गोल्लागुड़ा का मांझीपारा बेहाल; कीचड़ में डूबी विकास की सच्चाई

अर्जुन झा-
जगदलपुर। एक बार तो आईए हमारे बस्तर में कीचड़ स्नान का मजा लेने। बस्तर की खूबसूरती में दाग धब्बे भी कम नहीं हैं। यहां कई ऐसे गांव हैं, जहां विकास कीचड़ में डूबा नजर आता है। रपटते, फिसलते और कीचड़ से लथपथ होते नौनिहाल अपने भविष्य की बुनियाद मजबूत बनाने स्कूल जा रहे हैं। कीचड़ में खड़ी बुनियाद भला कितनी टिकाऊ हो सकती है।

बस्तर संभाग के बीजापुर जिले के भोपालपटनम ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत गोल्लागुड़ा के मांझीपारा में हालात बेहद खराब हैं। यहां की सीसी सड़क पर लगभग 2 इंच तक कीचड़ जमा है। कीचड़ की वजह से ग्रामीण हर दिन परेशानियों का सामना कर रहे हैं। सड़क पर कीचड़ जमा होने की मुख्य वजह नाली का न बनना है। ग्रामीण कई वर्षों से इस समस्या को लेकर पंचायत स्तर पर सरपंच और सचिव को जानकारी देते आ रहे हैं, मगर किसी ने गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। यहां तक कि ग्रामीणों ने जनपद कार्यालय और सुशासन तिहार के दौरान भी आवेदन दिया, लेकिन कोई पहल नहीं की गई।

बढ़ी बीमारियों की आशंका
ग्रामीणों ने बताया कि नाली नहीं होने की वजह से घरों और आसपास का गंदा पानी सड़कों पर ही जाम रहता है। पानी निकासी की कोई व्यवस्था न होने से कीचड़ और गंदगी के बीच रोज बच्चे स्कूल जाते हैं। महिलाएं और बुजुर्ग जिस रास्ते से आना-जाना करते हैं वो रास्ता कीचड़ से लथपथ है। कीचड़ और गंदगी के कारण संक्रमण और बीमारियों का खतरा बना हुआ है, लेकिन सरपंच, सचिव की अनदेखी के कारण प्रशासन इस ओर पूरी तरह से आंखें मूंदे हुए है।

पीएचई की बड़ी लापरवाही
मोहल्ले में पीएचई विभाग ने नल जल योजना के तहत गड्ढे तो खोद दिए और पाइप लाइन बिछाई, मगर कार्य पूर्ण होने के बाद कुछ स्थानों पर गड्ढों को भरना ही अधिकारी भूल गए। यही नहीं कई जगह पाइप लाइन की दरारें, छेद या जोड़ ढीले होने के कारण पानी लीक हो रहा है, जिससे मोहल्ले में और अधिक जलजमाव की स्थिति बन गई है। जब इस पूरे मामले को लेकर जनपद पंचायत भोपालपटनम के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, तो उन्होंने बयान देने से इंकार कर दिया। जब जिम्मेदार अधिकारी ही जवाब देने से बच रहे हैं, तो फिर आम जनता अपनी समस्या लेकर किसके पास जाए? ग्रामीणों का कहना है कि यदि अधिकारियों को जवाब देने में संकोच है, तो कहीं न कहीं गलती स्वीकार की जा रही है, लेकिन सुधार की मंशा नहीं है।


परेशान और मजबूर हैं हम
कीचड़ भरे रास्ते और नाली नहीं है, सभी लोग परेशान हैं। इसी रास्ते से बच्चे स्कूल जाते हैं और इस रास्ते पर पानी जाम है। पानी कहीं नहीं निकल पा रहा है एक जगह जाम है तो इसको लेकर भी डर लग रहा है कहीं बीमारी ना फैले।
ग्रामीण,
ग्राम गोल्लागुड़ा

भेजे हैं इस्टीमेट
अभी अभी सरपंच बनी हूं। सचिव से जानकारी ली हूं तो उन्होंने कहा है कि बारिश के बाद काम करेंगे। काम को लेकर इस्टीमेट जनपद और जिला पंचायत में भेज दिए हैं।
श्रीमती उमा वाडेकर,
सरपंच ग्राम पंचायत
गोल्लागुड़ा

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