नक्सलियों के मददगार बनकर काम कर रहे पंचायत सचिव, पहुंचाते हैं राशन
–अर्जुन झा-
जगदलपुर। बस्तर संभाग में एक बड़ा सनसनीखेज मामला सामने आया है। जो पंचायत सचिव सरकार से मोटी तनख्वाह लेते हैं और सरकारी योजनाओं की रकम से अपने घर भरते हैं, वे नक्सलियोंके बड़े मददगार और हिमायती हैं। ऐसे कुछ देशद्रोही सचिव नक्सलियों के किए रसद का इंतजाम करते हैं। यह चौकाने वाला खुलासाकिसी और ने नहीं बल्कि खुद आत्मसमर्पित नक्सलियों ने किया है। इस खुलासे के बाद पुलिस ने सुकमा जिले के दो पंचायत सचिवों को तलब किया है।
पंचायत सचिवों द्वारा नक्सलियों को राशन एवं अन्य सामग्री सप्लाई और नगद रकम का सहयोग किए जाने का चौकाने वाला मामला बस्तर संभाग के सुकमा जिले में सामने आया है। इस खुलासे के बाद सुकमा पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। इसी तारतम्य में कोंटा विकासखंड के दो पंचायत सचिवों को थाने में तलब किया गया था। हालांकि पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया है। जिन सचिवों के नामों का खुलासा किया गया है उनकी पंचायतों में हुई अनियमिताओं की जांच के आदेश तत्कालीन जिला पंचायत सीईओ श्री तिवारी द्वारा जारी किया गया था। ऐसे 3 पंचायतों की जांच रिपोर्ट अब तक जिला कार्यालय में जमा नहीं कराई गई है। इनमें से एक पंचायत की जांच में 50 लाख से अधिक का बिल वाउचर ही प्रस्तुत नहीं किए जा सके थे। यानि सीधे 50 लाख का फर्जीवाड़ा। ज्ञात हो कि 12 जुलाई को सुकमा पुलिस के समक्ष 1 करोड़ 18 लाख के ईनामी 23 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। इन नक्सलियों ने एक पंचायत सचिव द्वारा नक्सलियों की मदद की जाने की जानकारी पुलिस को दी है। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार खुलासे के बाद सुकमा पुलिस मामले की जांच कर सफेदपोश चेहरों को बेनकाब करने में जुट गई है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। इस मामले से जिन सचिवों के तार जुड़े होने का खुलासा हुआ है उन दो सचिवों को पिछले दिन थाना तलब किया गया था। दोनों सचिवों को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया। उन्हें हिदायत दी गई है कि जब भी पूछताछ के लिए बुलाया जाए थाना आना होगा।
दागी सचिव की जांच फाइल बंद?
सुकमा जिला पंचायत के कार्यालय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिस एक पंचायत सचिव का नाम इन दिनों पुलिस की सुर्खियों में है उसकी पंचायत सहित अन्य दो पंचायतों के कार्यों की जांच के निर्देश तत्कालीन जिला पंचायत सीईओ आईएएस अधिकारी श्री तिवारी द्वारा दिए गए थे। इन तीनों पंचायतों की जांच से पूरी भी कर ली गई है, लेकिन जांच प्रतिवेदन जिला पंचायत सुकमा में अब तक जमा नहीं कराई गई है। ये तीनों पंचायतें कोंटा विकासखंड में स्थित हैं। तीनों पंचायतों की जांच में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा भी हुआ था। इनमें एक पंचायत सचिव द्वारा 50 लाख से अधिक का बिल वाउचर ही प्रस्तुत नहीं किया गया था। उक्त पंचायतों का जांच वर्ष 2018-2019 से 2021-23 तक हुई अनियमिता की कराई गई थी। जांच में पंचायत सचिव कटघेरे में तो हैं ही अब एक दो अधिकारी भी जांच के दायरे में आ सकते हैं, जो वर्षों से सुकमा में जमे हुए हैं।
जांच अधिकारी सचिव पर मेहरबान
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जांच अधिकारी भी उक्त पंचायत सचिव को बचाने में लगे हैं। यही वजह है कि जांच रिपोर्ट जिला पंचायत में जमा नहीं कराई जा रही है। वहीं पंचायत सचिव जांच अधिकारी को मैनेज करने दौड़ लगा रहे हैं। ताजा खुलासे से जाहिर होता है कि पंचायत सचिव ग्राम विकास विभिन्न योजनाओं के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारों से मिलने वाले धन की हेराफेरी कर पंचायत सचिव न सिर्फ अपना घर भर रहे हैं, बल्कि उसी धन से नक्सलियों की मदद भी कर रहे हैं। बस्तर संभाग की ग्राम पंचायतों में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार केंद्र सरकार से मिलने वाली 15वें वित्त की राशि में हो रहा है। राज्य और केंद्र सरकार को इस ओर गंभीरता पूर्वक ध्यान देना होगा।
