है।

विद्यार्थी 341, टॉयलेट सिर्फ 1
विद्यालय में 185 छात्र एवं 156 छात्राओं सहित कुल 341 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। मगर इतने छात्र छात्राओं के लिए मात्र एक पुराना शौचालय ही उपलब्ध है, जो पूर्व माध्यमिक शाला से विरासत में मिला है। निरीक्षण में यह भी सामने आया कि छात्राओं के लिए अलग से शौचालय की कोई सुरक्षित व्यवस्था नहीं है, जो उनकी गोपनीयता और सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत चिंताजनक है। समिति के अनुसार कम से कम चार से पांच शौचालयों का निर्माण आवश्यक है, जिसमें लड़कियों के लिए अलग व्यवस्था भी होनी चाहिए।

अधिकारियों की अनदेखी
समिति सदस्यों ने जानकारी दी कि पूर्व में भी भवन की मरम्मत और अन्य आवश्यकताओं को लेकर मांग पत्र तैयार कर अधिकारियों को भेजा गया था, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। अब पुनः कलेक्टर के पास शाला प्रबंधन समिति स्वयं उपस्थित होकर मरम्मत और अन्य आवश्यकताओं का मांग पत्र देने की बात कही गई। ऎसी गंभीर स्थिति उजागर होने के बाद अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन कब तक इसे संज्ञान में लेते हैं, और क्या जल्द ही मरम्मत, शौचालय निर्माण और कक्षों की व्यवस्था की जाएगी या नहीं? फिलहाल छात्र-छात्राएं असुविधाओं में शिक्षा लेने को मजबूर हैं और विद्यालय प्रबंधन समिति की उम्मीदें प्रशासन पर टिकी हुई हैं।

प्रस्ताव पर ध्यान नहीं
छत में सीपेज की समस्या है, प्लास्टर भी गिर रहा है बच्चों के लिए शौचालय और क्लासरूम की कमी है, पूर्व में भी मांग की गई थी किंतु अब तक कोई भी निराकरण नहीं किया गया है।
संतोष पुजारी,
अध्यक्ष शाला प्रबंधन समिति

मिला है आश्वासन
विद्यालय में समस्याओं को लेकर पूर्व में भी अधिकारियों को अवगत कराया गया है अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही इन समस्याओं का निराकरण किया जाएगा।
श्रीनिवास जनगम, प्राचार्य, स्वामी आत्मानंद स्कूल मद्देड़

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