नक्सलियों का ऐसा खौफ, नहीं कराई शिक्षादूतों की हत्या की एफआईआर!

अर्जुन झा-
जगदलपुर। बस्तर में सुरक्षा बलों के हाथों लगातार बड़ी संख्या में नक्सली मारे जा रहे हैं, बावजूद ग्रामीणों के दिलों से नक्सलियों का खौफ कम होने का नाम नहीं ले रहा है। दो शिक्षादूतों को नक्सलियों ने बेरहमी से मार डाला, फिर भी परिजनों ने नक्सलियों के डर के मारे घटना की रिपोर्ट पुलिसमें दर्ज नहीं कराई। बिना पंचनामा, पोस्टमार्टम के शवों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
बस्तर संभाग के बीजापुर जिले के नेशनल पार्क एरिया के पीलूर और टेकमेट्टा स्कूल में शिक्षादूत के रूप में सेवाएं देते रहे सुरेश मेट्टा और विनोद मडे़ की हत्या बीते दिनों नक्सलियों ने मुखबिरी का आरोप लगाते हुए कर दी थी। नक्सलियों ने दोनों शिक्षादूतों के शवों को उनके गांवों के पास डाल दिया था। नक्सलियों ने मृतकों के परिजनों और ग्रामीणों को चेतावनी दे रखी थी कि वारदात की रिपोर्ट पुलिस में नहीं कराना है। लिहाजा डर के मारे परिजनों ने अब तक पुलिस में रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई है। सूत्रों ने बताया कि दोनों की हत्या बाद माओवादियों ने परिजनों को साफ कह दिया था कि अगर थाने रिपोर्ट दर्ज कराने गए तो गांव वापस नहीं लौट पाओगे। विदित हो कि उक्त दोनों शिक्षादूतों की 14 जुलाई को नक्सलियों ने पुलिस की मुखबिरी का आरोप लगाते हुए कर दी थी। दोनों शिक्षा दूत प्राशा पीलूर व टेकमेट्टा में 2019 से कार्यरत थे। सूत्रों ने बताया कि दोनों शिक्षादूतों को नक्सलियों ने शनिवार को अगवा किया था। उनके साथ मारपीट कर उनका गला घोट दिया गया। सोमवार 14 जुलाई को परिजनों को उनकी हत्या की जानकारी मिली। जिला शिक्षादूत संघ के पदाधिकारियों ने इस मामले की जानकारी मिलने ग्राम पीलूर और टेकमेट्टा जाकर परिजनों से मुलाकात की और वस्तुस्थिति की जानकारी ली। बताते हैं कि गांव में अब भी सन्नाटा पसरा है। नक्सलियों के खौफ का असर परिजनों के साथ ग्रामीणों पर भी बना रहा।

मुठभेड़ की दी गई सजा
शव के पास माओवादियों ने एक पर्चा छोड़ा है जिसमें शिक्षादूत सुरेश मेट्टा और विनोद मडे़ पर पुलिस के साथ दिसंबर 2022 एवं फरवरी 2025 की मुठभेड़ में मुख्य भूमिका निभाने का आरोप लगाया गया है। इसी की सजा के बतौर दोनों की हत्या करने की बात कही गई है। दोनों शिक्षादूतों पर माओवादियों ने अपने पर्चे में पुलिस के गोपनीय सैनिक के रुप में काम करने भी आरोप लगाया है। इस हत्या की जिम्मेदारी भाकपा नेशनल पार्क एरिया कमेटी ने ली है।नक्सलियों के खौफ के चलते न परिजनों ने हत्या की सूचना पुलिस को दी और न ही पुलिस मौके पर पहुंची। परिजनों ने बिना पुलिस कार्रवाई, पंचनामा और पोस्टमार्टम के ही दोनों शिक्षा दूतों के शवों का अंतिम संस्कार कर दिया।

फिर भी दूर नहीं हो रही दहशत
बस्तर संभाग में फोर्स लगातार नक्सलियों का खात्मा कर रही है, फिर भी अंदरूनी इलाकों के ग्रामीणों के दिलों से नक्सलियों की दहशत दूर होने का नाम नहीं ले रही है। सीआरपीएफ, पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों द्वारा नक्सल प्रभावित सुदूर गांवों में शिविर लगाकर ग्रामीणों की हर संभव मदद की जा रही है, उन्हें जीवनोपयोगी सामान दिए जा रहे हैं, उनका इलाज किया जा रहा है। लोगों में डर दूर कर विश्वास पैदा करने की हरचंद कोशिश की जा रही है। वहीं नक्सली रात में आकर निरीह लोगों को मार डालते हैं। नक्सलियों की इस करतूत के कारण ही उनका खौफ ग्रामीणों के दिलों में घर कर गया है।

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