कांग्रेस में यह कैसा साजिश का खेल; जुझारू आदिवासी अध्यक्ष बैज को पचा नहीं पा रहे सत्तामोही नेता?
–अर्जुन झा-
जगदलपुर। वैसे तो पूरे देश में कांग्रेस अपनी आंतरिक गुटबाजी और टांग खिंचाई की राजनीति के लिए बदनाम है, मगर छत्तीसगढ़ कांग्रेस में बीते कुछ दिनों से जो बयानबाजी का दौर कांग्रेस के एक खेमे की ओर से शुरू किया गया है, वह एक बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रहा है। घर परिवार छोड़कर जो प्रदेश अध्यक्ष पार्टी को मजबूत बनाने के लिए दिन रात एक किए हुए है, जमकर पसीना बहा रहा, बाढ़ में फंसे पत्नी बच्चों की चिंता छोड़ पार्टी की सेवा में लगा हुआ है, उस आदिवासी प्रदेश अध्यक्ष को हटाने तिकड़मबाजी की जा रही है। बेवजह पार्टी की बखिया उधेड़ी जा रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा आदिवासी हित में उठाए जा रहे कदमों पर बेड़ियां जकड़ने जैसा है और यह पार्टी के लिए कतई शुभ संकेत नहीं है।
प्रदेश के कुछ बड़े कांग्रेस नेता अचानक फिर सिर उठा चुके हैं। वे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष को हटाने की बात कह रहे हैं, मगर अपनी इस मांग के पीछे की कोई दलील या वजह नहीं बता रहे हैं, बस रटे जा रहे हैं प्रदेश अध्यक्ष को हटाना है, हटाना है। छत्तीसगढ़ की पूरी कांग्रेस और उसके मैदानी कार्यकर्ता जहां दीपक बैज के नेतृत्व न केवल संतुष्ट हैं, बल्कि उससे आशान्वित भी हैं, वहीं दूसरी ओर सत्तामोही कुछ नेता आम कार्यकर्ताओं की भावनाओं को दरकिनार कर अनाप शनाप बयानबाजी कर रहे हैं। जो नेता भाजपा की दूरदर्शी सोच की वजह से पहली बार राजनीतिक क्षितिज पर उभरे मजदूर और किसान बुजुर्ग से चुनाव हार गए, वही नेता कांग्रेस की मजबूती की दुहाई देते हुए अध्यक्ष बदलने की वकालत कर रहे हैं। यह हास्यास्पद ही नहीं, बल्कि गैर जिम्मेदाराना कदम भी है। जो चौबे जी साजामें फिर से अपना दरबार सजा नहीं पाए, अपनी जमीन बचा नहीं पाए, वही चौबे जी कांग्रेस की जमीन बचाने के लिए प्रदेश अध्यक्ष बदलने की दुहाई दे रहे हैं। लोग तो कह रहे हैं कि आजकल चौबे जी छब्बे जी बनने की फिराक में हैं और इस चक्कर में कहीं वे दुबेजी बनकर न रह जाएं।चर्चा तो यह भी है कि रवींद्र चौबे उन मौका परस्त नेताओं में शुमार हैं, जो अपनी राजनीति चमकाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। सभी को मालूम है कि कांग्रेस की राजनीति में उनकी रुचि नहीं रहती है वह कूटनीति में विश्वास करते हैं। एक जमाने में भूपेश बघेल को फूटी आंख भी देखना पसंद नहीं करने वाले रवींद्र चौबे खुद मंत्री बनने के लिए मंच पर ही भूपेश बघेल का चरण चुंबन की हद तक चले गए थे। अति महत्वकांक्षा से ओतप्रोत चौबे जी दीपक बैज को प्रदेश कांग्रेस की बागडोर सौंपे जाने लेकर कभी संतुष्ट नहीं रहे। उनकी शुरू से यही मंशा रही है कि रायपुर के ब्राह्मण पारा या दुर्ग के आसपास के किसी सवर्ण नेता को अध्यक्ष बनाया जाए, जो उनका कहा माने, उनकी हर जरूरत पूरी करे। सूत्रों की बातों पर यकीन करें जब चौबे जी यूपी में चुनाव प्रचार के लिए गए थे और वहां बीमार होकर एक निजी अस्पताल में भर्ती हुए तब उस समय उन्होंने सीएम भूपेश बघेल से अपनी जन बचाने की गुहार लगाई थी, भूपेश बघेल ने भी इस कूटनीतिक पंडित को अपनी राजनीति चमकाने के उद्देश्य से मदद की थी। राजनीति में यह चलन है कि मदद के एवज में टर्म्स एंड कंडीशन लागू होता है कमोबेश अब यही राजनीतिक शर्त और समझौते का कर्ज उतारने के लिए वे इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं। यह तथ्य भी सर्व विदित है कि भूपेश बघेल भी मुख्यमंत्री बनने से पहले तक पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनने लालायित रहे हैं। मुख्यमंत्री की कुर्सी चली जाने के बाद उनकी यह लालसा और भी बलवती हो उठी है। ईडी की राडार में पुत्र के आने के बाद बचाव के लिए केंद्र और राज्य सरकारों पर दबाव डालने के लिए अध्यक्ष पद को अनुकूल मानकर एक सोची समझी साजिश के तहत ऎसी बयानबाजी की जा रही है। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को झुकाने के लिए तिकड़मबाजी की जा रही है।
अनमोल है दीपक बैज का योगदान
दीपक बैज एक सहृदय आदिवासी नेता के रूप में जाने पहचाने जाते हैं। पार्टी के लिए उनका योगदान अनमोल है। जनहित के मुद्दों को लेकर 400 किलोमीटर की पदयात्रा, हसदेव अरण्य को बचाने का मसला हो, बस्तर के जल, जंगल, जमीन और इंद्रावती नदी को बचाने का मुद्दा हो या फिर कवर्धा जिले के साहू परिवार को इंसाफ दिलाने का मसला, दीपक बैज हर मसले पर मुखर रहे हैं। भरी बरसात में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मालकिकार्जुन खड़गे की सभा को सफल बनाने में दीपक बैज ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। मृतप्राय हो चली पार्टी में नई जान फूंकने वाले जिस दीपक बैज के अवदान योगदान की पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी तक ने पत्र लिखकर प्रशंसा की है, उस दीपक बैज को आज परेशान किया जा रहा है। अगर चौबेजी भूपेश के उकसाने पर छब्बेजी बनने का प्रयास कर रहे हैं, तो उन्हें दुबेजी ही बनकर रह जाना पड़ सकता है।
धरा रह जाएगा राहुल गांधी का सपना
कांग्रेस नेता राहुल गांधी सदैव आदिवासी हित की बात करते आए हैं। वे आदिवासियों को ऊंचे सोपान पर देखना चाहते हैं। यही वजह है कि राहुल गांधी ने छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस का नेतृत्व बस्तर के आदिवासी नेता दीपक बैज को सौंपा है। राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री खड़गे और राहुल गांधी के इस निर्णय ने भाजपा को भी सांसत में डाल दिया था और मजबूर होकर भाजपा ने प्रदेश में आदिवासी मुख्यमंत्री बनाया है। यही नहीं भाजपा ने पार्टी का प्रदेश नेतृत्व की जिम्मेदारी भी बस्तर के ही नेता को सौंपी है। इन तथ्यों के हवाले से कहा जा सकता है कि कांग्रेस नेता स्वार्थ के चलते हुए प्रदेश अध्यक्ष को बदलने की जो बात कह रहे हैं, उससे प्रदेश के आदिवासी समुदाय में कांग्रेस के प्रति नाराजगी बढ़ सकती है और यह कांग्रेस के लिए आत्मघाती है।
