नक्सलियों को पसंद नहीं है बस्तर के बच्चों का राष्ट्रप्रेम पढना लिखना
–अर्जुन झा-
जगदलपुर। नक्सली जो कारगुजारियां दिखा रहे हैं, उससे साबित हो गया है कि वे आदिवासी हितैषी होने का सिर्फ ढोंग करते हैं। जल जंगल, जमीन और खनिज संपदा पर बस्तर के आदिवासियों के हक की दुहाई देने वाले नक्सली दरअसल नहीं चाहते कि बस्तर के बच्चे पढ़ लिखकर देश की सेवा में योगदान दें, देशभक्त बन जाएं। उन्हें तो राष्ट्र ध्वज तिरंगे से भी नफरत है। नक्सलियों की यही सोच बस्तर में नक्सलवाद के अंत का एक बड़ा कारण बन रही है।
बस्तर संभाग में एक के बाद एक कुल 9 शिक्षादूतों की हत्या और नक्सली स्मारक पर स्वतंत्रता दिवस के दौरान तिरंगा फहराने का शानदार साहस दिखाने वाले युवक की हत्या इन तथ्यों को पुख्ता करते हैं। नक्सली पहले शाला भवनों सरकारी बिल्डिंगों में आगजनी, सड़कों, पुल पुलियों को बम से उड़ाने का काम किया करते थे। यह घटनाएं उनकी शिक्षा और विकास विरोधी सोच को दर्शाती रही हैं। नक्सलगढ़ के गांवों में सुरक्षा बलों के कैंप स्थापित होने और फोर्स की पहुंच बढ़ जाने के बाद इस तरह की घटनाएं थम गईं हैं। मगर अब अपनी शिक्षा विरोधी सोच को आगे बढ़ाते हुए नक्सलियों ने अपना पैतरा बदल लिया है। अब वे बस्तर के बच्चों को सुपोषित बनाने, उनके बीच ज्ञान का उजियारा फैलाने वाले आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और शिक्षदूतों को खत्म कर बस्तर संभाग के बच्चों को कुपोषित और अशिक्षित बनाए रखने का अभियान चला रहे हैं। अपने इस मिशन के तहत नक्सली बस्तर संभाग में नौ शिक्षादूतों और दो आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मौत के घाट उतार चुके हैं। सुकमा जिले में चार शिक्षादूतों और बीजापुर
जिलों में पांच शिक्षादूतों के साथ ही दो आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की हत्या नक्सली कर चुके हैं। नक्सलियों का राष्ट्र विरोधी चेहरा तब सामने आया, जब उन्होंने सुकमा जिले के सिलगेर में नक्सली स्मारक पर 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस की खुशी में तिरंगा फहराने वाले एक आदिवासी युवक की जान नक्सलियों ने ले ली थी। ये घटनाएं नक्सलियों के चाल, चरित्र और चेहरे को उजागर करती हैं। बता दें कि शिक्षादूत की भूमिका वे युवक निभाते हैं, जो पढ़े लिखे होते हैं और गांवों के बच्चों को शिक्षित बनाने का जिनमें जुनून होता है। उन्हें एवज में महज दस हजार रुपए का मानदेय मिलता है। ये युवा उन स्कूलों को पुनः खोलकर शिक्षा की रौशनी बिखेरते हैं, जिन्हें नक्सलियों ने ही बंद करा दिया था।
फिर एक शिक्षा दूत की हत्या
नक्सलियों बस्तर संभाग के बीजापुर जिले में फिर एक शिक्षा दूत की हत्या कर दी है। जिले के गंगालूर थाना क्षेत्र के तोड़का गांव में नक्सलियों ने 25 वर्षीय शिक्षादूत कल्लू ताती पिता मंगल ताती निवासी तोड़का की बेरहमी से हत्या कर दी। कल्लू ताती गंगालूर क्षेत्र के नेंड्रा स्कूल में बच्चों को पढ़ाता था। जानकारी के मुताबिक सोमवार शाम स्कूल से लौटते समय नक्सलियों ने कल्लू ताती का अपहरण कर लिया था और देर रात उन्हें मौत के घाट उतार दिया। घटना से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। पुलिस घटना की जांच में जुट गई है। बस्तर संभाग के दुर्गम और नक्सल प्रभावित इलाकों में लंबे समय तक स्कूल बंद रहे हैं। ऐसे में शासन ने स्थानीय युवाओं को शिक्षादूत के रूप में नियुक्त कर स्कूलों को पुनः संचालित करने का प्रयास किया है। उनकी वजह से कई गांवों में शिक्षा की लौ फिर से जल उठी है और बच्चे स्कूल लौटने लगे हैं। बंद पड़े स्कूलों के पुनः संचालन के बाद से अब तक नक्सली बीजापुर जिले में कुल शिक्षादूतों की हत्या कर चुके हैं।
